किसान खुद खोल रहे हैं केजरीवाल की पोल- मनोज तिवारी

न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलने के कारण दिल्ली के किसान बेच रहे हैं हरियाणा में गेहूं

@ chaltefirte.com           दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं उत्तर पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी ने केजरीवाल पर किसानों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है कि जो अरविंद केजरीवाल विधानसभा में अपने द्वारा ही पास किए गए बिल को फ़ाड़ने का नाटक करते हैं तो कभी उपवास कर किसानों की उपज को बेचने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून लाने की बात करते हैं लेकिन उनके शासन में दिल्ली के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य के मोहताज हैं। उन्होंने मीडिया द्वारा सिंधु बॉर्डर के आसपास स्थित गांवों में किसानों से जब उनकी राय जानी गई तो इस बात का खुलासा हुआ कि दिल्ली के किसान उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलने के कारण अपना अनाज हरियाणा की मंडियों में बेचने के लिए विवश हैं और ऐसे किसानों को और राहत देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन रुकावट को दूर करने के लिए कृषि कानून बनाए हैं।

मनोज तिवारी ने कहा कि स्वयं अरविंद केजरीवाल और तथाकथित किसान हितैषी पार्टियों के बड़े-बड़े नेता पहले ही दुहाई ही दे चुके हैं कि देश का अन्नदाता झूठ नहीं बोलता और मैं भी इस राय से इत्तेफाक रखता हूं कि देश का अन्नदाता झूठ नहीं बोलता और अपने अधिकारों के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों का पालन कर अपनी उपज के वाजिब और सही दाम प्राप्त करना चाहता है लेकिन अरविंद केजरीवाल जैसे लोग सत्ता लोलुपता के चलते किसानों हितों की अनदेखी कर न सिर्फ दिल्ली और देश का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं बल्कि किसानों को गुमराह कर उन्हें उनके अधिकार से वंचित कर रहे हैं बेहतर होगा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी जग हंसाई करवाने के बजाय दिल्ली में रह रहे किसानों को उन्हें किसान का अधिकार दें और न्यूनतम समर्थन मूल्य का सभी किसानों को फायदा मिले इसका इंतजाम करें।
भाजपा सांसद व पूर्व दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सीधे तौर पर निशाना साधा है।उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अब सार्वजनिक रूप से यह मान लिया है कि दिल्ली को संवैधानिक तरीके से चलाना उनके बस की बात नहीं है। ये भी साबित हो रहा है कि उन्हें भारत के संविधान में नहीं बल्कि अपनी अर्बन नक्सल सोच पर ही भरोसा है ।इस बात को सिद्ध करने के लिए उन्होंने अपने एक नासमझ विधायक को आगे कर अपनी मंशा जाहिर कर दी है कि दिल्ली के नगर निगमों को चलाने में वे असमर्थ है। तिवारी ने कहा कि यही कारण है कि दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों के बावजूद वे दिल्ली नगर निगम का बकाया 13000 करोड़ जारी नहीं कर रहे हैं। निगमों का 13000 करोड़ रोककर मुख्यमंत्री ने निगमकर्मियों को भूखे मरने पर मजबूर कर दिया है।उस सफाई कर्मचारी की रोटी छीनने की कोशिश की है जो स्वच्छ दिल्ली के लिए रोज़ अपना खून पसीना बहाता है।

मनोज तिवारी ने कहा कि ये देश केवल संविधान से चलता है और भाजपा उस संविधान का हमेशा पालन करती है।यदि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल भी चाहते हैं कि एमसीडी को मिलने वाला फ़ंड सीधे केंद्र से आए तो वह अपनी कैबिनेट से एक प्रस्ताव पास कर देश के गृहमंत्री को क्यों नहीं भेजते? साथ ही यदि केजरीवाल निगम के हक के बजट का हिस्सा जारी करने में असमर्थ है तो अपनी असमर्थता को स्वीकार करते हुए बजट का वो हिस्सा दिल्ली के उपराज्यपाल के ज़रिए निगम को जारी करवा दें।अगर कर्मचारियों की इतनी ही चिंता है तो केजरीवाल कर्मचारियों का वेतन सैलरी हेड में क्यों नहीं जारी करते हैं?यदि ऐसा वे करते हैं तो में समझूंगा कि वे कर्मचारियों के सच्चे हितैषी हैं। लेकिन जो मौजूदा स्थिति बनी हुई है उससे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह साबित कर दिया है कि उन्हें न निगमकर्मियों की चिंता है और न दिल्ली की जनता की चिंता है

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