केजरीवाल सरकार प्रदूषण नियंत्रित पर श्वेत पत्र जारी करे-आदेश गुप्ता

नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली सरकार के बड़े-बड़े दावों के बावजूद प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी और प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रदूषण के स्तर के अध्ययन से पता चला है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता न केवल देश में बल्कि दुनिया भर में सबसे खराब है। लेकिन अभी भी केजरीवाल सरकार प्रदूषण की समस्या पर कार्य करने के लिए गंभीर नहीं है।
आदेश गुप्ता ने कहा कि टूटी सड़कों के कारण उड़ने वाले धूल से सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है, वहीं पार्कों का रख-रखाव भी नहीं हो पा रहा है क्योंकि इन विकास कार्यों को करने के लिए दिल्ली सरकार नगर निगमों का बकाया फंड जारी नहीं कर रही है। दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए इन्वॉयरमेंट सेस के रूप में 1136 करोड़ रुपए दिल्लीवालों से वसूला है लेकिन मंशा नहीं है काम करने की, इसलिए प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कोई कार्य नहीं कर रही है जिसके कारण दिन-ब-दिन वायु की गुणवत्ता खराब होती जा रही है। इसी तरह दिल्ली की पानी की गुणवत्ता भी खराब स्थिति में पहुंच गई है क्योंकि यमुना नदी में अमोनिया का स्तर और कूड़ा कचरा का निस्तारण पिछले 5 वर्षों के दौरान बहुत बढ़ गया है। केजरीवाल सरकार नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने में भी विफल रही है और दिल्ली जल बोर्ड ने भी खुले नालों के माध्यम से यमुना नदी में खतरनाक कूड़े-कचरे के निस्तारण को रोकने के लिए न के बराबर काम किया है। अरविंद केजरीवाल सरकार ने अपने 2020 के चुनावी घोषणा पत्र में दिल्ली को अमोनिया मुक्त पानी देने का वादा किया था, लेकिन स्थिति यह है कि पिछले कई महीनों से यमुना नदी के दिल्ली खंड में अमोनिया का स्तर उच्चतम है। यमुना के दिल्ली में प्रवेश करने के बाद अमोनिया का स्तर बढ़ता है, इसका मतलब है कि इसके प्रदूषक कारक दिल्ली में हैं।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह बहुत ही दुखद है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में हो रही मौत के आंकड़े सबसे ज्यादा है। उन्होंने केजरीवाल सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि 2018 में प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु ग्रीन बजट लाया गया जिसके तहत कुल 26 प्रमुख वादे किए गए लेकिन आज तक उन वादों में से एक भी वादा पूरा नहीं हुआ। केंद्र की अनुमति मिलने के बाद भी एक इलेक्ट्रिक बस भी नहीं खरीदी गई, न ही केजरीवाल सरकार ने एंटी स्मॉग टावर लगवाए, न ही दो करोड़ पेड़ लगाने के वादे में से दो पेड़ भी लगाए। आज अगर यह वादे धरातल पर लागू किए गए होते तो प्रदूषण के कारण लोगों की जान नहीं जाती। इसे तो यही प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए दिल्लीवासियों के जान का कोई मोल नहीं है इसलिए उनके वादे सिर्फ होर्डिंग पर दिखते हैं जमीन पर नहीं।
आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार प्रदूषण के मोर्चे पर दिल्ली में विफल रही है और हम मांग करते हैं कि दिल्ली सरकार पिछले 5 वर्षों के दौरान दिल्ली में वायु और जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जो काम किए हैं उसका श्वेत पत्र जारी करे।
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