मालानी में दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक उन्नयन के समग्र प्रयास

बाल मुकुन्द ओझा 

गांव की आर्थिक संरचना को मजबूत करने में दुग्ध उत्पादन का खासा योगदान है। दुग्ध एक ऐसा उत्पाद है जिसका योगदान सर्वाधिक है। यह पशुपालन से जुड़ा एक बहुत लोकप्रिय उद्यम है जिसके अंतर्गत दुग्ध उत्पादन, उसकी प्रोसेसिंग और खुदरा बिक्री के लिए किए जाने वाले कार्य आते हैं। राजस्थान के सीमावर्ती और रेतीले धोरो से आच्छादित बाड़मेर और जालोर जिलों के लोगों का मुख्य धंधा कृषि और पशुपालन है। लगातार अकाल ने इन क्षेत्रों के लोगों के समक्ष रोजी रोटी की बड़ी समस्या उत्पन्न करदी। कृषि के बाद पशुपालन यहाँ का प्रमुख व्यवसाय है। सीमावर्ती जिलों में वर्षाभाव के कारण कृषि से जीविकोपार्जन करना बहुत कठिन है ऐसी स्थिति में ग्रामीण लोगों ने पशुपालन को ही जीवन शैली के रूप में अपना रखा है।
मरू क्षेत्र के गौरव पद्मश्री मगराज जैन ने अभावग्रस्त बाड़मेर और जालोर में अपनी संस्था श्योर के माध्यम से गरीब, दलित, पिछड़े और जरुरत मंद लोगों के सामाजिक, आर्थिक उन्नयन के लिए अनेक परियोजनाएं संचालित की। इनमें डेयरी विकास एवं पशुपालन परियोजना भी शामिल है। स्वयंसेवी संस्था श्योर सोसाइटी टू अपलिफ्ट रूरल इकोनॉमी बाड़मेर ने 2 जनवरी 2007 से बाडमेर जिले के धोरीमन्ना ब्लॉक के 2 राजस्व गांवों नया नगर और धाधलावास से परियोजना का कार्य अपने हाथ में लिया। केयर्न वैदान्ता फाउडेशन के आर्थिक सहयोग से वर्तमान में बाड़मेर और जालोर जिले के गुडामालानी, चितलवाना, सांचोर, भीनमाल, बागोडा और रानीवाड़ा ब्लाकों की 27 पंचायतों के 50 राजस्व ग्रामों में परियोजना सफलता पूर्वक संचालित हो रही है। परियोजना का मुख्य कार्य डेयरी एंव पशुपालन के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों का आर्थिक उन्नयन कर उन्हे बडे पेमाने पर डेयरी व्यवसाय से जुड़वाना। पशु प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य एवं पशु आवास के प्रति सामुदायिक स्तर पर जागरूकता लाना। उन्नत नस्ल को बढावा देने हेतु दुग्ध उत्पादकों में जागरूकता लाना। उन्नत नस्ल की दुधारू गायो एवं भेसों हेतु बैक से लिकेजेज करवाना। पशुओं को नियमित रूप से हरा चारा की पर्याप्त उपलब्धता हेतु हरा चारागाह हेतु प्रशिक्षण, प्रदर्शन का सतत आयोजन कर उन्हे लाभाविन्त करवाना। दूध के अच्छे दाम मिलने के साथ दुग्ध के उत्पाद बनाने की दक्षता प्रदान कर उन्हे मार्केटिंग में सहयोग प्रदान करना मुख्य है।
श्योर के परियोजना प्रबंधंक हनुमान राम चौधरी ने बताया की बाड़मेर और जालोर की 50 ग्राम स्तरीय दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के कुल 4695 सक्रिय सदस्यों द्वारा प्रतिदिन 17 हजार 226 लीटर दुग्ध का संकलन कर डेयरियों को भिजवाया जा रहा है, साथ ही समिति सदस्यों को नियमित समय पर भुगतान की व्यवस्था की गई है। गाय के दुग्ध की दर 28 एवं भेस के दुग्ध की दर 44 रूपये प्रति लीटर मिल रहा है। परियोजना के तहत 26 महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 309 सक्रीय महिला सदस्य अपनी भागीदारी दे रही है। समितियो द्वारा बिना लाभ हानि के संतुलित दाला डिप्पों का संचालन किया जा रहा है। उन्नत नस्ल को बढावा देने हेतु थारपारकर सांड एवं मुर्रा नस्ल नस्ल के पाडों का समितियों द्वारा रख-रखाव एवं प्रबंधन किया जा रहा है। हरा चारागाह विकास हेतु उन्नत तकनीकी के साथ अजोला घास पेपियर हाईब्रेड घास, चारा बीट चुकन्दर घास के प्रति सदस्यो को प्रशिक्षण कर एवं उन्हे जागरूक कर 5447 सदस्यों को लाभाविन्त करवाया गया।
चौधरी ने बताया दुग्ध उत्पादकों को उचित दाम दिलाने हेतु समितियों के माध्यम से डेयरी महासंघ का गठन कर प्रोसेसिंग एवं पैकिंग यूनिट की स्थापना कर डेयरी को व्यापार का दर्जा दिलवाने का लक्ष्य हासिल करने के प्रयास किये जा रहे है। इसके साथ ही महिला हॉट बाजार की स्थापना कर स्थानीय महिला स्वंय सहायता समूहों एवं समितियों के माध्यम से तैयार उत्पाद का मार्किटिंग उपलब्ध करवाने के लिए भी संस्था प्रयासशील है। इसके अलावा दूर-दराज की ढाणियों में डेयरी से वंचित दुग्ध उत्पादकों को डेयरी परियोजना से जोड़ने का कार्य भी प्रगति पर है।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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