हिल स्टेशनों को टीएमयू की बड़ी सौगात

थम जाएंगे सड़क हादसे, वेलडन एफओईसीएस पेटेंट भी हुआ प्रकाशित

श्याम सुंदर भाटिया
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटीए मुरादाबाद के फैकल्टी और इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज .एफओईसीएस के दो छात्र स्वर्णिम इतिहास रचने की ओर हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के बीटेक स्टुडेंट्स. आकांक्षा सिंह और शुभम वर्मा ने ऐसी डिवाइस ईजाद की है जिससे हिल स्टेशनों पर ब्लाइंड टर्न पर होने वाले हादसे टल जाएंगे। इन्नोवेटिव इस डिवाइस में दो सेंसरों का इस्तेमाल किया गया है। उल्लेखनीय है कि  हर साल पूरी दुनिया में दुर्गम पहाड़ियों पर सड़क हादसों में लाखों लोग अपनी जान गवां देते हैं। इनके अलावा इन हादसों में अनगिनत बेजुबां एवं दुर्लभ जानवर भी शिकार हो जाते हैं। इस छात्रों ने एफओईसीएस के निदेशक प्रो आरके द्विवेदीए एचओडी डॉ गरिमा गोस्वामी, फैकल्टी डॉ पंकज गोस्वामी की मदद से ऊँची छलांग लगाई है। यह डिवाइस अब पेटेंट लेने की दौड़ में शामिल हो गई है। भारतीय बौद्धिक सम्पदा विभाग ने इस इन्नोवेटिव डिवाइस को रजिस्ट्रेशन के बाद पब्लिक डोमन में डाल दिया है। यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति  सुरेश जैन और जीवीसी  मनीष जैन ने कहा, टीएमयू पेटेंट और नए.नए शोध के प्रति संजीदा है। हमारी यूनिवर्सिटी में एक से बढ़कर एक मेधावी स्टुडेंट्स और इन्नोवेशन के प्रति समर्पित फैकल्टीज हैं। निदेशक प्रो द्विवेदी ने कहा कि  पेटेंट पब्लिकेशन के बाद एफओईसीएस की फैकल्टी और छात्रों के हौसले बुलंद हैं। यह डिवाइस हिल स्टेशनों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इस इन्नोवेटिव प्रोजेक्ट पर प्राथमिक खर्च महज पांच हजार रुपए आ रहा है।

हिल स्टेशनों पर प्रायः देखने और सुनने में आता है कि  ब्लाइंड टर्न पर तेज गति से आ रहे वाहनों के टकराने से बड़ा हादसा हो जाता है। बस या ट्रक या टूव्हीलर खाई में जा गिर जाते हैं। मौजूदा ट्रैफिक सिस्टम में किसी भी वाहन का चालक यह तय नहीं कर पाता है, कौन .सा वाहन कितनी गति और किस साइड से आ रहा है। कब और कौन.सा वाहन कर्व में आए। यू शेफ और नीचे .ऊँचे रास्ते होने के कारण चालक दूसरे छोर से आनी वाली बाधाओं को नहीं देख पाते हैं। यदि वाहन तेज गति में होते हैं तो वे अनियंत्रित हो जाते हैं या तो सामने से आ रहे वाहनों से टकरा जाते हैं या तो गहरी खाई में गिर जाते हैं। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग के दो छात्रों और प्राचार्य समेत दो फैकल्टीज ने एक ऐसी सेंसर आधारित दुर्घटना निवारण प्रणाली विकसित की है ताकि सड़क हादसे थम जाएं।

किसी भी ब्लाइंड टर्न पर 30 से शार्प टर्न पर सिगनल प्वाइंट लगा दिया जाएगा। इस पर दोनों ओर वॉर्निंग एलईडी लगी होंगीए जिनसे विपरीत दिशा से आ रहे वाहनों का पता चल जाएगा। दोनों तरफ के चालकों को मालूम हो जाएगा कि विपरीत दिशा से वाहन आ रहे हैं। वे सतर्क हो जाएंगे और अपने वाहनों की स्पीड कम कर लेंगे। और आराम से अपनी.अपनी तय मंजिल की ओर चले जाएंगेए ऐसे में अनहोनी होने का मौका न के बराबर होगा। सेंसर आधारित इस दुर्घटना निवारण प्रणाली के तहत कर्व से पहले सड़क के एक साइड में इंफ्रारेड सेंसर लगाकर और कर्व के बाद एलईडी लाइट लगाकर दो ओर से आ रहे वाहनों को चेतावनी मिल जाएगी। अगर कर्व के एक छोर से वाहन आएगा तो सेंसर सेंस और विपरीत दिशा में एलईडी लाइट ग्लो करेगी।उल्लेखनीय है कि  इस प्रणाली में दो डिवाइस काम करेंगी। इस डिवाइस के इन्नोवेशन में दो स्टुडेंट्स आकांक्षा सिंह और शुभम वर्माए एफओईसीएस के प्राचार्य प्रोण्आरके द्विवेदी बतौर सीएस जबकि इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ गरिमा गोस्वामी और डॉ पंकज गोस्वामी बतौर इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विशेषज्ञ हैं।

टीएमयू को अपने कॉलेज फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड कम्प्यूटिंग साइंसेज. एफओईसीएस पर नाज है। एफओईसीएस के प्राचार्य ध्निदेशक प्रो आर के द्विवेदी बताते हैं कि  कॉलेज को हाल ही में एक-एक लाख के दो राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं। यूं तो स्मार्ट इंडिया हैकथॉन.2020 में एफओईसीएस की तीन टीमें ग्रैंड फिनाले में पहुंची लेकिन टेकहैकर्स और टेक्नोहैकर की टीमें विजेता रही थीं। टेकहैकर्स की टीम ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया जबकि टेक्नोहैकर टीम ने बिहार के कृषि मंत्रालय की प्रॉब्लम स्टेटमेंट पर काम किया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और बिहार के कृषि मंत्रालय की ओर से दोनों विजेता टीमों को एक.एक लाख रुपए का अवार्ड मिल चुका है। टेकहैकर्स की टीम के बतौर मेंटर  आशीष विश्नोई और  रुपल गुप्ता रहे जबकि स्टुडेंट मेंबर्स में प्रेरणा जैन, पुष्पेन चौधरी, नमन गुप्ता, आर्जव जैन, मोहित जैन और सृष्टि जैन शामिल थे जबकि टेक्नोहैकर की टीम के मेंटर प्रो राकेश कुमार द्विवेदी और  राजेंद्र प्रसाद पांडे हैं जबकि स्टुडेंट मेंबर्स में आर्जव जैन, वर्णित जिंदल, अमर अग्रवाल, नैंसी जैन, कुणाल यादव और रितेश जैन शामिल थे।

इन टीमों ने भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण और कृषि विभाग बिहार सरकार के लिए एक.एक तकनीकी समस्याओं के लिए सॉफ्टवेयर डवलप किया है। भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के लिए टेकहैकर्स की टीम ने प्राधिकरण के लिए एक ऐसा सॉफ्टवेयर डवलप किया हैए जिससे कागजी कामकाज डिजिटल हो सकें। उल्लेखनीय हैं कि प्राधिकरण अपने मैंटीनेंस की रिपोर्टिंग मैनुअल करता रहा है। इस हैकथॉन की श्रेणी में टीएमयू समेत देशभर की पांच टीमों ने हिस्सा लिया था। बिहार के कृषि मंत्रालय के लिए टेक्नोहैकर की टीम ने ऐसा बहुउद्देश्यीय सॉफ्टवेयर डवलप किया है जिसमें यह सॉफ्टवेयर काश्तकारों और कृषि विशेषज्ञों के बीच सेतु का काम करेगा। इसमें खेतीबाड़ी से जुडी समस्याओं की वीडियोज अपलोड की गई हैं। सॉफ्टवेयर की खास बात यह है कि  किसान अपनी वॉयस के जरिए अपनी बात कह सकते हैं। इस सॉफ्टवेयर के मेंटर प्रो द्विवेदी ने उम्मीद जताई कि  इससे न केवल किसानों की आमदनी में इजाफा होगा और फसलों की लागत भी कम आएगी।

 

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