टीएमयू पहुंचे ऑर्गेनिक फार्मिंग के देवदूत

जैविक खेती की अलख जगाने को हरियाणा के नीरज प्रजापति करेंगे  देश भ्रमण

श्याम सुंदर भाटिया

मुरादाबाद। धरतीपुत्रों के लिए हरियाणा के नीरज प्रजापति देवदूत बन कर उभरे हैं। वह मानते हैं, रसायनिक खेती मौत के सौदे के मानिंद है। हर साल देश में 25% मौतें रसायनिक पैदावार से हो जाती हैं। इसीलिए वह जैविक खेती के प्रबल पैरोकार हैं। द बाइसिकल मैन ऑफ़ इंडियन एग्रीकल्चर के नाम से पहचाने जाने वाले इस फरिश्ते का लक्ष्य जैविक खेती की अलख जगाने को गांव.गांव घूमना है।  नीरज कहते हैंए वह 1,11,111 किलोमीटर का देश भ्रमण करेंगे। 21,962 किमी की दूरी तय करके वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी पहुंचे।वे  सबसे पहले कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंसेज का दौरा किया, जहां निदेशक छात्र कल्याण प्रो एमपी सिंह ने तुलसी का पौधा भेंट करके स्वागत किया। उन्होंने कॉलेज में मॉडर्न लैब को भी देखा। इसके बाद जैविक खेती के इस बड़े पैरोकार का अगला पड़ाव यूनिवर्सिटी की सहफसली खेती को देखना और समझना रहा। प्रोफेसर डॉ बलराज सिंह ने इंटरक्रॉपिंग की फार्मिंग को गहनता से समझाया।

बीटेक इंजीनियरिंग के ड्रॉपआउट  नीरज पंजाब के काश्तकारों के बीच क्या बैठे कि उनके करियर की दिशा ही बदल गई।उन्होंने  ठान लिया, अब वह शेष जीवन जैविक खेती की पुरजोर वकालत के लिए ही समर्पित कर देंगे। उन्होंने साइकिल को अपना वाहन बना लिया और एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज के संग.संग कृषि वैज्ञानिक और धरतीपुत्रों से जैविक खेती को लेकर संवाद। अब वह किसानों की समस्याओं को कृषि वैज्ञानिकों से साझा करते हैं तो दूसरी ओर कृषि वैज्ञानिकों की सलाह को फार्मर्स को शेयर करते हैं। श्री नीरज को देखने और सुनने से लगता हैए उनके रहन .सहन में भारतीयता साफ.साफ झलकती है। साइकिल संग तिरंगा इसका गवाह है। इससे पहले कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंसेज में डॉ प्रवीण कुमार, डॉ देवेंद्रपाल सिंहए डॉ आशुतोष अवस्थी,  विशेष सिंह आदि ने द बाइसिकल मैन ऑफ़ इंडियन एग्रीकल्चर का माल्यार्पण करके गर्मजोशी से स्वागत किया। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी का भ्रमण करने के बाद वह मेरठ के लिए रवाना हो गए।

 

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