नगर निगमों को नहीं मिला दिल्ली सरकार की ओर से जारी किया गया पैसाः जय प्रकाश

दिल्ली। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर जय प्रकाश एवं पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर  निर्मल जैन ने शुक्रवार को संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एवं पीडब्लूडी मंत्री सतेंद्र जैन द्वारा गुरूवार को 938 करोड़ रूपये जारी करने का दावा किया था, लेकिन किसी भी नगर निगम को कोई पैसा नहीं मिला है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस निगम को कितना हिस्सा मिलेगा। दूसरे उन्होंने कहा कि चूंकि यह राशि केवल वेतन अदायगी के लिए है, तो अनुदान (ग्रांट इन एड) की तीसरी किश्त कब दी जाएगी, जिससे कर्मचारियों का और वेतन देने में सहायता मिलेगी। इस मौके पर उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री छैल बिहारी गोस्वामी और सदन के नेता योगेश वर्मा मौजूद रहे।
महापौर जय प्रकाश ने कहा कि दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपनी घोषणा में यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि किस नगर निगम को कितना पैसा दिया गया है। दिल्ली सरकार के दोनों मंत्रियों ने कहा है कि 938 करोड़ रूपये निगमकर्मियों के वेतन के लिए जारी किया गया है। लेकिन अभी तक उस पैसे का कोई अता-पता नहीं है।उन्होंने साल की चैथी तिमाही शुरू हो गई है। तीसरी तिमाही का पैसा आम तौर पर जनवरी महीने के पहले सप्ताह में दिल्ली सरकार जारी कर देती थी। लेकिन जनवरी का दूसरा सप्ताह भी खत्म हो गया है और उस पैसे का कोई अता-पता नहीं है। कोरोना महामारी के चलते मोदी सरकार ने लोन आदि के लिए ईएमआई में छूट दी गई है। लेकिन दिल्ली सरकार ने कोरोना का बहाना बनाकर नगर निगम के बीटीए के रूप में मिलने वाले 850 करोड़ रूपये में से 318 रूपये ही जारी किया गया है। इसमें से उत्तरी दिल्ली नगर निगम का 500 करोड़ रूपया दिल्ली सरकार की ओर बकाया है।
महापौर ने आरोप लगाया कि मई 2020 से उत्तरी दिल्ली नगर निगम का 446 करोड़ रूपया बकाया था। दिल्ली सरकार के मंत्री सतेंद्र जैन ने मई महीने से यह फाइल दबा रखी थी। उस 446 करोड़ में से 336 करोड़ रूपया दिल्ली सरकार ने लोन में अडजस्ट करके काट लिया है। जबकि केंद्र सरकार लोगों को ईएमआई में सुविधा दे रही है। सरकार द्वारा काटी गई राशि से नगर निगम के कर्मचारियों की सेलरी दी जा सकती थी। नगर निगम के कर्मचारी हड़ताल पर हैं, उनके परिवार परेशान हैं, गंदगी के ढेर लग रहे हैं। नगर निगम अपनी जिम्मेदारियों को सही ढंग से नहीं निभा पा रहा है।
दिल्ली सरकार का रवैया पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना और दिल्ली की व्यवस्था को जाम करने वाली है। महापौर जय प्रकाश ने आगे कहा कि यदि सरकार चाहती है कि दिल्ली वालों को सुविधाएं मिल सकें, सफाई हो सके, निगम के कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभा सकें, तो दिल्ली सरकार ने जो पैसा काटा है, वह तो जारी करना ही पड़ेगा। इसके साथ ही तीनों नगर निगमों का बकाया 13 हजार करोड़ रूपया भी जारी करना पड़ेगा।
जय प्रकाश ने कहा कि जब दिल्ली के तीनों महापौर पहली बार मुख्यमंत्री से मिलने गए थे तब सतेंद्र जैन तीनों महापौर से मिलने आए थे, तब उनका व्यवहार हमारे साथ ऐसा था, जैसे कोई प्रिंसिपल अपने छात्रों से बात करता है। जबकि वह भी चुने हुए प्रतिनिधि हैं और तीनों महापौर भी चुने हुए प्रतिनिधि हैं। उनका उसी तरह का व्यवहार गुरूवार की प्रेस कांफ्रेंस में था, वह इस तरह से बात कर रहे थे कि जैसे नगर निगम का पैसा नहीं बल्कि अपने कर्मचारियों का बोनस जारी कर रहे हों।
पूर्वी दिल्ली के महापौर श्री निर्मल जैन ने कहा कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पीडब्लूडी मंत्री सतेंद्र जैन ने 938 करोड़ रूपये जारी करने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन हमें अभी तक यह जानकारी भी नहीं है कि किस निगम को कितना पैसा मिला है। दिल्ली सरकार की ओर से जब भी कोई पैसा जारी किया जाता है तो, उसके लिए पहले शेंक्शन नोट बनाया जाता है। उसी नोट के जरिए फाइल को मंजूरी मिलती है और फिर उसी के आधार पर नगर निगम का पैसा जारी किया जाता है। हमें पता चला है कि अभी तक इस तरह की कोई प्रक्रिया पूरी ही नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि आज पूरी दिल्ली के लोगों को पता चल गया है कि दिल्ली सरकार नगर निगमों का पैसा जारी नहीं कर रही है। जैसे ही 13 हजार कोड़ की चर्चा शुरू होती है, दिल्ली वाले केवल एक बात ही कहते हैं कि केजरीवाल सरकार निगमों का पैसा जारी नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की केवल एक ही कोशिश रहती है कि किसी भी तरह से नगर निगमों को पंगु बनाया जाए और किसी भी तरह से नगर निगमों द्वारा किये जा रहे कामों को रोका जा सके। ताकि आने वाले नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी इसका फायदा उठा सके।

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