तमिलनाडू.भाजपा के आँगन में खुशबू की महक

संजय एम तराणेकर

दक्षिण के राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं के सहारे अपना जनाधार बढ़ाने में एक लम्बे अर्से से लगी हुई हैं। परंतु उसे वो सफलता नहीं मिल पा रही जो वह चाहती है। सबसे बड़ी बात दक्षिण के राज्यों में क्षेत्रीय दलों का वर्चस्व आज भी अपनी उपस्थिति को सुदृढ़ करने में कामयाब हैं। भाजपा के नए.नए प्रयोगों ने जहा कांग्रेस की नींद हराम कर रखी है, वहीं भाजपा जहा अपनी कमजोर उपस्थिति को दमदार बनाने के प्रयास में लगी रहती है। फिर उसकी संगठित फौज भी ऐसे लोगों की खोजबीन करती रहती हैं जिससे उसकी उपस्थिति दमदार बनी रहें और उसे मजबूती मिले। फिर चाहे वह जफर इस्लाम हो या संबित पात्रा। पर्दे के पीछे पार्टी को मजबूत बनाने में इनका जबर्दस्त योगदान रंग लाता है। अभी कुछ महीनों पहले ही चन्दन तस्कर वीरप्पन की बेटी विद्या रानी को भाजपा में लाया गया और उसे उपाध्यक्ष के पद से नवाजा गया था। हो सकता हैं कि विद्या रानी का भाजपा में सम्मान देखकर शायद अभिनेत्री खुशबू सुन्दर का मन बदल गया हो। क्योंकि उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तमिलनाडू में अच्छा.खासा आज भी है। उनकी लोकप्रियता का आलम यह हैं कि उनका रिएलिटी गेम शो काफी पॉपुलर रहा है। खुशबू के नाम पर कई चीजें भी बाजार में बिकती हैं,जैसे खुशबू इडली, खुशबू ज्वैलरी और साड़ी।

याद रहें कि खुशबू सुन्दर अस्सी के दशक में बालीवुड अभिनेत्री रह चुकी है। बतौर बाल कलाकार उन्होंने हिन्दी फिल्मों 1980 में द  बर्निंग ट्रेन में काम किया था।तेरी है जमीं, तेरा आसमा और 1982 में दर्द  का रिश्ता  में  परियों की शहजादी गीत भी याद कर सकते है। इससे आगे 1985 में सुभाष घई की मेरी जंग में जावेद जाफरी के साथ बोल  बेबी बोल, रॉक एन रोलष उनका हिट गीत है। इसके बाद इसी साल जैकी श्रॉफ के साथ वे जानू  और गोविन्दा के साथ तन बदन में मुख्य भूमिका में नजर आई। परंतु उन्हें वो सफलता नहीं मिल पाई। फिर वे दक्षिण की फिल्मों में तेलुगू में आई वेंकटेष के साथ फिल्म ष्कलयुगा पाण्डवल्लूष् की। यहॉ खुशबू ने खूब मेहनत की और अपना मुकाम बना वे एक स्थापित अभिनेत्री भी बन गई। जैसा कि विदित है दक्षिण भारत के प्रशंसक अपने सिने सितारों को भगवान की तरह मानते हैं और उनके मन्दिर भी बनवाते है। वो एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिनके फैंस ने उनके लिए मंदिर निर्माण तक करवाया है। खुशबू सुंदर की पहचान साउथ की एक मशहूर अभिनेत्री और निर्मात्री के तौर पर भी होती है। उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। खुशबू सुंदर टीवी प्रीजेंटर भी रही हैं। तमिल, मलयालम, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में उन्होंने खूब नाम कमाया। रजनीकांत, कमल हासन, नागार्जुन और वेंटकेश जैसे स्टार्स के साथ काम किया।

अभिनय में तमाम मुकाम हासिल करने के बाद 2010 में खुशबू सुंदर ने राजनीति में कदम रखा था। खुशबू सुंदर ने सबसे पहले डीएमके ;द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गमद्ध ज्वाइन की थी। उस वक्त डीएमके की कमान एमण् करुणानिधि के हाथों में थी। उन्हीं के नेतृत्व में खुशबू ने अपनी राजनीति का आगाज किया था। डीएमके से उनका मोहभंग हुआ और इसके बाद वे 2014 में कांग्रेस में शामिल हो गई। कांग्रेस नेता के बतौर वो मुखरता से अपनी बात रखती रही हैंए टीवी डिबेट्स में बड़े मसलों पर पार्टी का बचाव भी करती रही। परंतु लगातार अपनी हो रही उपेक्षा और 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए टिकट नहीं मिलने से ही वह नाराज चल रही थीं। बावजूद इसके वे लंबे अर्से तक पार्टी में बनीं रहीं। अब जबकि मई 2021 में तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ बढ़ने लगी हैं तो खुशबू सुंदर ने पाला बदल लिया है। जयललिता की रिक्तता के बाद एआईएडीएमके गुटों में बंट चुकी है। जबकि दूसरी तरफ डीएमके और कांग्रेस है। बीजेपी यहां सियासी जमीन तलाशने की पूरी कोशिश में जुटी है। खुशबू सुंदर इस प्रयास को आगे बढ़ाने में एक अहम कड़ी साबित हो सकती हैं क्योंकि वो एक बड़ा चेहरा हैं और तमिलनाडु में चेहरों की राजनीति का ही बोलबाला रहा है। इतिहास गवाह हैं कि एमजीआर से लेकर करुणानिधि और जयललिता तक कई कलाकारों ने तमिलनाडु पर शासन किया है। अब कमल हासन जैसे मशहूर अभिनेता भी राजनीति में आ गए हैं। खुशबू सुंदर की भी अपनी लोकप्रियता है। खुशबू सुंदर का कहना है.ष्भाजपा से मेरी अपेक्षा यह नहीं है कि वह मेरे लिए क्या करने जा रही हैए बल्कि देश की जनता के लिए क्या करने जा रही हैए जब 128 करोड़ लोग वास्तव में प्रधानमंत्री पर भरोसा करते हैं।

दक्षिण भारत में तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जहाँ पिछले चार दशकों से क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा है। कभी राज्य में लगभग एक छत्र राज्य करने वाली कांग्रेस पार्टी धीरे.धीरे हाशिए पर चली गई। उसका हाल ये हैं कि 2016 में उसने डीएमके के साथ गठबंधन में चुनाव लडा और उसे 6.47 प्रतिशत वोट मिले और उसने 8 सीटें जीती। वहीं बीजेपी अपने सघन प्रयासों के बाद भी पनप नहीं पाई। उसने अन्य पार्टियों के साथ मिलकर भी चुनाव लड़ा लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली। 2016 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 234 सीटों पर तमिलीसाई सौन्दराजन के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और लगभग  3 प्रतिशत वोट उसे मिले। लेकिन एक भी सीट उसे नहीं मिली। इससे पहले वह किसी न किसी छोटी पार्टी से गठबंधन में अवश्य ही लडती रहीं। लेकिन सफलता उसे कभी नहीं मिली। 2014 की मोदी लहर में भी उसने एक मोर्चा बनाया जिसमें विजयकांत की पार्टी डीएमडी के एसण् रामदौस की पीएमके और वायको की पाटी एमडीएमके के साथ गठबंधन में भाजपा ने 7 लोकसभा सीटों पर चुनाव लडा और कन्याकुमारी की लोकसभा सीट पर एचण् वसंत कुमार जीतने में कामयाब हुवे। मोर्चे को 18.5 प्रतिशत वोट मिले जिसमें से बीजेपी का वोट शेयर 5.5 प्रतिशत था। 2019 के चुनाव में एच वसंत कुमार कांग्रेस में शामिल हुवे और जीत गए। भाजपा ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। राज्य की घोर जातिवादी राजनीति में आमतौर पर सवर्णों की समझी जाने वाली भाजपा यहां पिछड़ों और अति पिछड़ों में अपनी पैठ जमाने में लगी है। जिससे उसका आधार तैयार हो। तमिलनाडू में वन्नियार समुदायए जो अति पिछड़ों की सूची में आता है। लगभग 37 प्रतिशत बताया जाता है। हालांकिए राज्य की राजनीति में दो बड़े दलों द्रमुक और अन्नाद्रमुक का ही वर्चस्व है। कई छोटे दल या तो द्रमुक के साथ होते हैं या फिर अन्नाद्रमुक के साथ। वे जब भी देखते हैं कि किस द्रमुक पार्टी के जीतने की संभावना है वे उसमें शामिल हो जाते है।

अब सवाल यह उठता हैं कि क्याघ् भाजपा अपना जनाधार खुशबू सुंदर की लोकप्रियता को देखते हुए बढ़ा पाएगी। क्योंकि इससे पहले भी भाजपा यहॉ की लोकप्रिय अभिनेत्री नमिता को भी पार्टी में शामिल करवा चुकी है। इससे भी इतर क्याघ् खुशबू को वह हासिल हो पाएगा जो वे दूसरी पार्टियों में दस साल रहकर भी न पा सकीं। क्योंकि एक दशक के राजनीतिक कॅरियर में खुशबू सुंदर का ये तीसरा सियासी ठिकाना है। वीरप्पन की बेटी विद्या रानी भी इस दौड़ में उनके साथ है। देखना है कि खुशबू सुंदर की इस लोकप्रियता का बीजेपी को कितना फायदा मिल पाता है। तमिलनाडु में बीजेपी राजनीतिक तौर पर कमजोर है और पार्टी ऐसे राज्यों में बहुत मेहनत कर रही है जहां उनकी स्वीकार्यता नहीं है। अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में भाजपा का स्पेशली फिल्मी कलाकारों पर फोकस है। खुशबू सुंदर के भाजपा में शामिल होने को इसी रणनीति का हिस्सा समझा जाना चाहिए। क्योंकि स्थानीय और क्षेत्रीय फिल्मी हस्तियों से मतों को अपने पक्ष में करने में इससे मदद मिलती है। इसका सफल प्रयोग वह पश्चिम बंगाल में कर चुकी हैं। तब कम से कम 12 सिनेमा और टेलीविजन जगत की हस्तियों ने भाजपा का दामन थामा था। भाजपा ने राज्य की 42 में 18 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। बाबुल सुप्रियो और लॉकेट चटर्जी भाजपा के टिकट से जीत हासिल करने वालों में शामिल हैं। बाबुल सुप्रियो अभी केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में खुशबू सुन्दर की इन्ट्री से क्याघ् पार्टी विधानसभा चुनाव में लाभ की स्थिति में होगी भी या नहीं, यह भविष्य के गर्भ में छुपा हैं।

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