गाय महज जानवर नहीं, एक आस्था है

डॉo सत्यवान सौरभ, रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,

गो हत्या देश में हमेशा से ही एक संवेनदशील मुद्दा रहा है और इस पर राजनीति होती रही है। मगर जिस समाज में गाय को पूजा जाता है,उसके वध पर अंकुश नहीं,  और वहां  इसके लिए कोई कानून नहीं हो तो वह कैसा समाज ? हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार गाय को गौ माता भी कहा जाता है। गौ माता के पूजन के बारे में वेदशास्त्रों, धर्मग्रंथों में क्या कहा गया है। इसलिए अगर किसी के हाथों गाय की हत्या हो जाती है तो यह घोर पाप माना जाता है।

सन् 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहना पड़ा,“मुझे पता है कुछ लोग जो रात में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं, वे सुबह उठ कर गो रक्षक का चोला ओढ़ लेते हैं.” मॉब लिंचिंग और गो रक्षा के नाम पर होने वाली  हिंसा को देख कर कई बार मांग उठी  कि गो वध के विरुद्ध सख़्त क़ानून बना दिया जाए. कुछ तो गो वध को देश भर में प्रतिबंधित करने का आग्रह भी कर चुके हैं. गो वध के बाबत इस समय विभिन्न क़ानून हैं. देश के 28 में से 20 राज्यों में गो वध पर रोक है, लेकिन बंगाल, केरल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा में बीफ कानूनी तौर पर सब जगह मिलता है.

उच्चतम न्यायालय ने गो वध मामले में अक्सर इसके आर्थिक पहलू को नज़र में रखा है, जैसे उपयोगी पशुओं का वध न हो, लेकिन वे पशु जो आर्थिक रूप से बोझ बन रहे हों, उन पर यह रोक न हो. कुछ क़ानून विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि एक लोकतांत्रिक देश में, एक वर्ग की भावनाओं को ठेस न पहुंचे, इस कारण से देश के अन्य नागरिकों को उनके आहार से क़ानूनन रोकना बुद्धिमानी नहीं है लेकिन मुस्लिम उलेमा यानी धार्मिक विद्वान शुरू से इस मामले में कानूनी बहस करते हैं।

गो-हत्या पर कोई केंद्रीय क़ानून नहीं है. पर अलग राज्यों में अलग-अलग स्तर की रोक दशकों से लागू है.  भारत के 29 में से 11 राज्य (केरल, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और एक केंद्र शासित राज्य लक्षद्वीप में गो-हत्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है)  ऐसे हैं जहां गाय, बछड़ा, बैल, सांड और भैंस को काटने और उनका गोश्त खाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, बाक़ी 18 राज्यों में गो-हत्या पर पूरी या आंशिक रोक है.

देश के 11 राज्यों – कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, और दो केन्द्र प्रशासित राज्यों – दिल्ली, चंडीगढ़ में पूरा प्रतिबंध लागू है. गो-हत्या क़ानून के उल्लंघन पर सबसे कड़ी सज़ा भी इन्हीं राज्यों में तय की गई है. हरियाणा की भाजपा सरकार ने 2015 में गो संरक्षण एवं गो संवर्धन कानून बनाया था। गोवध पर हरियाणा का कानून दूसरे राज्यों से काफी कड़ा है। इसमें अधिकतम दस वर्ष की कैद और तीस हजार रुपये से एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

जुर्माना न भरने पर एक वर्ष का और कारावास भुगतना होगा। वहीं महाराष्ट्र में गो-हत्या पर 10,000 रुपए का जुर्माना और पांच साल की जेल की सज़ा है. हालांकि छत्तीसगढ़ के अलावा इन सभी राज्यों में भैंस के काटे जाने पर कोई रोक नहीं है.भारत की 80 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी हिंदू है जिनमें ज़्यादातर लोग गाय को पूजते हैं. लेकिन ये भी सच है कि दुनियाभर में ‘बीफ़’ का सबसे ज़्यादा निर्यात करनेवाले देशों में से एक भारत है. दरअसल ‘बीफ़’, बकरे, मुर्ग़े और मछली के गोश्त से सस्ता होता है. इसी वजह से ये ग़रीब तबक़ों में रोज़ के भोजन का हिस्सा है, ख़ास तौर पर कई मुस्लिम, ईसाई, दलित और आदिवासी जनजातियों के बीच.

हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार गोवंशीय पशुओं की रक्षा और गोकशी की घटनाओं से जुड़े अपराधों को रोकने लिए अब और सख्ती करने जा रही है।इसके तहत इस तरह के अपराधों को संज्ञेय व गैरजमानती बनाया जाएगा। दंड व जुर्माने को भी बढ़ाया जाएगा। गोकशी करने पर अब दस साल की सजा होगी। अभी तक गोवंश को नुकसान पहुंचाने पर सजा का प्रावधान नहीं था। अब इसमें एक साल से सात साल तक की सजा का प्रावधान कर दिया गया है। इस कदम से  गोवंशीय पशुओं को हानि पहुंचाने व उनके गैरकानूनी व अनियमित परिवहन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

इसके लिए सरकार उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश-2020 लाएगी। इसका मकसद गोकशी की घटनाओं व गोवंश से जुड़े अपराधों को पूरी तरह रोकना है। अब राज्य में गोकशी करने पर अब दस साल की सजा होगी जो कोई धारा -3, धारा-5 या धारा-5 ‘क’ के उपबन्धों का उल्लंघन करता है या उल्लंघन करने का प्रयास करता है या उल्लंघन करने के लिए दुष्प्रेरित करता है, वह तीन साल से 10 साल की सजा पाएगा। जुर्माना तीन लाख से पांच लाख तक होगा। अगर एक बार दोष सिद्ध होने के बाद पुन: अपराध करते पाया गया तो उसे दोहरे दंड  से दंडित किया जाएगा।   ऐसे अपराधों के अभियुक्तों का नाम, फोटोग्राफ, उसका निवास स्थल है, प्रकाशित किया जाएगा। राज्य में किसी अगर किसी वाहन में गोमांस निकला तो चालक, वाहन मालिक व आपरेटर पर कार्रवाई होगी जो गाय बरामद होंगी और उनके भरण-पोषण पर व्यय की वसूली अभियुक्त से एक वर्ष की अवधि तक अथवा गाय या गोवंश को निर्मुक्त किए जाने तक, जो भी पहले हो, स्वामी के पक्ष में की जाएगी।

गोवंशीय पशुओं को शारीरिक क्षति द्वारा उनके जीवन को संकट में डालने अथवा उनका अंग-भंग करने और गोवंशीय पशुओं के जीवन को संकट में डालने वाली परिस्थितियों में परिवहन किए जाने पर अब तक दंड नहीं था। अब यह अपराध करने  पर कम से कम एक वर्ष का कारावास होगा और 7 वर्ष तक हो सकता है। जुर्माना एक लाख से तीन लाख तक हो सकता है।

लेकिन देश में कहीं भी उन गायों के लिए कोई प्रवाधान नहीं है, जिन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। नतीजन वे अक्सर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाती हैं। कई बार वे पोलिथीन खा जाती हैं, जिससे गंभीर रूप से बीमार हो जातीहैं। गोशालाओं की दुर्दशा भी किसी से छिपी नहीं है। अक्सर ही गोशालाओं में भूख से गायों के मरने की खबरें आती रहती हैं।गायों की देखभाल करने के लिए बनाई गई  गोशालाओं की दुर्दशा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए उनके चारे और स्वास्थ्य का का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

जो गाय दूध देने के काबिल नहीं रहतीं, उन्हें कुछ लोग सड़क पर खुला छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ भी सजा का प्रावधान होना चाहिए।  गाय को लावारिस सड़क पर छोड़ देना भी सही नहीं है। अगर लावारिस गाय दुर्घटना का शिकार होकर मर जाए तो उसे भी गोवध ही माना जानाचाहिए। गाय महज एक जानवर नहीं है। यह भारतीय समाज के लिए आस्था भी है। कुछ लोग गोवध करके इस आस्था पर चोट करते हैं, जो नहीं होनी चाहिए।

वैसे यह भी विडंबना है कि कई राज्यों में आज भी गोवध जारी है। दुनिया भर में गोमांस निर्यात किया जाता है। देश के कुछ प्रदेशों में खुलेआम गोमांस बेचा जाता है। गाय के प्रति ये दोहरी नीति समझ से परे है। बहरहाल, गोेवध रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का यह सराहनीय प्रयास है। गोवंश बचाया ही जाना चाहिए।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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