राजस्थान में सत्ता के शह और मात का सियासी खेल शुरू

बाल मुकुन्द ओझा

राजस्थान में सचिन पायलट खेमे की बगावत के पांच माह बाद सत्ता के शह और मात का सियासी खेल एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। यह आशंका खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने व्यक्त की है। गहलोत ने शनिवार को सिरोही के शिवगंज कांग्रेस कार्यालय भवन का वर्चुअल उद्घाटन करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में ये संगीन आरोप लगाए।
गहलोत के इस बयान के बाद प्रदेश में एकाएक ही सियासी पारा चढ़ने लगा है। अभी यह पता नहीं चला है की गहलोत के अचानक ही ऐसे आरोप लगाने के पीछे उनकी मंशा क्या है। बहरहाल गहलोत ने उनकी सरकार गिराने के षड्यंत्र का आरोप भाजपा पर जड़ दिया है। गहलोत के आरोपों के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। गहलोत ने यह भी कहा बागी विधायकों को देश के गृह मंत्री अमित शाह का प्रश्रय मिला था। गहलोत ने शाह पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे हमारे विधायकों को बैठाकर चाय-नमकीन खिला रहे थे और बता रहे थे कि पांच सरकार गिरा दी है, छठी भी गिराने वाले हैं। धर्मेंद्र प्रधान उनका मनोबल बढ़ाने के लिए जजों से बातचीत करने की बातें कर रहे थे। मगर कांग्रेस के नेताओं ने इस दौरान बागियों को कांग्रेस से निकालकर इस षड़यंत्र को विफल कर दिया था। गहलोत खेमे को अपने विधायकों को एक महीने से अधिक बाड़ेबंदी में रख कर अपनी सरकार बचानी पड़ी थी बाद में राहुल गाँधी और प्रियंका के हस्तक्षेप के बाद सचिन पायलेट के बागी धड़े को कांग्रेस में वापस लिया गया।
सत्ता के इस सियासी संघर्ष में पायलेट खेमे को भारी नुक्सान उठाना पड़ा। पायलेट को उप मुख्यमंत्री के पद सहित प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद को गंवाना पड़ा। साथ ही उनके समर्थक दो मंत्री भी हटाए गए। प्रदेश संगठन से भी उनके समर्थकों को बाहर किया गया। तब से अब तक पायलेट खेमा सत्ता और संगठन से अपनी बहाली का इंतजार कर रहा है। मगर गहलोत के ताजा बयान के बाद लगता है पायलेट खेमें को कोई तरजीह मिलने वाली नहीं है। गहलोत के बयान ने एक तीर से दो शिकार किये है। गहलोत ने अपनी सरकार को अस्थिर करने का आरोप भाजपा पर तो लगाया ही है साथ ही पायलेट खेमे को भी अपने निशाने पर लिया है। इसे देखकर नहीं लगता है कांग्रेस के दोनों धड़ों में कोई सुलह हुई है। अविश्वास और घृणा का वातावरण लगातार बना हुआ है। कांग्रेस के नेता मंत्री मंडल में बदलाव और राजनैतिक नियक्तियों का बेसब्री से इंतजार कर रहे है। वे लाभ के पद पाने के लिए व्याकुल हो रहे है मगर यह बयानबाजी कांग्रेस के अंदरूनी संकट को पाटने के बजाय विध्वंशक अधिक साबित हो रही है। इससे कांग्रेस में कलह बढ़ने के आसार फिर उत्पन्न हो रहे है। पायलेट खेमे ने गहलोत के बयान पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।
दूसरी तरफ भाजपा ने पलटवार करते हुए इसे गहलोत की नाकामी करार दिया। राज्य विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि गहलोत ने विधायकों को लालच देकर अपने साथ बांध रखा था, उनसे किए वादों को पूरा नहीं कर पा रहे। ऐसे में गहलोत सरकार में विस्फोट अवश्य होगा। उनका खुद का घर सुरक्षित नहीं है। पुनिया ने कहा कि अशोक गहलोत सरकार गिराने को लेकर रोज भेड़िया आया- भेड़िया आया की तरह नई- नई कहानियां लेकर आ जाते हैं। इनकी सरकार में इतना झगड़ा है कि यह बीजेपी के नेताओं को दोष दे कर अपना झगड़ा छुपाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री की बयानबाजी से यह साबित होता है कि वे सरकार चलाने में विफल साबित हो गए। गहलोत ने अमित शाह व धर्मेंद्र प्रधान के नाम लेकर बिना प्रमाण व तर्क के ओछी भाषा का इस्तेमाल किया है वह राजनीतिक तौर पर मर्यादा की परिधि में नहीं आता है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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