टीएमयू के डॉ. अर्पित जैन ने रचा इतिहास 

यूनिवर्सिटी की झोली में आए तीन और ऑस्ट्रेलियन इन्नोवेटिव पेटेंट ग्रांट

 श्याम सुंदर भाटिया

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी ने एक बार फिर इतिहास रच डाला है। इसका श्रेय फ़ैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड कम्प्यूटिंग साइंसेज़-एफओईसीएस को जाता है। एफओईसीएस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अर्पित जैन ने कोविड-19 के दौरान यूनिवर्सिटी की झोली में तीन ऑस्ट्रेलियन इनोवेटिव पेटेंट ग्रांट डाले हैं। ये तीनों इन्नोवेशन पेटेंट ऑस्ट्रेलिया से ग्रांट हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया पेटेंट के तहत दो तरह के पेटेंट ग्रांट करता है- इनोवेशन पेटेंट और इन्वेंशन पेटेंट यानी स्टैंडर्ड पेटेंट। टीएमयू को ये तीनों पेटेंट इन्नोवेशन श्रेणी में ग्रांट हुए हैं। यूनिवर्सिटी के करीब दो दर्जन से अधिक पेटेंट प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में हैं। यूनिवर्सिटी के इन दो प्रोफेसरों ने दुनिया को सेहतमंद रहने का नायाब तोहफा दिया है। उल्लेखनीय है, इन्नोवेशन पेटेंट में एग्जामिन की दरकार नहीं है। यदि कोई प्रतिद्वंद्वी परीक्षण के लिए आवेदन करता है तो एग्जामिन की आधी फीस आवेदक और आधी फीस पेटेंट धारक को वहन करनी होगी। भारत की तुलना में विदेशों में इन्नोवेशन पेटेंट जल्दी ग्रांट हो जाता है।  अब यूनिवर्सिटी के ही डॉ. अर्पित जैन ने इन्नोवेटिव ग्रांट पेटेंट पाने में ऊँची छलांग लगाई है। आईएवीपी- इंटेलिजेंट बिज़नेस डेटा, एमटी-फ़ैमिली मेम्बर्स के लोकेशन की जानकारी संग-संग आईएमटी-वॉयस आधारित मोबाइल बैंकिंग पर ये पेटेंट मंजूर हुए हैं। डॉ. अर्पित ने आईएमटी-वॉयस आधारित मोबाइल बैंकिंग पर रिसर्च एफओईसीएस निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी के सानिध्य में की है। यह पेटेंट प्रो. द्विवेदी और डॉ.  जैन के नाम संयुक्त रूप से ग्रांट हुआ है। ये पेटेंट्स आम आदमी से लेकर ऑनलाइन बैंकिंग सुरक्षा तक  के संग-संग कारोबारियों के लिए वरदान साबित होंगे। कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैन और मेंबर ऑफ़ गवर्निंग बॉडी-एमजीबी श्री अक्षत जैन बोले, रिसर्च और इन्नोवेशन पेटेंट यूनिवर्सिटी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने उम्मीद जताई, डॉ. अर्पित जैन के ये पेटेंट यूनिवर्सिटी के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। कुलपति प्रो. रघुवीर सिंह और रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने डॉ. अर्पित जैन को बेशक़ीमती मेधा बताते हुए कहा, यूनिवर्सिटी के लिए यह गौरव के पल हैं। एफओईसीएस के निदेशक एवं प्राचार्य प्रो. द्विवेदी ने कहा, निश्चित रूप से डॉ. अर्पित जैन की इस उपलब्धि ने टीएमयू के साथ-साथ कॉलेज का भी गौरव बढ़ाया है। उन्होंने उम्मीद जताई, डॉ. जैन की इस बड़ी उपलब्धि से यूनिवर्सिटी के दीगर शिक्षक भी प्रेरणा लेंगे।

आईएवीपी- इंटेलिजेंट बिज़नेस डेटा- एक आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस पर आधारित मॉडल है। इसके जरिए सूचना का आदान-प्रदान और समस्या का समाधान बिना किसी विलंब के हो सकेगा। यह मॉडल आमजन की दिक़्क़तों का लेखा-जोखा उत्तरदायी संस्थाओं को आसानी से भेजने और उसके त्वरित निदान में सहायक सिद्ध होगा। इससे पारदर्शिता आएगी। कारोबार को भी  नया आयाम मिलेगा। इस ढांचे के जरिए किसी भी व्यवसाय के पुराने आंकड़ों को समावेशित करके दक्ष कार्यप्रणाली में स्वतः ही सुझाव मिल पाएगा। यह व्यवसाय की उन्नति में नए रास्ते बनाएगा। एमटी-फ़ैमिली मेम्बर्स के लोकेशन की जानकारी के लिए वरदान साबित होगा। विशेषकर हमारी बेटियों की सुरक्षा हेतु यह आविष्कार मील का पत्थर साबित होगा। यह एक ऐसा डिवाइस और सिस्टम है, जिसके जरिए व्यक्ति की लोकेशन और दूरी का आसानी से पता चल सकेगा। यह आविष्कृत मॉडल एक पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। यह परिवार के सदस्यों की लाइव लोकेशन, दूरी, ऑडियो और वीडियो की जानकारी प्रदान करेगा। यह जानकारी वायरलेस तकनीकी से घर पर ट्रांसमिट हो सकेगी। इस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए ख़तरे का आभास होने पर लाइव जानकारी घर पर पहुँच जाएगी।

इन्नोवेटिव आईएमटी-वॉयस आधारित मोबाइल बैंकिंग मॉडल एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें ध्वनि और पासवर्ड-सत्यापन की क्षमताएं होंगी, जिसके उपयोगकर्ता 100% सुरक्षित रूप से लेन-देन की प्रक्रिया कर सकेंगे। आविष्कृत प्रणाली एक वॉयस बेस्ड प्रमाणीकरण है, जो उच्च सटीकता दर के साथ एक उच्चतम सुरक्षित वॉयस सत्यापन प्रदान करता है। वॉयस के माध्यम से धोखाधड़ी को रोका जा सकता है। डिवाइस में यूज़ की गई आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस तकनीकी के जरिए ऑथेंटिक यूजर का पता चल जाता है। यदि वॉयस सेगमेंट मैच नहीं करता तो उपयोग कर्ता को अलर्ट मैसेज आएगा।

सहारनपुर-यूपी के बाशिंदे डॉ. अर्पित जैन तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी से करीब 10 बरसों से जुड़े हैं। डॉ. जैन अब तक करीब एक दर्जन नेशनल और इंटरनेशनल  कांफ्रेंस में आईटी के विभिन्न क्षेत्रों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं, जबकि डॉ. जैन के करीब एक दर्जन रिसर्च पेपर स्कोपस, वेब ऑफ़ साइंस, एससीआई सरीखे ऑनलाइन इंटरनेशनल जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। कोविड-19 के दौरान डॉ. जैन एक दर्जन से अधिक वेबिनार्स में अपने अनुभव साझा कर चुके हैं। वह इसका श्रेय यूनिवर्सिटी के आला प्रबंधन के अलावा अपने प्राचार्य और संग-साथियों को भी देते हैं। उल्लेखनीय है, यूनिवर्सिटी के इतिहास में इस श्रेणी में पहला पेटेंट टिमिट निदेशक प्रो. विपिन जैन और डॉ. रोहिन गर्ग की टीम को मिला है। ऑस्ट्रेलियन सरकार ने अपने पेटेंट एक्ट-1990 के तहत इस टीम को एनालिसिस ऑफ़ फिजिकल फिटनेस एंड एक्टिविटी लेवल यूजिंग मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग प्रोग्रामिंग के तहत एक्टिविटी मॉनिटिरिंग डिवाइस को इन्नोवेटिव पेटेंट के तहत मंजूरी दी। यूनिवर्सिटी को यह पहला पेटेंट भी कोविड-19 के दौरान ही मिला है।

( लेखक सीनियर जर्नलिस्ट और रिसर्च स्कॉलर हैं। )

 

 

 

 

 

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