प्राणों की रक्षा करता पंचतंत्र

भूपेश दीक्षित

सौ अक्ल सिर पर चढ़ा है, हज़ार अक्ल लटक रहा है, हे भद्र ! मैं बेचारा एकबुद्धि साफ़ पानी में खेल रहा हूँ। आचार्य विष्णु शर्मा द्वारा रचित नीतिशास्त्र ‘पंचतंत्र’ में ‘मच्छ की कथा’ में मेंढक द्वारा अपनी स्त्री को कही गयी उपरोक्त बात आज कोरोनाकाल में स्पष्ट चरितार्थ होती दिखाई दे रही है । 6 माह पूर्व विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विश्व के सभी देशों को नोवेल कोरोनोवायरस के संक्रमण से सावधान रहने सम्बंधित जब प्रथम सलाह दी गयी तब अमेरिका और यूरोप के देशों ने स्थितियों को बिना परखें हड़बड़ी में कदम उठाकर शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि नामक मच्छ के जैसा आचरण किया ।इन देशों को लगा कि वे अपनी चतुराई से नोवेल कोरोनोवायरस के संक्रमण से अपने देशवासियों को बचा लेंगे । इन देशों की सरकारों को लगा कि इनकी चतुराई, मज़बूत अर्थव्यवस्था व चिकित्सा और स्वास्थ्य तंत्र की महाशक्ति के आगे नोवेल कोरोनोवायरस अगम्य नहीं है । ये चाणक्य की तरह अपनी बुद्धि और तरह-तरह की चालें का उपयोग कर तलवार लिए हुए नन्दों को मार गिराएंगे किन्तु आज इन देशों के हालात पूरा विश्व देख रहा है । जून माह की शुरुआत तक आते-आते सोवियत राज्य अमेरिका और यूरोपियन देशों में लाखों लोग नोवेल कोरोनोवायरस के संक्रमण की चपेट में आ चुके है और इन देशों में 3.5 लाख से अधीक लोगों की मौत हो चुकी है । शिकार के बाद जिस प्रकार मछुवारे ने शतबुद्धि नामक मगरमच्छ को अपने कंधे पर और सहस्त्रबुद्धि नामक मगरमच्छ को लटका कर अपने घर की ओर चल पड़ा ठीक उसी प्रकार सोवियत राज्य अमेरिका और यूरोपियन देश नोवेल कोरोनावायरस संक्रमण के शिकार बन स्थितियों के आगे बेबस होकर मच्छ की तरह टंगे और लटके पड़े है । वहीँ इसके विपरीत विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत ने एकबुद्धि मेंढक की तरह स्थितियों को अच्छे से समझा, परखा और नोवेल कोरोनोवायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जिसकी आज संपूर्ण विश्व प्रशंसा कर रहा है । हालांकि जान-माल की हानि भारत में भी हुई है लेकिन भारत महान मराठा श्रीमंत दत्ताजीराव महाराज शिंदे के जोश भरे अंतिम शब्द “बचेंगे तो और भी लड़ेंगे” से प्रेरणा लेते हुए नोवेल कोरोनोवायरस के विरुद्ध मैदान में डटा हुआ है और नोवेल कोरोनोवायरस को हराने के लिए प्रतिबद्ध है । भारत स्थितियों को भली भाँती परखते हुए अपनी रणनीति में लगातार सुधार कर सुरक्षित कदम उठा रहा है । यही कारण है कि नोवेल कोरोनावायरस के संक्रमण फैलने के 6 माह पश्चात भी भारत एकबुद्धि मेंढक की तरह साफ़ पानी में खेल रहा है । विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं कई विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में स्थितियाँ और अधीक विकट हो सकती है, ऐसे में हमें अपने व्यव्हार में सहानुभूति, स्वास्थ्य एवं शिष्टाचार के नियमों का पूरी सजगता और सतर्कता के साथ पालन करते रहना होगा । हम सभी को बार-बार यह याद रखना है कि हमें बीमारी से लड़ना है, बीमार से नहीं । आज के समय में ‘पंचतंत्र’ सीख दे रहा है कि सरकारों और अफसरशाही को “गवैये गधे” वाले रवैये को त्यागना होगा । विपति के समय सीमित संसाधन, बुद्धि और नीति का उपयोग कर आपस में कौए, चूहे, हिरन और कछुए की तरह अपना काम सिद्ध करते हुए लोगों
की प्राणों की रक्षा कर देश को स्वावलंबी बनाने से ही सबका भला होगा ।

Post add

Leave A Reply

Your email address will not be published.