‘आत्मनिर्भर भारत’ का सारथी बनेगा ‘आत्मनिर्भर बिहार

19 लाख रोज़गार अवसर एवं 1 करोड़ गरीब महिलाओं को उध्यमशीलता से जोड़कर स्वावलंबी बनाने का संकल्प

ऋतुराज सिन्हा

‘आत्मनिर्भर बिहार’ एक नारा नहीं बल्कि भविष्य के बिहार की परिकल्पना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के सामने जिस आत्मनिर्भर भारत की सोच रखी है, उसको साकार करने के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि एक नयी ऊर्जा के साथ, उन बड़े राज्यों में पहल की जाए, जिनमें उस तरीके से विकास नहीं हो पाया, जिसका वह हकदार था। देश की ११ फ़ीसदी जनता बिहार वासी है। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत अभियान का आग़ाज़ बिहार से होना – स्वाभाविक भी है और न्यायसंगत भी। भाजपा का ‘आत्मनिर्भर बिहार – संकल्प पत्र’, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा बिहार को दी जा रही प्राथमिकता का सूचक है।

बिहार की जनता ने 45 साल, कांग्रेस शासन में सौतेला व्यवहार देखा है। राजद सरकार का भ्रष्टाचार, आतंक और जातिवाद की राजनीति के चरम सीमा को भी झेला है। सही मायने में, 2005 के बाद ही “विकास” बिहार की राजनीति के अजेंडे का केंद्र बना। और इसका परिणाम साफ़ है, 2005 में बिहार राज्य की GDP मात्र 77,000 करोड़ की थी। आज (वितीय वर्ष 20-21 अनुमानित) 6 लाख 85 हज़ार करोड़ की है। 15 वर्षों में 10 गुणा। 2005 में कृषि विकास दर 2.35% था, 2020 में 8.5% है। ग़ैर कृषि विकास दर 3.9% था, अब 12.2% है| 12% जी॰डी॰पी॰ ग्रोथ दर के साथ, बिहार आज देश का सबसे तेज़ बढ़ता हुआ राज्य है।

वादा नहीं,संकल्प पत्र है आत्मनिर्भर बिहार का रोड्मैप 

भाजपा का 2020 के विधानसभा चुनाव के लिए बना संकल्प पत्र चुनावी वायदा भर नहीं, मज़बूती के साथ बढ़ते आज के बिहार को और अधिक मजबूती देने का एक रोड मैप है। जिसे साकार करने के लिए सर्व समाज के विकास की सोच के साथ पाँच सूत्र के आधार पर तैयार किया गया है। और इन पाँच सूत्रों के अंतर्गत, 19 लाख रोज़गार स्वरोज़गार सृजन एवं 1 करोड़ गरीब महिलाओं को उध्यमशीलता से जोड़कर स्वावलंबी बनाने लिए 11 स्पष्ट प्रोग्राम निर्धारित किए गए हैं ।

पहला सूत्र – कृषि और किसान समृद्धि। बिहार में 55 फीसदी आबादी कृषि, मत्स्य एवं पशुपालन से जुड़ी है। इसलिए किसान भाइयों के एजेंडे को सर्वोपरि रखा गया है। हर खेत तक बिजली से लेकर एम॰एस॰पी॰ ख़रीद का विस्तार कर दलहन शामिल करने तक। किसान क्रेडिट कार्ड द्वारा ब्याज मुक्त ऋण से ले कर 1000 एफ़॰पी॰ओ॰ की संरचना से किसान भाइयों को तकनीकी सहयोग, बाजार पहुँच और उपज का सही दाम दिलाने तक। मतस्यजीवियों से पशुपालक भाइयों के लिए कोल्ड चैन डिवेलप्मेंट में निवेश से ले कर, डेयरी प्रॉसेसिंग में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने वाली इन्सेंटिव स्कीम तक। कृषि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की योजना सोची गयी है। लक्ष्य स्पष्ट है – किसान भाइयों की समस्याओं का निदान, बिहार को ऐग्रो सेक्टर लीडर बनाना और किसानों की आय दुगुनी करना।

दूसरा सूत्र – उद्योग का विकास, युवाओं के लिए रोज़गार एवं स्वरोज़गार के अवसर। बिहार की 60 फीसदी आबादी 35 साल के कम की है। ऐसे में बिहार के युवा को सरकारी नौकरी के साथ-साथ, निजी क्षेत्र और उद्यमशीलता के लिहाज से तैयार करने की योजनाए रखी हैं। 5 उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बनी है – फ़ूड प्रॉसेसिंग, डेयरी प्रॉडक्ट्स, फ़िशरी एक्सपोर्ट्स, IT / BPO और टुरिज़म। इन क्षेत्रों की बड़ी कम्पनियों को टार्गेट कर बिहार में निवेश को इन्सेंटिव देने की विस्तृत योजना बनाई गयी है। लक्ष्य है कि बिहार के यूवाओं को बिहार में ही रोज़गार का भरपूर अवसर मिल सकें। उद्यमशीलयता को प्रोत्साहन देने के लिए 10,000 करोड़ के MSME ऋण अनुदानित दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए 1 करोड़ बहनों को माइक्रो फ़ाइनैन्स से जोड़ कर 50,000 करोड़ के ऋण सुविधा को सुनिश्चित करने का संकल्प है।

तीसरा सूत्र – ग्रामीण विकास, व्यवस्थित शहर। बिहार में 85% फीसदी आबादी गांवों में रहती है, इसलिए गाँव तक पक्की सड़क और नाली – गली की व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए, अब हर गाँव तक सोलर लाइट, वेस्ट मैनज्मेंट, 4G हाई स्पीड इन्टरनेट पहुँचाने का प्लान सुनिश्चित किया गया है। ३० लाख गरीब परिवारी को अपना घर और हर गाँव को आस पास के गाँव से सीधे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

चौथा सूत्र – शिक्षा में गुणवत्ता पर ज़ोर। बिहार की 37 फीसदी से ज्यादा आबादी 14 वर्ष से कम की है। बिहार की आने वाली पीढ़ियाँ, बिहार ही नहीं, देश के भविष्य की अगवाई करेंगी। ऐसे में टेक्निकल एजुकेशन पर ध्यान अति आवश्यक है – सभी सरकारी स्कूलों में e लर्निंग और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था से ले कर मिडल स्कूल में कम्प्यूटर शिक्षा और प्रयोगशाला तक। और हाई स्कूल एनरोलमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए हर हाई स्कूल विद्यार्थी को मुफ़्त टैब। कोटा के तर्ज़ पर कोचिंग हब और हर ज़िले में आई॰टी॰, मेडिकल, नर्सिंग व् तकनीकी शिक्षा का विस्तार करने की योजना बनाई गयी है ।

पाँचवा सूत्र – स्वास्थ्य क्षेत्र में मॉडल राज्य बनने का बड़ा लक्ष्य। कोरोना काल में स्वास्थ्य क्षेत्र की अहमियत का अहसास पूरी दुनिया को हुआ है। ऐसे में 10,000 डॉक्टर समेत 1 लाख स्वास्थ कर्मियों की नियुक्ति से ले कर, हर बिहार वासी को निशुल्क कोरोना टीकाकरण करवाने की सोच रखी गयी है। पी॰एच॰सी॰ और ज़िला अस्पतालों के नवीनीकरण से ले कर, 6 करोड़ गरीब जनता को 5 लाख का स्वास्थ बीमा एवं जन औषधि केंद्र के माध्यम से दवाइयाँ सस्ते दरो पर उपलब्ध कराने जैसी योजना बनाने की सोच रखी है।

नीति, नीयत और नेतृत्व की विश्वसनीयता

२०२० के विधान सभा चुनाव में एक तरफ़ नीयत, नीति और नेतृत्व है – जो जाँचा परखा है। तो दूसरी तरफ़ अनुभव का अभाव, हवाबाज़ी और विश्वसनीयता की कमी। जिसने अपनी पढ़ाई १०वी से पहले छोड़ दी हो, जीवन में एक दिन भी मेहनत की कमाई अर्जित ना किया हो, कभी एक रुपये का टैक्स नहीं भरा हो, ऐसे तेजस्वी यादव, वायदे तो बहुत कर रहे हैं पर उन्होंने वायदे पूरे करने की रन्नीति पर चुप्पी साध रखी है। बात साफ़ है – उनके पास बिहार के डिवेलप्मेंट का स्पष्ट प्लान नहीं है। चुनावी मौसम में खोखले वायदों की झड़ी लगा रखी है। यह बिहार की जनता का दुर्भाग्य है और विपक्ष में नेतृत्व की शून्यता का प्रतीक।

भाजपा के आत्मनिर्भर बिहार रोड्मैप में, 2025 तक बिहार की जीडीपी को 6.5 लाख करोड़ से 13 लाख करोड़ तक ले जाने और प्रति व्यक्ति GDP को 45-47 हजार रु. से बढ़ाकर 1 लाख रु. तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य सम्भव है।

मोदी – नीतीश की जाँची-परखी टीम पर जनता का भरोसा 

भारत के संदर्भ में हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी का यह कथन- “भारत की कहानी आज मजबूत है, कल और भी मजबूत होगी।” बिहार के संदर्भ में भी सटीक है क्योंकि बिहार की स्थिति आज मजबूत है और आने वाले समय में एन॰डी॰ए॰ सरकार के संरक्षण में और भी मजबूत होगी।

((लेखक भाजपा नेता और सह संयोजक, घोषणा पत्र समिति हैं)

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