क्या बंगाल विधानसभा चुनाव में 75 सीटों पर चुनाव लड़ेगी JDU? जानें क्या बोले नीतीश कुमार

नई दिल्ली  क्या अगले साल बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में बिहार में एनडीए का सहयोगी दल जदयू भी चुनाव मैदान में उतरेगा? इस पर बिहार के सीएम और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने कहा है कि बंगाल से हमारे साथ जुड़े बहुत से लोग आए हुए थे, मगर चुनाव के बारे में कोई बात नहीं हुई। वहीं इससे पहले जदयू के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रभारी गुलाम रसूल बलियावी ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में पार्टी की इकाई कम से कम 75 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है और यह संख्या नेतृत्व से मंजूरी मिलने पर बढ़ सकती है।
नीतीश कुमार ने कहा है कि 26 तारीख को एग्जीक्यूटिव की बैठक होने वाली है। हमारी पार्टी के संविधान का प्रावधान है, उसी के अंतर्गत ये बैठक हो रही है। ऐसी कोई खास चर्चा आज नहीं हुई। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों के लिए चुनाव कुछ महीनों में होने हैं और भाजपा जिसने पिछले साल के लोकसभा चुनाव में राज्य में शानदार प्रदर्शन किया था, वह इस चुनाव में सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रमुख चुनौती होगी ।
बलियावी ने कहा था कि उनकी पार्टी पहले भी पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि हम इस बार भी ऐसा करना चाहेंगे। हमारी पार्टी ने मालदा, सिलीगुड़ी, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, बांकुरा और नंदीग्राम जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी उन जगहों पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए आशान्वित है जहां बिहार से आए लोगों का प्रतिशत अधिक है। बलियावी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिहार के सुशासन की आस-पास के राज्यों में चर्चाएं हो रही हैं।
भाजपा के साथ गठबंधन बिहार तक ही सीमित: जदूय
जदयू का कहना है कि भाजपा के साथ उसका गठबंधन बिहार तक ही सीमित है। पार्टी ने कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में भाजपा के साथ गठजोड़ किये बिना चुनाव लड़ा था । अरुणाचल प्रदेश में भाजपा सत्ता में है, वहां जदयू मुख्य विपक्षी दल है। हालांकि जदयू ने इस साल की शुरुआत में दिल्ली विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ा था। एक सवाल का जवाब देते हुए बलियावी ने कहा उनकी राय है कि भाजपा को नीतीश कुमार को साथ लेने(पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में) के बारे में विचार करना चाहिए, अगर ऐसा नहीं हुआ तो हर दल को अपने जनाधार के विस्तार का अधिकार है ।

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