जान हथेली पर रख कर चलते है लोग

बाल मुकुन्द ओझा

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हर साल जनवरी के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है, लेकिन इस वर्ष, 2021 में सरकार ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह की जगह राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह मनाने का निर्णय किया है। सड़क सुरक्षा माह 2021 अभियान के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु आम-जन मानस को यातायात नियमों के प्रति अधिकाधिक जागरूक किया जाएगा। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत 18 जनवरी से 17 फरवरी एक माह तक सड़क सुरक्षा अभियान का आगाज किया गया है। इसमें सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा थीम पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को सड़क सुरक्षा मानकों और यातायात के नियमों का पालन करने का अनुरोध किया जा रहा है। सड़क सुरक्षा से संबंधित बहुत से कार्यक्रमों का आयोजन करके द्वारा लोगों को सड़क पर कैसे वाहन चलाते हैं के बारे में प्रोत्साहित किया जाता है। अभियान के दौरान विभिन्न प्रकार के शैक्षणिक बैनर, सुरक्षा पोस्टर, सुरक्षा फिल्म, जेब गाइड और सड़क सुरक्षा से संबंधित पत्रक आदि सड़क पर यात्रा करने वाले यात्रियों को दिए जाते हैं। सड़क पर यात्रा करते समय वे सड़क सुरक्षा के बारे में प्रोत्साहित होते हैं। वे लोग जो गलत तरीके से सड़क पर वाहन चलाते हैं उन्हें नियमों की जानकारी देकर अपनी खुद की सुरक्षा से अवगत कराया जाता है।
हमारे देश में सड़क सुरक्षा भाग्य भरोसे हो गई है। सड़क पर निकलने वाले किसी भी व्यक्ति को यह मालूम नहीं है की वह सुरक्षित अपने घर पहुँच ही जायेगा। चाहे कितने ही सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाले, इसमें तब तक कोई सुधार नहीं होगा जब तक हम खुद नहीं सुधरेंगे। भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। राजस्थान की बात करें तो यहाँ साढ़े दस हजार लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गवां रहे है। जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हो जाते हैं और हजारों जीवन भर के लिए विकलांग भी हो जाते हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वीकार किया है कि उनके प्रदेश में हर साल दस हजार से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे है जिनमें से अधिकांश युवा है। ये स्थिति अत्यंत ह्रदय विदारक है। राजस्थान में प्रतिवर्ष तीस हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही है जिनमें युवा सर्वाधिक शिकार हो रहे है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन दिनों सड़क हादसों के बादल मंडरा रहे है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक प्रतिदिन इसकी चपेट में आरहे है। यातायात मार्गों पर अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। दो पहिया हो या चार पहिया किसी को भी जिंदगी की परवाह नहीं है। एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी है। यातायात नियमों की सरेआम धज्जियाँ उड़ रही है। नियमों की पालना नहीं होने से दुर्घटनाओं के अम्बार लग रहे है। सड़क दुर्घटनाओं से अखबार भरे रहते हैं। राजधानी के यातायात मार्ग तो जाने-अनजाने मौत के मार्ग बन गये हैं। सबसे बुरी स्थिति टोंक रोड पर बी-2 बाईपास, जे.एल.एन. मार्ग पर ओ.टी.एस. चौराहा, जगतपुरा पुलिया, झालाना मार्ग, अजमेर रोड, न्यू सांगानेर रोड, सिरसी रोड, राजापार्क में गोविन्द मार्ग, अजमेरी गेट, विश्वविद्यालय मार्ग, घाट की गुणी की है।
जान लेवा सड़क हादसों को रोकने के लिए जरूरी है कि सड़कों की स्थिति अच्छी हो, जन कल्याणकारी सरकार का यह दायित्व है कि वह उच्च गुणवत्ता युक्त सड़कों का निर्माण करें और क्षत-विक्षत सड़कों को दुरस्त करें ताकि वाहन किसी दुर्घटना का शिकार नहीं होवे। नगर निकायों और एजेन्सियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिये। घटिया निर्माण पर तुरन्त कार्यवाही हो तथा यातायात और टैªफिक की वर्तमान स्थिति में जनभावनाओं के अनुरूप सुधार हो। आम आदमी को राहत प्रदान करने के लिए निर्माण कार्यों में पारदर्शिता का होना अत्यावश्यक है।
सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है, आम जनता में खासतौर से नये आयु वर्ग के लोगों में अधिक जागरुकता लाने के लिये इसे शिक्षा, सामाजिक जागरुकता आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ा गया है। सड़क दुर्घटना, चोट और मृत्यु आज के दिनों में बहुत आम हो चला है। सड़क पर ऐसी दुर्घटनाओं की मुख्य वजह लोगों द्वारा सड़क यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा उपायों की अनदेखी है। गलत दिशा में गाड़ी चलाना, सड़क सुरक्षा नियमों और उपायों में कमी, तेज गति, नशे में गाड़ी चलाने आदि । सड़क हादसों की संख्या को घटाने के लिये उनकी सुरक्षा के लिये सभी सड़क का इस्तेमाल करने वालों के लिये सरकार ने विभिन्न प्रकार के सड़क यातायात और सड़क सुरक्षा नियम बनाये हैं। हमें उन सभी नियमों और नियंत्रकों का पालन करना चाहिये जैसे रक्षात्मक चालन की क्रिया, सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल, गति सीमा को ठीक बनायें रखना, सड़क पर बने निशानों को समझना आदि।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

 

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