केजरीवाल सरकार कोरोना महामारी से निपटने की नीतियों पर श्वेत पत्र जारी करे– चौ0 अनिल कुमार

 # जब केजरीवाल के कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट 12 घंटे में आ सकती है तो दिल्ली के लोगों को रिपोर्ट के लिए कई दिनों तक क्यों इंतजार करना पड़ता है

 संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि केजरीवाल सरकार की निष्क्रियता और अक्षमता के कारण, दिल्ली की जनता को कोरोना वायरस के तेजी से फैलने का सामना करना पड़ रहा है, और दिल्ली सरकार ने अपनी गैर जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने हाथ खड़े कर दिए है। उन्होंने कहा कि जब महामारी लगभग सामुदायिक फैलाव स्तर तक पहुँच गया है, तब भी केजरीवाल केवल कोरोना वायरस के तेजी से प्रसार पर नियंत्रण करने के लिए ठोस प्रशासनिक उपाय करने के बजाय आरोप प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के प्राथमिक चरण में जब कोरोना महामारी की रफतार बहुत कम थी, केजरीवाल सरकार ने उस समय कोरोना पर नियंत्रण पाने का सुनहरा अवसर गंवा दिया। चौ0 अनिल कुमार ने केजरीवाल सरकार से कोरोना महामारी से निपटने की नीतियों पर श्वेत पत्र की मांग की।

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, राजीव भवन में आज एक डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि 23 मार्च, 2020 को कोविड-19 महामारी लॉकडाउन घोषित होने के बाद, केजरीवाल के पास महामारी के प्रसार की जाँच करने और प्रभावी व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन मुख्यमंत्री ने स्वयं को दूर रखा, दिल्ली सरकार बिना कप्तान के काम कर रही थी, जिस कारण कोरोना वायरस दिल्ली में अपेक्षा से कही तेजी से फैला, और हर गुजरते दिन के साथ मौतें भी अधिक हो रही है। जिसका परिणाम आज दिल्ली में 31309 कोरोना संक्रमित है और 905 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अब कह रहे है कि कल से वह सड़कों पर उतरेंगे, लेकिन उन्हांने अब तक ऐसा कदम क्यों नही उठाया था। चौ0 अनिल कुमार ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि केजरीवाल यह कहने के बाद ऐसा नाटक क्यों रच रहे हैं कि जब मंगलवार को राज निवास में उपराज्यपाल के साथ सर्वदलीय बैठक के बाद कहा कि हम उपराज्यपाल के फैसलों का पालन करेंगे।

उन्होंने  कहा कि कोरोना के कारण दिल्ली के हालात अब उस स्तर पर  पहुंच गए है कि केजरीवाल ने खुद एक संवाददाता सम्मेलन में स्वीकार किया है कि 31 जुलाई, 2020 तक, दिल्ली में लगभग 5 लाख 32 हजार कोरोना संक्रमित होंगे, और कोरोना रोगियों की बढ़ती संख्या के इलाज के लिए अस्पतालों में 80,000 बेडों की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि केजरीवाल सरकार ने स्वीकार किया है कि दिल्ली कोरोना एप के अनुसार उनके पास 9000 कोविड बेड में से 4000 बेड खाली हैं, जबकि हालात ऐसे है कि अस्पतालों में प्रवेश नहीं मिलने के कारण कोविड मरीज दिल्ली की सड़कों पर मरने को मजबूर हैं। यह अजीब है कि जब केजरीवाल लोगों को कोरोना परीक्षण करवाए बिना ही घर पर आइसोलेशन में रहने की सलाह दे रहे है। जबकि केजरीवाल को स्वयं कोरोना के लक्षण के संदेह पर उन्होंने तुरंत टैस्ट कराया जिसकी 12 घंटे के अंदर नेगेटिव रिपोर्ट भी आई, जबकि आम जनता को अपने टेस्ट की रिपोर्ट मिलने में कई दिनों का इंतजार करना पड़ता है। चौ0 अनिल कुमार ने केजरीवाल के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की, और कहा कि दिल्ली के आम आदमी को भी उचित स्वास्थ्य सुविधाऐं मिलनी चाहिए।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोरोना महामारी के दौरान केजरीवाल ने लोगों की सहानुभूति पाने के लिए औछे दर्जे की राजनीति करने का विकल्प चुना, लेकिन अब जब उन्हें लगता है कि वे कोरोना के खिलाफ लड़ाई हार गए हैं, तो वे इस बात की वकालत कर रहे है कि राजनीतिक दलों को ऐसे संकट के समय में आपस में लड़ना नही चाहिए।

 

 

 

 

 

 

 

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