शाहनवाज पर बड़ा दावं

एक तीर से कई शिकार

बाल मुकुन्द ओझा

भाजपा ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन को बिहार में एमएलसी प्रत्याशी बनाकर एक तीर से कई शिकार किये है। कहते है मोदी है तो मुमकिन है। इसी तर्ज पर हुसैन को बिहार की राजनीति में उतारकर मोदी ने बड़ा दावं खेला है। मोदी का निशाना केवल बिहार और नीतीश ही नहीं है अपितु बंगाल भी है जहाँ अल्पसंख्यक वोटों को अपनी झोली में डालने की रणनीति पर अंदरखाने काम हो रहा है। यह भी कहा जा रहा है नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बनने से पहले मोदी से कहा था वे चाहे तो अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री बिहार में बना सकते है मगर मोदी ने उस समय यह बात टाल दी और योजनाबद्ध ढंग से सुशील मोदी को दिल्ली बुलाया और अब शाहनवाज को बिहार भेजा जा रहा है। हुसैन काफी दिनों से साइड लाइन चल रहे थे मगर मोदी के प्रति अपनी वफादारी हर समय दर्शा रहे थे। और अब मोदी ने हुसैन को बिहार की सियासत में सक्रीय कर एक तरफ नीतीश के पर कुतरने की तैयारी की है वहीँ बिहार शाहनवाज को सौंपने की सोची समझी नीति पर भी काम चल रहा है। यह भी पता चला है आर एस एस ने भी इस पर अपनी हरी झंडी दिखा दी है। कुछ राज्यों के विधान सभा चुनावों में शाहनवाज की छवि भुनाने का भाजपा प्रयास करेंगी वहां अगले लोकसभा चुनाव की रणनीति भी तैयार की जा रही है।
हुसैन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वह भागलपुर से दो बार सांसद रह चुके हैं। एक बार किशनगंज से भी लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं। शाहनवाज हुसैन के करियर को लेकर साल 2019 में काफी कुछ अटकलें लगाई गई। मगर मोदी के मन की कोई थाह नहीं लगा पाए। लेकिन कहते हैं ना कि किस्मत से अधिक और समय से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता सो केंद्र में सात साल की सत्ता के बाद शाहनवाज की किस्मत खुलने जा रही है। शाहनवाज को बिहार विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया गया है। सोमवार को उनका नामांकन होगा। साल 2024 तक का उनका कार्यकाल होगा। शाहनवाज को सुशील मोदी की खाली हुई विधान परिषद की सीट से पटना भेजा जा रहा है। सुशील मोदी राज्यसभा के जरिए पटना से दिल्ली आ चुके हैं।
साल 2004 में सुशील मोदी भागलपुर से सांसद बने थे। 2005 में बिहार में जेडीयू बीजेपी सत्ता में आई तो सुशील मोदी ने इस्तीफा दिया और विधान परिषद के रास्ते सदन में जाकर उप मुख्यमंत्री बने। साल 2004 के चुनाव में शाहनवाज किशनगंज से लोकसभा हार गए थे। 2006 के उप चुनाव में उन्हें भागलपुर से मौका मिला और जीतकर दूसरी बार सांसद बने। शाहनवाज 2009 में भी भागलपुर से जीते थे। लेकिन 2014 में हार गए और 2019 में टिकट नहीं मिला। 2014 की हार के बाद से ही वे मुख्यधारा से साइड चल रहे थे। पार्टी में प्रवक्ता थे लेकिन कोई बड़ी भूमिका नहीं मिली थी। पिछले साल के अंत में जम्मू कश्मीर के चुनाव में घाटी में सक्रिय थे। जहां डीडीसी चुनाव में बीजेपी को तीन सीट मिली। अभी बंगाल में भी शाहनवाज सक्रिय हैं, लेकिन बिहार में जहां बीजेपी एनडीए में सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी अनुभव के पैमाने पर कमजोर है वहां शाहनवाज की भूमिका अहम मानी जा रही है। अभी खबर यह है कि शाहनवाज नीतीश सरकार में गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी निभा सकते हैं।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के जरिए वो राजनीति में सक्रिय हुए थे। सुपौल में जन्म भले हुआ लेकिन राजनीति का ककहरा उन्होंने मुजफ्फरपुर में सीखा। अब तक प्रदेश की राजनीति में कभी नहीं रहे। ये तो तय है कि शाहनवाज के जरिए बीजेपी नीतीश पर दबाव बनाएगी। दोनों साथ काम कर चुके हैं। शाहनवाज के पास बाकी मौजूदा मंत्रियों से ज्यादा का प्रशासनिक अनुभव है। इस बार एनडीए से कोई मुस्लिम चुनाव नहीं जीता है, ऐसे में बीजेपी एक बड़ा संदेश भी देने की कोशिश करेगी।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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