भारत की अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार की उम्मीद

डॉ मोनिका ओझा खत्री

देश की अर्थव्यवस्था पर मंदी और कोरोना के मंडराते काले बादलों के अब छंटने के आसार दिखाई देने लगे है। अर्थव्यवस्था पर परस्पर दावों और प्रतिदावों के बीच भारत सरकार को उम्मीद है सरकार के बेहतर प्रयासों के बाद अब अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार के संकेत मिलने लगे है। सरकार का मानना है जीडीपी की ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो हम सिर्फ 6 प्रतिशत ही पीछे है। सरकार ने आशा व्यक्त की है की अगले तीन माह में जीडीपी की वृद्धि दर सकारात्मक होगी। कोरोना लोक डाउन की वजह से साल की प्रथम तिमाही में घरेलु उत्पाद में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आयी थी वह दूसरी तिमाही में गिरकर 7.5 प्रतिशत रह गयी है जो यह दर्शाती है हम तेजी से आगे बढ़ रहे है।
गौरतलब है कोरोना महामारी शुरू होने के बाद हमारी अर्थव्यवस्था अनेक संकटों का सामना कर रही है। कई वैश्विक संस्थाओं ने भारत की जीडीपी दर में तेज गिरावट की आशंका जताई थी। पहली तिमाही में करीब 24 फीसदी की गिरावट के साथ यह आशंका सच साबित हुई। लेकिन कोरोना संकट के बीच सरकार के आत्मनिर्भर अभियान सिरे चढ़े तो रेटिंग एजेंसियों को अपने अनुमान को बदलने पर मजबूर कर दिया। विशेषकर कृषि, बिजली और औद्योगिक नीति आदि के क्षेत्रों में किये गए सुधारात्मक प्रयासों से स्थिति में आशानुरूप सुधार देखने को मिल रहा है और अगली तिमाही में देश में बेहतर सुधार देखने को मिलेगा। दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को रफ्तार दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चौथी तिमाही तक भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। जीडीपी के आंकड़ों में पहली तिमाही की तुलना में सितंबर तिमाही में सुधार होने के बाद कई ऐसे संकेत मिले हैं जो मजबूत सुधार दिखा रहे हैं।
नवंबर महीने के आते आते डीजल पेट्रोल की मांग, गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन और ई-वे बिल जैसे आंकड़े आशातीत बेहतरी दिखा रहे हैं। इससे अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद दिख रही है। वाहन के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से 27 नवंबर तक 79 हजार 554 गाड़ियों का रोजाना रजिस्ट्रेशन हुआ । नवंबर में सीधे तौर पर त्यौहारी सीजन में गाड़ियों की तेजी दिखी । कोरोना संक्रमण के बाद यह पहली बार है जब गाड़ियों का मासिक रजिस्ट्रेशन इस स्तर पर पहुंचा है। इसी तरह ई-वे बिल दिसंबर 2019 में 5.5 करोड़ था। इस साल सितंबर में यह 5.7 करोड़, अक्टूबर में 6.4 करोड और 22 नवंबर तक 4.1 करोड़ था। कोरोना से पहले मासिक औसत ई-वे बिल 5.5 करोड़ होता था। इसी तरह नवंबर में पावर की मांग लगातार बढ़ी है। यह 25 नवंबर तक 154.1 गीगावाट थी. जबकि 2019 नवंबर में यह 150.3 गीगावाट थी। पेट्रोल -एलपीजी की मांग की बात करें तो यह भी बहुत तेजी से बढ़ी है। पेट्रोल की मांग में 4.7 प्रतिशत का सुधार हुआ है जबकि एलपीजी में 2 प्रतिशत का सुधार हुआ है। डीजल की मांग नवंबर के पहले पखवाड़े में मासिक आधार पर 7.7 प्रतिशत बढ़ी है। जीएसटी माह अक्टूबर में 1.05 लाख करोड़ रुपए रही है। नवंबर में इसके 1.08 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। अक्टूबर में इसमें 10 प्रतिशत की ग्रोथ रही है।

 

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