पूरी तरह सुरक्षित है भारत बायोटेक का कोवैक्सीन- आईएमए

आईएमए का तर्क , खतरे का डर होता तो पहले चरण में ही क्यों लगवाते डाॅक्टर

@ chaltefirte.com                                  नई दिल्ली :मकर संक्रांति के फौरन बाद कोरोना के खिलाफ अंतिम प्रहार के तौर पर 16 जनवरी से टीकाकरण की औपचारिक शुरूआत किये जाने का ऐलान होने के बाद भी भारत में विकसित टीकों की क्षमता और गुणवत्ता को लेकर उठाए जा रहे सवालों और व्यक्त किये जा रहे संदेहों के बीच देश के डाॅक्टरों की सर्वोच्च गैरसरकारी संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने कोरोना के टीकों को ना सिर्फ पूरी तरह सुरक्षित करार दिया है बल्कि भारतीय परिवेश के लिये इनकी गुणवत्ता और क्षमता को भी विश्व के किसी भी अन्य टीके के मुकाबले बहुत ही बेहतर बताया है। आईएमए की दलील है कि अगर भारत सरकार द्वारा मंजूर किये गए टीकों की गुणवत्ता व विश्वसनीयता में जरा भी शक-सुबहे की गुजाइश होती तो आखिरकार देश के डाॅक्टर ही टीकाकरण के पहले चरण में इसे खुद पर लगवाने के लिए हामी कैसे भर सकते थे। आईएमए के मुताबिक भारत बायोटेक के कोवैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल पूरा नहीं होने की बात कहकर इसे असुरक्षित बताने का जो भ्रम फैलाया जा रहा है वह पूरी तरह निराधार है क्योंकि किसी भी टीके का शुरूआती दो चरण का ट्रायल ही सबसे महत्वपूर्ण होता है और तीसरे चरण में सिर्फ यह देखा जाता है कि टीका लगने के बाद शरीर में एंटीबाॅडी का स्तर कितना ऊपर उठता है। उसमें भी 65 फीसदी बढ़त को ही संतोषजनक मानक के तौर पर स्वीकार किया जाता है जिसमें 10-15 फीसदी ऊपर या नीचे के आंकड़े को भी सफल टीके के तौर पर स्वीकार कर लिया जाता है। तीसरे चरण के ट्रायल के लिए तय इस सर्वमान्य मानक को आधार माना जाए तो कोवैक्सीन की गुणवत्ता पहले ही प्रमाणित हो चुकी है लिहाजा इस पर संशय या संदेह करना बेमानी होगा। आईएमए ने भारत में टीका विकसित होने को पूरे देश के लिए बेहद गर्व की बात करार देते हुए कहा है कि इसका दिल-खोलकर स्वागत किया जाना चाहिये और इसे लगवाने के लिए हर किसी को बेहिचक आगे आना चाहिये। आईएमए ने इस मामले में सरकार का पूरी तरह सहयोग करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता का इजहार करते हुए कहा है कि देश के सभी डाॅक्टर और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर ही इसे सबसे पहले लगवाने के लिए आगे आ रहे हैं लिहाजा किसी को भी इसे लगवाने को लेकर हिचक नहीं दिखानी चाहिए।
दरअसल कोरोना के खिलाफ टीकारण अभियान के शुरू होने की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि भारत कोरोना से लड़ने में 16 जनवरी से एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने जा रहा है। इम अभियान में हमारे बहादुर डॉक्टरों, हेल्थकेयर वर्कर्स, सफाई कर्मचारियों सहित फ्रंटलाइन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद भी भारत में ही विकसित किये गये सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशिल्ड और भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी के बाद से शुरू हुआ विवाद थमता नहीं दिख रहा है। खास तौर से भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल पूरा किए बिना ही डीसीजीआई द्वारा इसे मंजूरी दे दिए जाने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ जेए जयलाल और महासचिव डाॅ जयेश एम लेले ने खुल कर सरकार का बचाव करने में कोई कोताही नहीं बरती है और इसे भारतीय परिवेश के लिए हर लिहाज से बेहतरीन करार दिया है। आईएमए के मुताबिक भारत के परिवेश में भारत में निर्मित टीका जितना अधिक असरदार होगा उतना किसी दूसरे देश में बना हुआ टीका शायद ही हो। साथ ही भारत में निर्मित होने के कारण इसकी लागत भी काफी कम रहेगी जिससे यह आम लोगों को आर्थिक तौर पर भी मुफीद रहेगा।

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