देश पर मंडराया बर्ड फ्लू का खतरा

बाल मुकुन्द ओझा

कोरोना संक्रमण अभी थमा भी नहीं कि इस बीच देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू का खतरा मंडराने लगा है। दिसंबर के आखिर में राजस्थान से शुरू हुआ बर्ड फ्लू का कहर कई राज्यों तक पहुंच चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और केरल आदि प्रदेशों में हजारों पक्षियों की मौत का कारण बर्ड फ्लू को बताया जा रहा है। हरियाणा का पोल्ट्री हब कहे जाने वाले अंबाला और पंचकुला में एक लाख मुर्गियों की मौत हो गई। उत्तर से दक्षिण तक अचानक हजारों पक्षियों की मौत से हड़कंप मच गया है। बर्ड फ्लू कहीं इंसानों तक नहीं पहुँच जाये इसपर चिंता व्यक्त की जा रही है। केंद्र सरकार ने राज्यों को सभी आपातकालीन इंतजाम करने के निर्देश जारी किए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पोंग डैम जलाशय क्षेत्र में 2300 प्रवासी पक्षियों की मौत हुई है और इन सभी की मौत का करण एवियन इन्फ्लूएंजा है। इसको देखते हुए एहतियात के तौर पर राज्य सरकार ने कांगड़ा जिले के फतेहपुर, देहरा, जवाली और इंदौरा उप-मंडल में मुर्गे-मुर्गी के मीट की बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध लगा दिया है। केरल के कोट्टायम और अलाप्पुझा में बर्ड फ्लू की जानकारी मिली थी और वहां 12,000 बत्तखों की मौत हो गई। वहीं भोपाल के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज ने पुष्टि की है कि राजस्थान के झालावाड़ में कौवों की मौत बर्ड फ्लू के कारण हुई है। हालात काबू में होने के बावजूद कई राज्यों में हाई अलर्ट जारी कर कंट्रोल रूम स्थापित किये गए है, क्योंकि यह वायरस मनुष्य को भी संक्रमित करने की क्षमता रखता है। बताया जाता है बर्ड फ्लू ना सिर्फ पक्षियों बल्कि इंसानों और अन्य जानवरों के लिए भी खतरनाक है। बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले जानवर और इंसान इससे संक्रमित हो जाते हैं। सतर्कता के नाते अनेक राज्यों में मुर्गा व अंडे की बिक्री पर रोक लगा दी है। बर्ड फ्लू का वायरस चिकन, टर्की, गीस, मोर और बत्तख से इंसानों में तेजी से फैलता है। इंसानों में यह वायरस संक्रमित पक्षी के बेहद नजदीक रहने से फैलता है। बर्ड फ्लू का संक्रमण फैलने पर नॉनवेज न खाएं।
यह जानलेवा वायरस है. इससे मौत भी हो सकती है। इसके लक्षण कई आम बीमारियों से मिलते-जुलते हैं इसलिए समय पर इसे पहचाना जाना मुश्किल है। यही कारण है कि बर्ड फ्लू के लिए विशेषज्ञ खाने-पकाने को लेकर सावधानी बरतने को कहते हैं। बर्ड फ्लू होने पर कफ, बुखार, सांस से जुड़ी दिक्कत, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, नाक बहना और बेचौनी जैसी समस्या हो सकती है।
बर्ड फ्लू भी सामान्य फ्लू की ही तरह होता है। एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस एच5एन8 को बर्ड फ्लू का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पहली बार एवियन इनफ्लूएंजा 2006 में फरवरी से अप्रैल के बीच महाराष्ट्र में 28 स्थानों पर तथा गुजरात में एक जगह फैला था। इस दौरान करीब दस लाख पक्षियों को मारा गया था और 2.7 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया था। 2008 में जनवरी से मई तक एवियन इनफ्लूएंजा का अब तक का सबसे बड़ा प्रकोप पश्चिम बंगाल में हुआ था। इस दौरान बीमारी से बचने के लिए 42 लाख 62 हजार पक्षियों को मारा गया था। असम में 2008 के नवम्बर-दिसम्बर में यह बीमारी 18 जगह फैली थी। अब तक 49 बार यह बीमारी अलग-अलग राज्यों में 225 जगह फैली। देश में पहली बार 2017 में दिल्ली, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और हरियाणा में प्रवासी पक्षियों एवं मुर्गियों में एक नए वायरस एच5एन8 की पुष्टि हुई थी। देश में बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए निगरानी की कार्ययोजना 2013 में तैयार की गई थी तथा जालंधर, कोलकाता, बेंगलुरु और बरेली में प्री फेब्रिकेटेड बायोसेंट्री स्तर की तीन प्रयोगशालाएं स्थापित की गईं। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में कड़ी चौकसी बरती गई। सरकार के सतत् प्रयासों से इस पर काबू पाया गया।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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