पंजाब में हिंसा की उग्रता फिर नियति न बन जाये

देश की कृषि एवं महापुरुषों की शांति भूमि राजनीतिक कारणों से हिंसा, आतंकवाद एवं नशे की भूमि बन गयी है। जबसे आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है, हिंसा, हथियारों एवं नशे की उर्वरा भूमि बनकर जीवन की शांति पर कहर ढहा रही  है। राज्य में तेजी से…
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रेगिस्तान के जहाज उंट के संरक्षण की सराहनीय पहल

राजस्थान सरकार एक बार फिर रेगिस्तान के जहाज उंट के संरक्षण और विकास के लिए गंभीर नजर आने लगी है। दरअसल राजस्थान ही नहीं देश में उंटों की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। यह सब तो तब है जब देश में उंट की घटती संख्या को लेकर सरकारों…
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जीवन शक्ति का पर्याय है सहिष्णुता

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व सहिष्णुता दिवस हर साल 16 नवम्बर को मनाया जाता है। सहिष्णुता का जिंदगी में बहुत महत्त्व है। जिसने जीवन में सहन करना सीख लिया वह जिंदगी की हर जंग जीत सकता है। सहिष्णुता जीवन शक्ति का पर्याय है। विश्व के…
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संचार क्रांति ने छीन ली पुस्तकों की अहमियत

देश में प्रतिवर्ष 14 से 20 नवम्बर तक राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह मनाया जाता है। आज का युवा पुस्तक का मतलब पाठ्यपुस्तक ही समझता है। स्कूल और कॉलेज में पुस्तक लाइब्रेरी जरूर है मगर उसमें जाने का समय विद्यार्थी के पास नहीं है। कक्षा में…
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बिना बात के बतंगड़ में माहिर है कांग्रेस

भारतीय राजनीति में अक्सर बिना बात के बतंगड़ होते रहे हैं। ऐसे राजनेता चर्चित माने जाते हैं जो वास्तविक उपलब्धियों एवं सकारात्मक आयामों की भी आलोचना एवं छिद्रान्वेषण करने में चतुर होते हैं। बिना बात का बतंगड़ करने में कांग्रेस के नेता…
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राजनीतिक असंवेदनशीलता का परिणाम है प्रदूषण

दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पराली एवं वायु प्रदूषण से उत्पन्न दमघोटू माहौल का संकट जीवन का संकट बनता जा रहा हैं। संपूर्ण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घने कोहरे में डूबी हुई जानलेवा होती जा रही है। सब जानते हैं कि…
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खुदरा ऋणों से गुलजार होते बाजार के साथ ही बढ़ती चुनौतियां

देश में कोरोना के बाद अब जिस तरह से बाजार में तेजी देखी जा रही है और जिस तरह से बैंकों से खुदरा ऋणों के वितरण में तेजी आई है वह निश्चित रुप से उत्साहजनक है। इससे बाजार में नए जोश का संचार हुआ है तो अर्थ व्यवस्था को भी गति मिली हैै। इससे…
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क्यों खास है कैथोलिक-प्रोटेस्टेंट चर्च का करीब आना

उत्तर भारत के ईसाई समाज के लिए पिछली 2 नवंबर की तारीख विशेष रही। उस दिन जब सारी दुनिया के ईसाई 'ऑल सोल्स डे' मना रहे थे, तब हरियाणा के शहर रोहतक में कैथोलिक और प्रोटेस्टेट पादरी समुदाय के लोग मिलजुलकर इस त्यौहार पर एक साथ बैठे। इन्होंने…
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सामाजिक समरसता को बढ़ाएगा सवर्ण आरक्षण

कहते हैं गरीबी से बढ़ा कोई अभिशाप नहीं होता। गरीबी न जाति देखती है न धर्म।पिछड़ेपन के मूल में भी गरीबी ही है. केंद्र की प्रगतिशील और संवेदनशील सरकार ने समाज के इस सच को पहचाना और २०१९ में संविधान संशोधन विधेयक लाकर देश में निर्धन सवर्ण…
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सात पाप वर्तमान में एक मार्गदर्शक ज्योति पुंज हैं

(वर्तमान में, व्यक्तियों, समाजों और देशों को बिगड़ते नैतिक और नैतिक ताने-बाने के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चेतना और इन पापों की स्वीकृति नैतिक जागृति का कारण बन सकती है और समाज और दुनिया की सभी मौजूदा बुराइयों को दूर कर…
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