रेलवे को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना हमारा लक्ष्य-आशुतोष गंगल

नई दिल्ली। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने आज वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कंफैड्रेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआईआई) चंडीगढ़ चैप्‍टर द्वारा आयोजित वेंडर डेवलेपमैंट ऑफ इंडियन रेलवेज़ सेमिनार को सम्बोधित किया । अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए यातायात का प्रमुख माध्यम होने के साथ-साथ भारत में माल ढुलाई का भी एक प्रमुख साधन है । यह उद्योगों के विकास में भी महत्वूपर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ एक अर्थव्यवस्था भी है । लागत -अनुकूल, सुरक्षित, त्वरित और समयबद्ध सेवाओं की आवश्यकताओं के मद्देनज़र भारतीय रेलवे के प्रमुख लक्ष्य सुरक्षा, क्षमता विस्तार, ढाँचागत उन्नयन होने के साथ रेलवे को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है । दक्ष और तकनीकी रूप से उन्नत सार्वजनित परिवहन के उददेश्य को प्राप्त करने के लिए हमें घरेलू क्षमताओं का निर्माण करने और भारत में विनिर्माण की स्थिति को उन्नत करने की आवश्यकता है । इस अवसर पर सीआईआई, चंडीगढ़ के अध्यक्ष, डॉ. एस.पी.एस. ग्रेवाल, सीआईआई, चंडीगढ के उपाध्यक्ष मनीष गुप्ता और उत्तर रेलवे, राईटस और आरडीएसओ के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे ।

कार्यक्रम के प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि रेलवे को अपनी परि सम्पत्तियों के निर्माण और रख-रखाव के लिए पटरियों और पुलों, स्टेशनों और भवनों, सिगनल प्रणाली, ओवर हैड विद्युत आपूर्ति, हाई स्पीड कोच, लोकोमोटिव और माल डिब्बों जैसी अनेक प्रकार की वस्तुओं की आवश्यकता होती है । भारतीय रेलवे पर चल स्टॉक की नई तकनीक और डिजाइन आने से विकसित, विश्वसनीय और उद्योग में भरोसेमंद वेंडर बेस के माध्यम से एक सक्रिय सामग्री समर्थन होने से इसके उपयोगकर्ताओं को आरामदायक सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी । भारतीय रेलवे ने अपने कोचों की आंतरिक सज्जा को बेहतर बनाने के लिए अनेक उपाय किए हैं ।भारतीय रेलवे ने घरेलू स्तर पर डिजाइन और निर्मित सेमी हाई स्पीड स्टॉक जैसे वंदे भारत की शुरूआत की है । तेज़स और हमसफ़र जैसी अन्य प्रकार की रेलगाड़ियां भी हाल ही में डिजाइन करके तैयार की गयी हैं । भारतीय रेलवे के उत्पादन कारखाने हाई स्पीड डिब्बों और इंजनों के निर्माण में संलग्न है । इन स्टॉक्स के निर्माण में भारतीय रेलवे को सहयोग देने के लिए उद्योगों को बाज़ार से रेलवे सामग्री की उन्नत मांग के साथ कदम बढ़ाना है। व्यापार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को अपनी विनिर्माण प्रक्रियाओं, सामग्री इनपुट को उन्नत बनाने और “मेक इन इंडिया” नीति के अंतर्गत आयात प्रतिस्थापन के माध्यम से लागत को कम करने के लिए आमंत्रित किया जाता है । इस नीति के तहत उत्तर रेलवे भारतीय उद्योगों को अपने ट्रैक, चल स्टॉक, मशीनरी और प्लांट तथा भारतीय रेलवे के लिए आवश्यक अन्य रेल उपकरणों के निर्माण और आपूर्ति के लिए प्रोत्साहित कर रहा है ।

एमएसएमई क्षेत्र के महत्व पर विस्तार से बात करते हुए श्री गंगल ने इस बात पर बल दिया कि एमएसएमई क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण भूमिका है और इसे भारतीय उद्योगों के विकास में विकास के इंजन के रूप में मान्यता दी गयी है । भारतीय रेलवे अपने सम्भावित विक्रेताओं और विशेषकर एमएसएमई को लागत कम करने व प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए और अधिक प्रयास कर रहा है । वेंडर बेस बढाने के अलावा इसका एक उददेश्य रेलवे को उपकरणों को आपूर्ति करने वाली मौजूदा कम्पनियों की उत्पादन रेंज को बढाना है ।

एक विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला से विश्वसनीय वितरण, लीड टाइम और माल की लागत में कमी, बेहतर परिसम्पत्ति प्रबंधन, विनिर्माण की कम लागत, माल ढुलाई के व्यय में कमी और कुल मिलाकर उत्पाद की लागत में कमी आती है । अपने आगे के सम्बोधन में श्री आशुतोष गंगल ने बताया कि भारतीय रेलवे ने पिछले कुछ समय में अपनी व्यापार प्रकियाओं को सरल बनाया है ।“व्यापार सुगमता” के आदर्श लक्ष्य के साथ अपने उददेश्य के साथ भारतीय रेलवे कार्य कर रही है । सार्वजनिक डोमेन में खरीद के प्रत्येक चरण को डालकर उद्योगों द्वारा महसूस की जा रही परेशानियों का समाधान किया गया है । इससे ने केवल प्रणाली में पूरी तरह पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है बल्कि समग्र खरीद प्रक्रिया में दक्षता भी आई है ।

समय पर भुगतान के लिए रेलवे आपूर्ति कर्ताओं की चिंताओं को रेलवे की ऑन लाईन भुगतान प्रणाली के माध्यम से सुलझाया जा रहा है । भुगतान-सुगमता के लिए भारतीय रेलवे ने लैटर ऑफ क्रेडिट के माध्यम से भुगतान की भी एक प्रणाली शुरू की है । इसका लाभ उद्योगों के साथ-साथ स्थानीय आपूर्तिकर्ता भी उठा सकते हैं । हाल के नीतिगत परिवर्तनों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उत्तर रेलवे, अन्य क्षेत्रीय रेलों और उत्पादन कारखानों की तरह समय-समय पर वेंडर डेवलपमैंट मीट का आयोजन करती रही है । उद्योगों के लाभ के लिए उत्तर रेलवे ने जगाधरी और लखनऊ डिपो में स्थायी प्रदर्शनी हॉल भी खोले हैं । अन्य स्थानों पर इसी तरह के प्रदर्शनी हॉल खोलने की योजना बनाई जा रही है ।

महत्वपूर्ण मदों और सब-एसेंम्बलियों की एक वर्चुअल प्रदर्शनी हाल ही में लगायी गयी है। डिस्पले में दर्शायी गयी प्रत्येक मद के सामने मदवार वाणज्यिक और तकनीकी विवरण भी दिए जाते हैं। उद्योगों द्वारा जरूरी मदों की रेंजों को समझने के लिए यह डिजिटल प्रदर्शनी उपयोगी प्लेटफॉर्म साबित होगी । इस प्रदर्शनी का पता हमारी आईआरईपीएस साइड पर उपलब्ध है ।उन्होंने यह भी कहा कि उद्योगों के साथ परस्पर सम्पर्क के लिए यह प्लेटफॉर्म रेलवे की आपूर्ति श्रृंखला के प्रयासों को और मजबूत करने में उपयोगी होगा । विश्व में कोरोना महामारी के अप्रत्याशित प्रसार ने न केवल गम्भीर स्वास्थ्य संकट को जन्म दिया है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के पूरे सिलसिले को भी प्रभावित किया है । हमें उम्मीद है कि यह मुश्किल समय जल्द ही बीत जायेगा और उद्योग अपना सामान्य कामकाज फिर से शुरू कर पायेंगे।

सीआईआई, चंडीगढ चैप्‍टर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा यह क्षेत्र सटीक इंजीनियरिंग घटकों के सबसे बड़े विनिर्माण केन्द्रों में से एक है । अत: सीआईआई का चंडीगढ चैप्‍टर उद्योगों और रेलवे के साझे उद्देश्य को पूरा करने में महत्पूर्ण भूमिका निभाता है ।सेमिनार में विचार-विमर्श और तकनीकी सत्रों के दौरान भारतीय रेलवे खरीद प्रणाली, विक्रेता विकास, विक्रता अनुमोदन, गुणवत्ता आश्वसन प्रणाली इत्यादि के विभिन्न मापदंडों को आरडीएसओ, राईटस और क्रिस जैसी संबंधित विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा समझाया जायेगा ।

 

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