2021: लव ऑफ इयर

प्रो. अच्युत सामंत

सन् 2020 एक अप्रत्याशित वर्ष था। किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि दशक का अंत इतना अशान्तिप्रिय एवं उतार-चढ़ाव भरा होगा कि यह हमारे सोचने और कार्य करने के ढंग को ही बदल देगा। हर कोई किसी न किसी तरह से महामारी से प्रभावित रहा है। सभी ने अपने प्रक्षेप-पथ में बदलाव किया है और नए सामान्य अवस्था को अपनाने की चेष्टा कर रहा है। यदि पीड़ा के कारण हैं, तो उसके प्रत्याशा के भी कारण हैं। अब जबकि यह वर्ष 2021 एक नए दशक की शुरुआत है, तो हम आशा करते हैं कि सभी के लिए यह एक सुखद और सफल वर्ष होगा।

वर्ष के आरम्भ में सामूहिक रूप से हम, के.आई.आई.टी. और के.आई.एस.एस. में, उस वर्ष के लिए एक निर्णय लिये जाने का कारण और उस लोकाचार को प्राप्त करने के लिए समर्पित कर रहे हैं। अतीत में, हमारे पास ईयर ऑफ बिलॉन्गिंगनेस, एकेडमिक्स, रिसर्च, वैल्यू-एडिशन, जीरो टॉलरेंस, (अपनेपन, शिक्षाविदों, अनुसंधान, मूल्य-वृद्धि, शून्य सहिष्णुता) इत्यादि रहे हैं, परन्तु इस वर्ष को हम ‘ईयर ऑफ लव’ के नाम करने के लिए सोचा है। वर्ष 2020 निराशा और संकटों से भरा था, इसलिए संतुलन बनाए रखने के लिए वर्ष 2021 को लव ऑफ इयर होना चाहिए।

जैसे ही प्रातःकाल दिन को दर्शाता है, वैसे ही घर पर प्यार की शुरूआत होनी चाहिए। एक व्यक्ति को अपने भाई, बहन, माँ, मित्रों, बच्चों, पड़ोसियों आदि से निःस्वार्थ-भाव से प्रेम करना चाहिए। हमें सकारात्मक बातें करनी चाहिए, अपने शब्दों से किसी को आहत नहीं करना चाहिए और अच्छे से खुलकर सराहना करनी चाहिए। इसमें हमें कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता है और न ही हम कुछ खोते हैं। प्रेम में अद्भुत शक्ति और परिवर्तनकारी ऊर्जा है। यदि प्यार दिलों को तोड़ सकता है, तो यह घावों को ठीक भी कर सकता है। कुछ भौतिक उपहार देकर प्यार नहीं कमाया जा सकता। दैनिक कार्यों में इसे स्नेह और विनम्रता के माध्यम से व्यक्त किया जा सकता है। प्रेम कोई सीमा नहीं जानता है और किसी व्यक्ति के जीवन को हमेशा के लिए बदल सकता है।

जब हम अपने आप को प्यार भरे विचारों से जोड़ेंगे, तो चिंता और आकुलता मिटने लगेगी। निर्णय जो शायद हमें पसन्द आए, बनाने के लिए आसान हो जाएगा। दुःसाध्य घटनाओं और लोगों को हमारे पास नहीं लाया जाएगा, क्योंकि हम उस नकारात्मक ऊर्जा को छोड़ना सीख रहे हैं। जब हम होशोहवाश में प्रेम और स्वीकृति की ऊर्जा के साथ अपने आप को चारों ओर से घेरना आरम्भ करते हैं, तो हमारी प्राकृतिक अवस्था, इस भौतिक आयाम में हमारी यात्रा को अधिक सहज, अधिक उद्देश्यपूर्ण और अधिक शक्तिशाली बना सकती है। ‘‘जब हम प्रेम की शक्ति का उपयोग करते हैं, तो हम अपनी दुनिया में अपनी जगह और उससे परे ब्रह्मांड के बारे में जानते हैं। हम अपने मूल्यों को जानते हैं तथा जीवन एवं अन्य जीवित प्राणियों के जीवन को महत्व देते हैं। हम एक दूसरे से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, जैसा कि हमारे अन्तर्मन का प्रकाश सभी पर प्रकाशमान होता है। यह स्वीकार करते हुए कि हम अलग नहीं हैं, बल्कि सभी जीवन की एकता का हिस्सा-मात्र हैं, हम एक स्रोत के दिव्य संदेशवाहक बन जाते हैं।”

सभी धर्म दूसरों से प्यार करने की बात करते हैं। मैंने इसका प्रयोग भी किया है। मेरे पास काम की अपार मात्रा है, लेकिन मैं बिल्कुल भी तनाव में नहीं आता। मैं हर रोज कई चुनौतियों का सामना करता हूँ, लेकिन मैं थकता नहीं हूँ। मुझे सोने के लिए गोलियों की आवश्यकता नहीं है। बिस्तर पर आते ही मुझे नींद आ जाती है। यह सकारात्मकता इस तथ्य से आती है कि मैं दूसरों से प्यार करता हूँ। प्यार करने पर सारे दुःख, तनाव, हताशा दूर हो जाएंगे। कोई भी बीमारी किसी को भी प्रभावित नहीं कर सकती है, यदि वह एक प्यार करने वाला हो। यदि कोई खुलकर प्यार का इजहार करे तो मानसिक तौर पर स्वास्थ्य उसका ठीक रहता है। एक व्यक्ति फिट और ठीक हो सकता है, यदि वह अन्य जीव-जन्तुओं के प्रति विचारशील है, जैसे, मनुष्य, जानवर, पेड़-पौधे, प्रकृति, इत्यादि। नकारात्मक विचार मीलों दूर रहेंगे और लोग प्रसन्न और हँसमुख रह सकते हैं।

जब शिशु जन्म लेता है, तो परिवार के लोग उसे प्यार से पालते हैं। प्रफुल्लित परिवार बच्चे के मुस्कुराने के लिए सब कुछ करते हैं, उसे चलने, दौड़ने, मार्गदर्शन करने और सिखाने के लिए संभालते हैं। यह पोषण प्रेम के कारण होता है। वयस्कों के रूप में हमें, इसे पुराने लोगों और वरिष्ठ नागरिकों और परिवार के सदस्यों के लिए उसी तरह से पुनः प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। उन्हें बस प्यार और समर्थन चाहिए। जैसा कि ओडिया कहावत है, ‘अबर ब्रुद्धा’, जिसका अर्थ है बुढ़ापा बचपन की तरह ही है, बच्चों की तरह ही बूढ़ों की मदद करने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि दोनों स्वतन्त्र नहीं हैं। वे प्यार, पालन-पोषण और देखभाल पर निर्भर हैं।

माँ ने हमेशा कहा ‘‘संसारे रहुतिबा जेते दिन, आनन्द करुतिबा मन”। इसका अर्थ यह है कि जब तक कोई जीवित है, तब तक कोशिश करते रहना चाहिए और आनन्द लेना चाहिए। किसी को जीना शुरू करना चाहिए और बाहर निकलना बन्द कर देना चाहिए और ऐसा तभी सम्भव है, जब कोई दूसरों से प्यार करता है, बिना किसी व्यक्तिगत कार्यसूची या एजेंडे के, आवश्यकता पड़ने पर दूसरों की सहायता करता है।

विश्वव्यापी कोविड-19 महामारी ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है कि हम एक दूसरे का समर्थन करने, देखभाल करने और प्रोत्साहित करने के लिए पहुँचें। सामाजिक सम्बन्ध की कमी से स्वास्थ्य सम्बन्धी बड़े मुद्दे हो सकते हैं जो आपके लिए धूम्रपान जितना ही बुरा हो सकता है। इसीलिए अपनी दिनचर्या के कुछ क्षणों को अपने परिवार, मित्रों, और समुदाय के लोगों पर चेक करने में खर्च कीजिए, जो किसी और के लिए सभी अन्तर पर कितना प्रभावकारी हो सकता है। गतवर्ष के सामाजिक दूरीकरण (सोसल डिस्टैंसिंग) के माध्यम से हमने समझा है कि एक छोटे से व्यक्तिगत इशारे का जबरदस्त प्रभाव हो सकता है।

(लेखक सांसद, कंधमाल और संस्थापक, के.आई.आई.टी. और के.आई.एस.एस.हैं)

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