आलू प्याज के बाद दालों में लगा महंगाई का तड़का

बाल मुकुन्द ओझा

आलू प्याज के बाद दालों के बाजार में आग लगी हुई है। महंगी दालों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। खाद्य वस्तुओं के दामों में तेजी का रूख बना हुआ है। इससे कई वस्तुओं के दाम तो रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में महंगाई ने आम आदमी की परेशानी और बढा दी है। दाल कभी आम लोगों का सहारा थी। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार दाल-रोटी खाकर अपना गुजारा कर लेता था, मगर अब ऐसा नहीं है। महंगाई की मार दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। प्याज तो पहले ही महंगा था। अब लोगों की थाली से आलू भी खिसकता नजर आ रहा है। जो आलू 15 रुपये किलो बिकता था वह आज 50 रुपये में मिल रही है। सरसो तेल के भी भाव चढ़े हुए हैं। मूंग, मसूर, उड़द और अरहर की दालों के दाम एक सौ से डेढ़ सौ रूपये किलो पहुँच गए है। अरहर दाल की कीमत एक माह में डेढ़ गुना तक बढ़ गयी। पेट्रोल डीजल के दाम ठहराव के बाद अब लगातार बढ़ते जा रहे है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी कोई अच्छी खबर सुनने को नहीं मिल रही है। हालाँकि सरकार ने हालात सुधरने का दावा किया है।
दैनिक जीवन में हम तरह की दालों का सेवन करते हैं। दाल प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। महंगाई के पंख लगने के बाद दालें लोगों की पहुंच से दूर हो गई हैं। हालत यह है कि दालों को खाना अब लोगों के बस की बात नहीं रही। हर दाल के दाम आसमान छू रहे हैं। दालें रसोई से छिटक चुकी है और गरीब की थाली से भी दूर हो गयी है। दाल न सिर्फ हमारे शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल की आपूर्ति करती है बल्कि हमें तंदरुस्त बनाए रखने में भी मदद कर सकती हैं। लोक डाउन से पहले के भावों में और आज के भावों में दिन रात का फर्क देखा जा सकता है। घर से बाहर निकलने पर कोरोना का भय सताता है साथ ही कोरोना संक्रमण के सरकारी कानून कायदों से भी लोग बंधे हुए है। घर के बाहर सब्जी बेचने वाले आलू, प्याज और टमाटर जैसी रोजमर्रा की चीजें काफी महंगे भावों में बेच रहे है तो दालें भी हमारे से दूर होती जा रही है। लगता है सरकार का इन पर कोई अंकुश नहीं है। दालें महँगी होने के साथ मिलावटी भी देखी जा रही है।
हमारे जीवन में दालों का बहुत महत्त्व है। अमूमन प्रत्येक घर में रोजाना दाल बनती है। जिसे बच्चे से बुजुर्ग तक बड़े चाव से सेवन करते है। लंच हो या फिर रात का डिनर। दाल के बिना खाना कुछ अधूरा सा लगता है और दाल में भी मूंग, उड़द, अरहर और मसूर की दाल को सबसे पौष्टिक माना जाता है। दाल के अनेक फायदे हैं। दालों के भाव निरंतर बढ़ते ही जा रहे है। महंगाई सरकार के काबू में नहीं है। सब्जियों के साथ दालें भी थाली से दूर होती जा रही है।
दाल को स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। चिकित्सकों के अनुसार छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और विभिन्न बीमारियों के दौरान मरीजों को दाल का पानी पीने की सलाह दी जाती है। दाल महँगी तो हो ही रही है मगर मिलावट का तड़का भी देखा जा सकता है। अगर आप दालों की चमक दमक देखकर खरीद करते हैं तो सावधान हो जाइए। ये दाल आपकी सेहत को खराब नहीं बहुत खराब कर सकती हैं। इसमें चमक के लिए मिनरल ऑयल की मिलावट की जाती है। खाद्य विभाग की जांच में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। दाल को पौष्टिक आहार माना जाता है, लेकिन जब ये पौष्टिक आहार ही आपकी सेहत बिगाड़ने लगे तो सोचिए क्या होगा।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

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