कोरोना संकट में ई लर्निंग की उपयोगिता

प्रो नीरज तिवाड़ी

कोरोना काल में सबसे ज्यादा हमारी शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। कोविड 19 ने पूरी शिक्षा व्यवस्था को एकदम नई और तकनीकी पर आश्रित कर दिया है। कोरोना संकट के दौर में शैक्षणिक संस्थानों के आगे जो चुनौती है उसमें ऑनलाइन एक स्वाभाविक विकल्प है। आज शिक्षा और पठन-पाठन से जुड़ा हुआ हर शख्स मोबाइल, आईपैड्स, लैपटॉप्स, डेक्सटॉप्स, टैब्स पर आ चुका है। शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्ति को सफल जीवन जीने के लिए सशक्त बनानां, परिवार, समाज, राष्ट्र के लिए सर्वश्रेष्ठ योगदान देना है। कोरोना की वैश्विक महामारी के दौर में भारत में शिक्षक और शिक्षार्थी नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। स्कूल, कॉलेज विश्वविधालय बंद पड़े है। शिक्षण व्यवस्था ठप्प पड़ी है। छात्र और शिक्षक आमने सामने बैठकर कब पढ़ेंगे अभी कोई तय नहीं है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षण के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
शिक्षा किसी व्यक्ति के विकास और समुदाय की समृद्धि के लिए भी योगदान देती है। भारत में स्कूल कॉलेज समेत तमाम शैक्षणिक संस्थान को कोरोना संकट के चलते 24 मार्च 2020 से बंद कर दिया गया। कोरोना के इस संकट काल में ऑनलाइन शिक्षा मौजूदा समय की जरुरत बन चुकी है। इसके जरिए बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने वाले असर को काफी हद तक कम किया गया है। ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र में एक बात निकल कर सामने आ रही है कि क्या ऑनलाइन शिक्षा आने वाले समय में एक विकल्प बनकर रह जाएगी या फिर इसे प्रभावी रुप से हमारी शिक्षा व्यवस्था में अपनाया जाएगा। ऑनलाइन पोर्टल किसी भी समय कहीं से भी सुलभ है। यह न केवल पुस्तकों और अन्य संसाधनों को लाता है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षा फैलाने के लिए दूरस्थ शिक्षा पहलुओ को भी बढ़ावा देता है। ऑनलाइन शिक्षा ऑनलाइन समाधान के माध्यम से कम लागत पर सेवाएं प्रदान करता है। यह कम कीमत पर सामान्य आधारभूत संरचना प्रदान करता है। यह शिक्षकों, स्कूलों और परीक्षा बोर्डों के लिए पाठ्यक्रम प्रदान करने और कम लागत पर परीक्षा आयोजित करने और मूल्यांकन करने के लिए उपकरण प्रदान करता है।
हमारे देश में ऑनलाइन शिक्षा की राह आसान नहीं है। इसके लिए संबंधित विकसित प्रणाली की दरकार होगी ताकि सुगमता से छात्रों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित की जाए। ऑनलाइन शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जहाँ शिक्षक दूर से और दुनिया के किसी भी कोने से इंटरनेट के माध्यम से जुड़ सकता है। शिक्षक स्काइप ,जूम इत्यादि एप्प के जरिये वीडियो कॉल करते है और बच्चे लैपटॉप कंप्यूटर और मोबाइल पर शिक्षक को देख और सुन सकते है। शिक्षक बच्चो को पढ़ाने के लिए अपने कंप्यूटर की स्क्रीन शेयर करते है जिससे बच्चे घर बैठे शिक्षा प्राप्त कर पाते है।
आज स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी वगैरह को आपस में साझा करने के विकल्प भी आजमाए जा रहे हैं. लेकिन, अगर एक छात्र भी ऑनलाइन शिक्षा के दायरे से बाहर रह जाता है, तो ये उसके साथ नाइंसाफी होगी। ऑनलाइन शिक्षा के लंबी अवधि के समाधान के लिए राज्यों और केंद्र की सरकारों को चाहिए कि वो सभी शिक्षण संस्थानों को अच्छी ब्रॉडबैंड सेवा और ऑनलाइन पढ़ाई के लिए लैपटॉप और कंप्यूटर उपलब्ध कराएं। जो बच्चे ऑनलाइन शिक्षा को पाने में असमर्थ है उनके लिए निशुल्क ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था करने की जरूरत है ताकि शिक्षा से कोई वंचित ना रहे। ऑनलाइन शिक्षा एक बढ़िया माध्यम है जहाँ छात्रों को अवश्य शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए।
कोरोना महामारी से पूर्व भारत के अधिकांश शिक्षण संस्थानों को ऑनलाइन शिक्षा का कोई विशेष अनुभव नहीं रहा है, ऐसे में शिक्षण संस्थानों के लिये अपनी व्यवस्था को ऑनलाइन शिक्षा के अनुरूप ढालना और छात्रों को अधिक-से-अधिक शिक्षण सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती होगी। वर्तमान समय में भी भारत में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की बहुत कमी है, देश में अब भी उन छात्रों की संख्या काफी सीमित है, जिनके पास लैपटॉप या टैबलेट कंप्यूटर जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। अतः ऐसे छात्रों के लिये ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़ना एक बड़ी समस्या है। शिक्षकों के लिये भी तकनीक एक बड़ी समस्या है, देश के अधिकांश शिक्षक तकनीकी रूप से इतने प्रशिक्षित नहीं है कि औसतन 30 बच्चों की एक ऑनलाइन कक्षा आयोजित कर सकें और उन्हें ऑनलाइन ही अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा सकें। इंटरनेट पर कई विशेष पाठ्यक्रमों या क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी अध्ययन सामग्री की कमी होने से छात्रों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई विषयों में छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा की आवश्यकता होती है, अतः दूरस्थ माध्यम से ऐसे विषयों को सिखाना काफी मुश्किल होता है।

(लेखक प्रोफेसर एंड डीन हैं स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी,पूर्णिमा यूनिवर्सिटी, जयपुर राजस्थान के)

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