कोरोना काल में युवाओं में बढ़ रहा है मानसिक तनाव

बाल मुकुन्द ओझा

कोरोना संक्रमण के दौरान लोगों में भय, चिंता, तनाव, डिप्रेशन बढ़ रहा है और यह खतरा युवाओं में ज्यादा हो रहा है। युवाओं में बेरोजगारी का और कोरोना का मानसिक तनाव आदि से टेंशन और उसके कारण हाइपरटेंशन की समस्या लोगों में बढ़ती जा रही है। जो बेहद चिंताजनक है। कोरोना महामारी ने दुनिया भर के करोड़ों लोगों की दिनचर्या को बिगाड़ कर रख दिया है। उनका वक्त इस वायरस से बचाव करने के बारे में ही सोचकर गुजर रहा है जिसकी वजह से उन्हें तनाव, चिंता व घबराहट की परेशानी से रूबरू होना पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण ने देश और दुनिया के लोगों को मानसिक तनाव में धकेल दिया है। लोगों पर कोरोना का खौफ इस कदर सवार हो गया है, कि उन्हें हर छोटी मोटी बीमारी में कोरोना दिखता है। इस बीमारी ने लोगों में तनाव पैदा कर दिया है। बच्चे से बुजुर्ग तक सभी वर्ग के लोग कोरोना से इतना ज्यादा डर गए है कि उनका मन काम में भी नहीं लगता। ज्यादातर लोग एक दूसरों के संपर्क में आने से बचते हैं, और घर में ही रहना पसंद करते हैं। कोरोना वायरस ने समाज के हर तबके को संकट में डाल रखा है। शिक्षण सस्थाओं के बंद होने से बच्चे और युवा घरों में कैद होकर रह गए है। मोबाइल और टीवी ने स्कूल और कॉलेज जाने वालों को अपनी जकड में ले लिया है। इससे युवा और किशोर वर्ग की सेहत पर बुरा असर पड़ा है। खेलने कूदने के दिन हवा हो गए है। शारीरिक गतिविधिया ठप्प होने से बच्चों के विकास पर विपरीत असर हुआ है। युवावस्था की ओर बढ़ने के दौरान अधिक वजन बढ़ने के लिए कई कारणों से संकटपूर्ण समय है। इनमें बहुत सारे युवा घर से स्कूल, कॉलेज जाने के लिए निकलते हैं और खाने के लिए उन्हें और आजादी मिल जाती है। शिक्षण संस्थाएं बंद होने से बच्चे घरों में रहते है जिसके अनेक दुष्परिणाम सामने आये है। मानसिक तनाव भी अनेक बीमारियों की जड़ है।
हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार कोरोना से सबसे अधिक युवा वर्ग प्रभावित हुआ है। इस शोध में ये दावा किया गया है कि कोरोना मानसिक तनाव का कारण बना है। शोधकर्ताओं ने स्कूल, कॅालेज बंद होने को भी मानसिक तनाव का कारण बताया है। उनका कहना है कि ये उम्र ऐसी होती है जिसमें व्यक्ति बहुत कुछ नया करना चाहता है। स्कूल, कॅालेज में व्यक्ति व्यस्त रहता है, जिस वजह से दिमाग में गलत विचार नहीं आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की वजह से स्कूल, कॅालेज बंद हैं, जिस वजह से युवा वर्ग काफी परेशान रहने लगे हैं। यह ऐसी उम्र ऐसी होती है, जिसमें तरह- तरह के सवाल दिमाग में चलते हैं और घर में कैद होने से दिमाग में गलत विचारों के आने की संभावना भी काफी है। इन गलत विचारों के कारण मानसिक तनाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
मनोचिकित्सकों का कहना है कि कोरोना काल के हालात से निपटने के लिए समय का सही इस्तेमाल करना चाहिए। उनके मुताबिक जिन विषयों में रूचि हैं उन पर किताबें पढ़नी चाहिए, घर में पेड़ और पौधों से भी सकारात्मकता का एहसास हो सकता है। वे कहते हैं साथ ही सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर आने वाली नकारात्मक चीजों को नजरअंदाज कर सकारात्मक चीजों को ही अपनाना चाहिए। मनोचिकित्सकों का कहना है कि लोग शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को स्वस्थ रखें।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों बताते हैं कि 54.4 फीसदी लोगों की शारीरिक गतिविधियां करने में रुचि नहीं है। इस सरकारी एजेंसी द्वारा की गई स्टडी के अनुसार लोग यात्रा और मनोरंजन से जुड़ी शारीरिक गतिविधियों के मुकाबले काम में ज्यादा समय बिताते हैं। आलसी जीवनशैली, कसरत न करना या प्रोफेशनल की देखरेख के बिना कसरत करने से युवाओं के जोड़ों के लिगामेंट में दिक्कतें होने लगती हैं। जमाने के बदलने के साथ मानव की आदतें भी बदलती रहती है। शारीरिक श्रम नहीं के बराबर होता है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

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