सुखद मातृत्व हर महिला का सपना

डॉ प्रभात कुमार सिंघल,  लेखक एवं पत्रकार ,कोटा

विवाह के पश्चात हर दम्पत्ति का विशेष कर महिला का सपना होता है कि अब उन्हें सन्तान सुख की प्राप्ति हो। मातृत्व की भावना हर महिला मन संजोती है। ऐसी महिला का यह सपना सुखद मातृत्व में साकार हो सकता है यदि वह कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखे और कुछ नियमों का पालन करे।
सुखद मातृत्व प्राप्ति की परिकल्पना को साकार करने के लिए अपनायी जाने वाली सावधानियांे पर हमने बात की कोटा के बारां रोड स्थित रूची हॉस्पीटल की संचालिका एवं गायनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. रूची गोयल से। डॉ. रूची गोयल बताती है कि महिला के गर्भधारण के पश्चात प्रथम तीन माह अत्यन्त महत्वपूर्ण होते है। इस अवधि में गर्भपात की संभावनाएं रहती है। जैसे ही महिला को ज्ञात हो कि वह गर्भवती है तुरंत ही चिकित्सक को दिखाना चाहिए और चिकित्सक द्वारा बताये गये सुझावों को ध्यान में रखकर पालन करना चाहिए।
गर्भवती महिला को सलाह दी जाती है कि वह जितना हो सके कार्य करे, डॉ. की सलाह के बिना किसी भी प्रकार बेड रेस्ट नहीं करे तथा सुबह-सायं अवश्य टहले। महिला अपने व पेट में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य की दृष्टि से अपने भोजन में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करे जिनमें प्रोटीन, विटामीन एवं आयरन की मात्रा अधिक हो। गर्भवती महिला को अपने आहार में हरी सब्जियां, दूध, दाले व फलों का सेवन अधिक करना चाहिए। हरी सब्जियों से आयरन, दालों से प्राटीन एवं फलों से विटामीन्स की आपूर्ति होती है। प्रसव कभी भी दाई या अन्य किसी अप्रशिक्षित महिला से कभी भी घर पर नहीं करना चाहिए। प्रसव हमेशा संस्थागत सरकारी अथवा निजी चिकित्सालय में कुशल चिकित्सक द्वारा ही करवाया जाना चाहिए।
गर्भवती महिला को शुरू के तीन माह में फोलिक एसिड (मल्टी विटामिन्स) शुरू किया जाता है, जिससे शिशु को जन्मजात पाई जाने वाली बिमारियों  से बचाव होता है। ऐसी महिला को अधिक सफर करने से बचना चाहिए। गर्भवती महिला को चार से नो माह में आयरन और कैल्सियम की गोलियां शुरू की जाती हैं, दो टिटनेस के टीके लगवाये जाते है तथा पांच से छह महिने के मध्य एक सोनोग्राफी की की जाती है। इसके बाद जरूरत समझी जाती है तो सोनोग्राफी करायी जाती है। शरीर में प्राटीन की पर्याप्त मात्रा बनी रहना आवश्यक है, जिससे गर्भ में पानी की मात्रा बराबर बनी रहती है। इस अवधि में भी गर्भवती महिला को अपना घरेलू कार्य जब तक डॉक्टर मना नहीं करे करते रहना चाहिए। समय-समय पर चिकित्सक को दिखाना एवं जांच कराना आवश्यक है जिससे कि बल्डप्रेशर, खून की कमी, पानी की कमी आदि का समय रहते उपचार हो सके।
डॉ. रूची ने बताया कि यह धारणा गलत है कि पानी पीने से गर्भाशय में पानी भरता है। आयरन ओर कैल्शियम की टेबलेट से बच्चे का फालतू वजन बढता है, यह धारणा भी गलत है। इनके खाने से बच्चा न तो मोटा होता है और न ही ऑपरेशन की संभावना बढती है।
ऑपरेशन से बच्चा होने की संभावना के बारे में उन्होंने बताया कि जब गर्भवती महिला की बताई गई प्रसव की तिथी निकल जाती है और बच्चा नहीं होता है तो ऑपरेशन करना पडता है। ऑपरेशन का सबसे प्रमुख कारण महिला को दर्द नहीं होना है। यह भी कारण है कि यदि महिला 30 या इससे अधिक उम्र में गर्भवती होती है तो ऑपरेशन की संभावना रहती है। विलम्ब या बडी उम्र विवाह से बच्चा देर से लगता है और इसमें भी ऑपरेशन की संभावना बनती है। उन्होंने बताया कि कई बार महिला के साथ आये परिजन महिला के दर्द को सह नहीं पाते और डॉक्टर पर ऑपरेशन करने का दबाव बनाते है। किसी भी चिकित्सक की ऑपरेशन से बच्चा पैदा करने की कभी भी कोई मंशा नहीं होती है, अतिआवश्यक होने पर ही कोई चारा न देख चिकित्सक ऑपरेशन प्रसव कराता है।
जीवन परिचय: डॉ. रूची गोयल
पिछले कई वर्षों से हजारों सफल प्रसव कराने वाली डॉ. रूची गोयल वर्तमान में कोटा में कोटा-बारां रोड पर अपना निजी चिकित्सालय संचालित कर रही है। डॉ. रूची गोयल विन्रम स्वभाव एवं मिलनसार वृति की चिकित्सक है। उनके लिए मरीज का स्वस्थ रहना और बिना ऑपरेशन के प्रसव करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। डॉ. रूची का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में श्री जवाहर लाल जैन के घर हुआ। उन्होंने कानपुर में ही अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्ति के साथ वर्ष 1996 में कानपुर गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बी.एस. की डिग्री हासिल की और मद्रास मेडिकल कॉलेज से वर्ष 1998 में डी.जी.ओ. का डिप्लोमा प्राप्त किया। इसके उपरान्त उन्होंने अपनी प्रेक्टिस प्रारंभ की तथा कानपुर के समीप खैराबाद मिशनरी हॉस्पीटल, सीतापुर में डेढ वर्ष तक अपनी सेवाएं दी।
डॉ. रूची का वर्ष 2002 में कोटा निवासी डॉ. अमित के साथ विवाह हुआ और वे कोटा आ गई। उन्होंने कोटा के जे.के.लॉन महिला एवं शिशु चिकित्सालय में एवं बारां जिला अस्पताल में सरकारी सेवाएं दी। सरकारी नोकरी छोडकर बारां में निजी नर्सिग होम का संचालन भी किया। वर्ष 2009 से रूची चिकित्सालय के नाम से कोटा में अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रही है। इनके पति डॉ. अमित गोयल भी जे.के.लॉन महिला एवं शिशु चिकित्सालय में वरिष्ठ चिकित्सक बालरोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे है।

Post add

Leave A Reply

Your email address will not be published.