क्या एलजेपी के दांव ने एनडीए को पहुंचाया नुकसान, जानें क्या कहता है एग्जिट पोल का गणित?

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2020 का तीन चरणों का महासंग्राम खत्म हो चुका है। अब जो एग्जिट पोल के सर्वे आ रहे हैं उसमें कोई महागठंबंधन को सत्ता में पहुंचा रहा है तो कोई एनडीए को। अब सत्ता में कौन आएगा इसका फैसला 10 को नतीजे आने के बाद ही होगा। इस सर्वे पर अधिकतर लोगों की नजरें एनडीए के साथी रहे एलजेपी के प्रदर्शन पर नजर थी और सर्वे के मुताबिक एलजेपी तो फिसड्डी साबित तो हुई ही साथ ही उसने एनडीए का भी गुणा गणित बिगाड़ कर रख दिया। खासकर एलजेपी ने जदयू को तगड़ी चोट दी है।
एलजेपी को विभिन्न सर्वे में 1 से 10 सीट मिलने की संभावना
दरअसल एग्जिट पोल के मुताबिक एनडीए से अलग होकर लड़ने वाली पार्टी एलजेपी को विभिन्न सर्वे में 1 से 10 सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है। एग्जिट पोल के दावे के मुताबिक एलजेपी ने अलग लड़ने के दांव ने बिहार में एनडीए को नुकसान पहुंचाया है। बिहार एग्जिट पोल 2020 सर्वे में Times Now-CVoter ने 01 सीट दिखाया है तो वहीं NewsX-DVResearch ने एलजेपी को 04-10 सीट दिखाया है। News 18-Today’s Chanakya ने एलजेपी को एक भी सीट नहीं दिखाया है वहीं India Today-Axis My India ने अपने सर्वे में एलजेपी को 03-05 सीट मिलने का अनुमान लगाया है।
एनडीए बिहार की सत्ता से दूर
सर्वे के मुताबिक एनडीए बिहार की सत्ता से दूर दिखाई दे रही है। बिहार में मनमाफिक सीट नहीं मिलने के बाद एनडीए से अलग होकर लड़ने वाली एलजेपी ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। चिराग ने बिहार चुनाव में 135 सीटों पर लड़ने की घोषणा के साथ ही जदयू कैंडिडेट के खिलाफ भी अपने उम्मीदवार खड़े करने की घोषणा की। हालांकि लोजपा ने भागलपुर, रोसड़ा राघोपुर, नरकटियागंज गोविदंगज और लालगंज सीट पर भाजपा से दोस्ताना लड़ाई भी लड़ी। एलजेपी ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा करते हुए अधिकतर भाजपा के बागी उम्मीदवारों को टिकट दिया। इससे वोटरों के मन में भी उहापोह की स्थिति बनी। एलजेपी के नीतीश सरकार पर हमलावर होने का जहां एनडीए को नुकसान पहुंचा वहीं इसका फायदा तेजस्वी को मिला। जानकारों के मुताबिक शुरू से ही एलजेपी की दलित जाति पासवान पर पकड़ मानी जाती है। ये उसका आधार वोट भी है। इसके अलावा एलजेपी का महादलित वोटरों पर भी कुछ पकड़ है। लेकिन एनडीए से अलग होने के बाद इस वोट बैंक में बिखराव हो गया जिसका खामियाजा एनडीए को भुगतना पड़ा।
बिहार एग्जिट पोल 2020 के मुताबिक Times Now-CVoter ने बिहार विधानसभा की कुल सीटों 243 में से जेडीयू+ 116 तो आरजेडी+ को 120 और अन्य को 06 सीटें दिखाई हैं। NewsX-DVResearch ने जेडीयू+ को 110-117 तो आरजेडी+ को 108-123 और अन्य को 08-23 सीटें दिखाई हैं। News 18-Today’s Chanakya ने जेडीयू+ को 55 तो आरजेडी+ को 180 सीटें और अन्य को 08 सीटें मिलने की संभावना बताई है। वहीं India Today-Axis My India ने जेडीयू+ को 69-91 तो आरजेडी+ को 139-161 और अन्य को 06-10 सीटें दिखाई हैं।
‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट का दांव
इधर एलजेपी ने एक सर्वे कराकर ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट ‘ का सियासी दांव चला और नीतीश सरकार पर हमलावर हो गई। एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने नीतीश सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरना शुरू कर दिया। कोरोना पर नीतीश सरकार की पॉलिसी, बाढ़ और शराबंदी पर उन्होंने चिट्ठी पॉलिटिक्स शुरू कर दी। चिराग के इस कदम पर भाजपा ने खुलेआम कुछ नहीं कहा। इधर बिहार चुनाव की घोषणा होते ही एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान और जदयू के नेताओं के बीच कहासुनी तेज होने लगी। जदयू ने जहां समय पर चुनाव कराने की मांग की वहीं चिराग पासवान ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कोरोना काल में चुनाव न कराने का सुझाव दिया। चिराग के इस कदम पर एलजेपी के संस्थापक और केंद्र में मंत्री रहे उनके पिता रामविलास पासवान का भी साथ मिला। उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेस कर चिराग के हर फैसले में उनका साथ देने की बात कही।
2015 से ही शुरू हो गई थी खटपट
बिहार की राजनीति में एनडीए के घटक दल जदयू और एलजेपी एक दूसरे को पसंद नहीं करते थे। दरअसल दोनों पाटिर्यों की दलित, महादलित, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग वोटबैंक माना जाता है। 2015 के चुनाव में जहां नीतीश कुमार की अगुवाई में जदयू ने राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था वहीं एलजेपी ने भाजपा के साथ। इसके बाद आपसी खटपट के बाद जदयू ने राजद का साथ छोड़कर वापस एनडीए से जुड़कर भाजपा के मिलकर बिहार में सरकार बनाई। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक बिहार में सरकार के गठन में एलजेपी को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से ये अंदरूनी खटपट बढ़ती गई। इसके बाद एलजेपी बिहार सरकार पर धीरे-धीरे हमलावर हो गई।

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