कोरोना में नवरात्रि व्रत के साथ सेहत का भी रखें ख्याल

बाल मुकुन्द ओझा

नवरात्रि पर्व भारत में होली-दीपावली और दशहरे जैसी धूमधाम, हर्षोल्लास और श्रद्धा से मनाया जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से लेकर 25 अक्टूबर तक रहेंगे। इस साल शारदीय नवरात्रि के दौरान तीन सर्वार्थसिद्धि योग पड़ रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि माता हर बार अलग वाहन पर सवारी कर धरती पर आती हैं। इस बार माता का आगमन घोड़े पर हो रहा है। घोड़ा युद्ध का प्रतीक माना जाता है। घोड़े पर माता का आगमन शासन और सत्ता के लिए अशुभ माना गया है। इससे सरकार को विरोध का सामना करना पड़ता है और सत्ता परिवर्तन का योग बनता है। माता की विदाई हाथी पर होने से आने वाले वर्ष में खूब वर्षा होगी। इससे अन्न का उत्पादन अच्छा होता है।
इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ेगी, जिसके कारण नवरात्र में देवी आराधना के लिए पूरे 9 दिन मिलेंगे। इन नौ दिनों तक व्रत रखे जाते हैं। पहले दिन जहां कलश स्थापना का विधान है तो आखिरी दिन कन्या पूजन किया जाता है। नवरात्रि देश का एक बहुत महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

नवरात्रि भारत के विभिन्न प्रदेशों में अलग ढंग से मनायी जाती है। गुजरात में नवरात्रि समारोह डांडिया और गरबा के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पूरी रात भर चलता है। देवी के सम्मान में भक्ति प्रदर्शन के रूप में गरबा, आरती से पहले किया जाता है और डांडिया समारोह उसके बाद। पश्चिम बंगाल में यह पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाता है। 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र का आगाज हो रहा है। इसी दिन प्रतिपदा यानी पहली तिथि में घट स्थापना होगी। इसके बाद 18 को अक्टूबर को नवरात्र का दूसरा दिन, 19 को तीसरा, 20 को चौथा, 21 को पांचवां, 22 छठा, 23 को सातवां दिन होगा। 24 तारीख को सूर्योदय के वक्त अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि रहेगी। इसलिए अगले दिन शाम के समय यानी विजय मुहूर्त में दशमी तिथि होने से 25 अक्टूबर को दशहरा पर्व होगा। नवरात्र में देवी और नवग्रहों की पूजा का एक कारण यह भी है की जीवन में खुशहाली बनी रहे।
कोरोना संक्रमण से लोगों में धार्मिक आस्था कम नहीं हो रही है। देशवासी नवरात्र मनाने की तैयारियां कर रहे है। इस अवधि में मां दुर्गा के नवरूपों की उपासना की जाती है। इसमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा अलग-अलग दिन होती है।
मातृ शक्ति के रूप में देवी जी की पूजा उपासना की भिन्न-भिन्न पद्धतियां विभिन्न रूपों में भारत में प्रचलित हैं। उनकी उपासना का सर्वश्रेष्ठ रूप सभी जगह नवरात्रियों के अवसर पर देखने को मिलता है। शारदीय नवरात्र से शीत ऋतु शुरू हो जाती है। ये ठंड और गर्मी का संधिकाल है। कोरोना के इस दौर में मौसमी बीमारियां होने की संभावनाएं भी रहती हैं। श्रद्धालु विशेषकर महिलाएं नवरात्र में व्रत रखती है। कोरोना काल में भूखा रहकर व्रत रखना स्वास्थ्य के लिए कतई अनुकूल नहीं है। कोरोना प्रभावित इन दिनों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाये रखना निहायत जरूरी है। दूध, फल, आलू , ड्राई फ्रूट सिंघाड़े और साबूदाने का आटा सेवन करने से सेहत बनी रहेगी। इससे व्रत के दौरान आपके पोषण की पूर्ति होंगी। फलों के रस का सेवन किया जा सकता है। ये हमारे शरीर के लाभदायक होते हैं। इन दिनों में देवी पूजा के साथ ही दान-पुण्य भी करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को भोजन और धन का दान करें।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं)

 

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