दिल्ली भाजपा ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दी शिक्षा मॉडल पर खुली बहस की चुनौती

पॉलिटिकल टूरिज्म के नाम पर हो रहे खर्चों का हिसाब दें सिसोदिया

नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए दिल्ली भाजपा प्रवक्ता हरीश खुराना एवं पूजा सूरी ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली के शिक्षा मॉडल पर खुली बहस करने की चुनौती दी। इस अवसर पर प्रदेश मीडिया सह-प्रमुख हरिहर रघुवंशी, प्रदेश प्रवक्ता आदित्य झा उपस्थित थे।

प्रदेश प्रवक्ता हरीश खुराना ने कहा कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अपनी राजनीतिक महात्वकांक्षाओं को पूरा करने और आम आदमी पार्टी के विस्तार के लिए अन्य राज्यों में टूर कर रहे हैं और अपना झूठा शिक्षा मॉडल कह कर वहां के मुख्यमंत्री और मंत्रियों को बहस की चुनौती दे रहे हैं। लेकिन दिल्ली के प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के लोगों को इसलिए चुनौती नहीं दे रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है दिल्ली भाजपा दिल्ली सरकार के हवा-हवाई शिक्षा मॉडल का पोल खोल कर रख देगी। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षा मॉडल को आधार होता है उसका एजुकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर, लेकिन हालत यह है कि 6 साल में एक भी नया स्कूल नहीं बना। आम आदमी सरकार के सत्ता में आने पर 1030 स्कूल थे और आज भी यही संख्या है। केजरीवाल सरकार के अनुसार उन्होंने 13000 कमरे बनाए, दिल्ली में कुल  1200  स्कूल हैं और इस आधार पर हर स्कूल में 10 से 12 कमरे बनाना इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि केजरीवाल सरकार के 66578 स्कूलों में टीचर के पद स्वीकृत है, लेकिन नियुक्ति 57554 पदों पर ही हैं (परमानेंट एवं गेस्ट टीचर मिला कर), 9024 पद अभी भी खाली हैं। गेस्ट टीचर जो लगभग 19000 है, उनको 3 से 4 महीनों से वेतन नहीं मिला है।

हरीश खुराना ने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कई मौकों पर कह चुके हैं कि हमें दिल्ली के बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाना है लेकिन 1030 स्कूल में से सिर्फ 331 स्कूल में साइंस पढ़ाई जाती है। 11वीं और 12वीं में यानी 30 प्रतिशत स्कूलों में ही बच्चे साइंस पढ़ते हैं जो डॉक्टर या इंजीनियर बनने के लिए जरूरी है। देश और दिल्ली की जनता को फोटो दिखा कर बता रहे हैं कि दिल्ली का शिक्षा मॉडल सबसे बढ़िया है, लेकिन वास्तव में इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर सिर्फ 5 स्कूल बनाए गए हैं जिसे स्कूल आफ एक्सीलेंस का नाम दिया है। उन्हीं स्कूलों को दिखा कर झूठे विज्ञापन दे कर, अपनी फोटो चिपका कर केजरीवाल सरकार प्रचार कर रही है। मनीष सिसोदिया बताएं कि अभी तक सिर्फ 5 ही स्कूल आफ एक्सीलेंस क्यों बने? स्कूलों को रिजल्ट के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मनीष सिसोदिया 12वीं की रिजल्ट को लेकर कसीदे पढ़ते हैं लेकिन 10वीं का रिजल्ट क्या है इसका जिक्र भी नहीं करते हैं। जब आम आदमी पार्टी सरकार सत्ता में आई थी तो 10वीं का रिजल्ट 98.81 प्रतिशत था और आज 82.61 प्रतिशत है, यानी रिजल्ट में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस साल 10वीं का रिजल्ट पूरे देश के परिणामों में से दिल्ली (85.79 प्रतिशत) का दूसरा सबसे खराब परिणाम था। 12वीं में 75 प्रतिशत से ऊपर सिर्फ 18044 बच्चे आए हैं। 2015 में 9 वीं कक्षा में 1 लाख 63 हजार 970 बच्चे फेल हुए और पिछले साल 9 वीं में 1 लाख 57 हजार 294 बच्चे फेल हुए, 2015 में 11 वीं में 45,158 फेल हुए जबकि इस साल 24,131 बच्चे फेल हुए। केजरीवाल सरकार की माने तो उन्होंने भारत के इतिहास में राज्यों में सबसे ज्यादा बजट रखा, लेकिन सच्चाई यह है कि शिक्षा के लिए आवंटित बजट में से वर्ष 2015-16 में 2670 करोड़ रुपए, 2016-17 में 1571 करोड़ रुपए, 2017-18 में 1538 करोड़ रुपए, 2018-19 में 4896 करोड़ रुपए, 2019-20 में 2839 करोड़ रुपए बजट का उपयोग ही नहीं किया गया। आखिर मनीष सिसोदिया के राजनीतिक यात्रा के लिए पैसे कहां से खर्च हो रहे है, यह भी जांच का विषय है।

प्रदेश प्रवक्ता पूजा सूरी ने कहा कि वर्ष 2014-15 में दिल्ली सरकार के अंतर्गत 1203 स्कूल थे जिनमें डीओई व सहायता प्राप्त विद्यालय शामिल है, उनमें 17.05 लाख छात्र नामांकित थे, वर्ष 2019-20 में 1230 विद्यालयों में यह घटकर 16.50 लाख छात्र बच गए है। 95 हजार बच्चों ने सरकारी स्कूल छोड़ा। इसी दौरान वर्ष 2015 में 2277 निजी विद्यालयों में 14.71 लाख छात्र नामांकित थे, वर्ष 2020 में 1705 निजी विद्यालयों में 16.90 लाख छात्र नामांकित है। निजी विद्यालयों की संख्या 572 कम हुई फिर भी 2.19 लाख छात्रों की संख्या बढ़ी। पिछले 6 वर्षों के दौरान एक लाख से अधिक छात्रों ने दिल्ली के उच्च शिक्षण संस्थानों को छोड़ा। वर्ष 2015-16 में 16.08 लाख छात्र उच्च शिक्षा ले रहे थे जो अब घटकर 15.03 लाख बच गए है। मनीष सिसोदिया ने दिल्ली की जनता से वादा किया था कि दिल्ली के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की वित्तीय समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि 2016-2017 में 149, 2017-2018 में 34, 2018-2019 में 242 और 2019-2020 में 295 बच्चे और इस साल मात्र 11 बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये केजरीवाल सरकार द्वारा लोन दिलाया गया। कोरोना महामारी के कारण केजरीवाल सरकार ऑनलाइन क्लास ले रही हैं जबकि हकीकत यह है कि 30 से 40 प्रतिशत बच्चे ही ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं। किताबें भी इस बार बांटी नहीं गई है। ऐसे में रिजल्ट कैसा आयेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में बच्चे घट रहे हैं, और ऑनलाइन पढ़ने आ नहीं रहे। दिल्ली सरकार को पोलिटिकल टुरिज़म छोड़ कर दिल्ली की शिक्षा को सुधारने पर काम करना चाहिए।

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