आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को पिछले लगभग 27 सालों से साकार कर रहा है केआई,एस,एस

@ chaltefirte.com        भुवनेश्वर। विश्व का सबसे बड़ा आदिवासी आवासीय विद्यालय‘‘कीस’’ ओडिषा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थापित है। विश्व का सबसे बड़ा आदिवासी आवासीय विद्यालय कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ़  सोसल साइंसेज(केआई,एस,एस‘‘कीस’’। प्रकृति के खुले वातावरण में यह विश्व का सबसे बड़ा इकलौता आदिवासी विद्यालय ‘कीस’ वाणीक्षेत्र में भगवान जगन्नाथ के अनुपम मंदिर के साथ कुल लगभग 60 एकड़ भू-भाग पर स्थापित है। कीट-कीस द्वय डीम्ड विश्वविद्यालय के प्राणप्रतिष्ठाता हैं प्रोफेसर अच्युत सामंत जो कंधमाल लोकसभा के मान्यवर सांसद भी है। भारत के प्रधानमंत्री स्वर्गीय लालबहादुर शास्त्रीजी जैसा कद, स्वभाव और सदैव चेहरे पर मुसकराहट सदा देखने को मिलती है प्रोफेसर अच्युत सामंत के पारदर्शी व्यक्तित्व में।

अगर स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्रीजी को लोग ‘‘गुदड़ी के लाल’’ के रुप में जानते थे तो ठीक उसी प्रकार प्रोफेसर अच्युत सामंत को आदिवासी समुदाय के जीवित मसीहा के रुप में पुकारते हैं। प्रो सामंत जब मात्र चार साल के शिशु थे तभी उनके पिताजी का एक रेल दुर्घटना  असामयिक निधन हो गया। प्रो सामंत की विधवा मां ने बड़ी मुश्किल से अपने तीन-तीन बेटे-बेटियों को घोर आर्थिक संकटो में  पालपोशकर स्वावलंबी बनाईं। प्रो सामंत जब लगभग सात साल के थे तो उनके प्राथमिक स्कूल के शिक्षक ने उनका नामकरण  किया ‘‘अच्युतानन्द सामंत’’। कहते हैं कि होनहार वीरवान के होत चिकनो पात।’’ प्रो अच्युत सामंत के बचपन के कठोर आर्थिक संकटों ने उनको आज विश्व का महान शिक्षाविद् बना दिया है। उन्होंने 1992-93 में अपनी कुल जमा पूंजी मात्र पांच हजार रुपये से कीट-कीस की स्थापना की। पुरुषार्थ और भाग्य के धनी प्रो सामंत आज अपने सरल,सहज,मृदुल तथा आत्मीय पारदर्शी स्वभाव के बदौलत विश्व के लाखों युवाओं  के आदर्श बन चुके हैं। जब मैंने उनसे कोरोना संक्रमण के समय भारत के माननीय प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ की अवधारणा की बात पूछी तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने खरा स्थापित सबसे अनोखी शैक्षिक संस्था कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ़  सोसल साइंसेज(केआई,स,स, की बात बताई जिसे वे शौक और प्यार से ‘कीस’कहकर पुकारते हैं और आज तो पूरा विश्व उसे कीस के नाम से ही रुढ़ बना दिया है। प्रो सामंत ने बताया कि उनका यह संकल्प है कि वे आजीवन अविवाहित रहकर समाज के सबसे उपेक्षित समुदाय आदिवासी समुदाय के बच्चों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण के लिए समर्पित कर चुके हैं और उनका यह संकल्प आजीवन रहेगा। आज प्रो सामंत के त्याग,तपस्या,लगन, कर्मठता, उत्साह तथा उच्च मनोबल का जीवंत प्रमाण है कीस जो अब विश्व का प्रथम आदिवासी आवासीय डीम्ड विश्वविद्यालय बन चुका है। उन्होंने बताया कि जब महामना मदनमोहन मालवीय जी ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की थी उस वक्त उनको हरप्रकार का सहयोग उस समय के तात्कालीन राजा ने मिला था लेकिन प्रो अच्युत सामंत ने जब 1992-93 में कीट-कीस की स्थापना की थी उस वक्त उनको किसी प्रकार की सहायता किसी ने नहीं दी थी। आज कीट-कीस द्वय डीम्ड विश्वविद्यालय लगभग 8 किलोमीटर में अवस्थित है जिसके लिए सबकुछ प्रो अच्युत सामंत की अपनी स्व प्लानिंग और प्रबंधन कौशल का प्रतिफल है। प्रो अच्युत सामंत ने बताया कि भारत के ओजस्वी-तेजस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदीजी की आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा का वे स्वागत करते हैं। स्वदेशी केलिए ,लोकल के लिए वोकल बनने की बात को सहर्ष स्वीकार करते हैं जिसे प्रो सामंत कीस ने कीस में लगभग 27 सालों से लागू कर रखा है। कीस आदिवासी आवासीय विद्यालय में केजी कक्षा से लेकर पीजी कक्षा तक निःशुल्क पढ़नेवाले लगभग 30हजार आदिवासी बच्चे अपने नियमित पठन-पाठन के साथ अपनी इच्छानुसार वोकेशनल कौशल प्रशिक्षण के द्वारा आत्मनिर्भर बन चुके हैं। प्रो सामंत ने बताया कि किसी की संस्थापक को अपनी संस्था को आत्मनिर्भर बनाने से पूर्व अपने आपको आत्मविश्वासी बनाने की जरुरत है जैसाकि स्वयं प्रो अच्युत सामंत स्वयं हैं। सत्यनिष्ठ, आत्मविश्वासी तथा सच्चे गांधीवादी प्रो अच्युत सामंत ने बताया कि उनका पूरा जीवन आदिवासी सेवा तथा लोकसेवा हेतु समर्पित है। उनके अनुसार पहली बार कोरोना महामारी ने उनके आत्मविश्वास तथा परोपकारी व्यक्तित्व को नई ऊर्जा प्रदान कर दी है और यही कारण है कि पिछले लगभग 6 महीनों के भीतर उन्होंने अपनी ओर से ओडिशा सरकार के समर्थन से चार-चार कोविद-19 अस्पताल खोल चुके हैं। वे कोरोना योद्धाओं की लगातार हरप्रकार की सहायता कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात उनकी ओर यह देखने को मिल रही है कि उनके द्वारा स्थापित कीस के लगभग 30हजार आदिवासी बच्चों को उनके गृहगांव में प्रतिमाह उनकी ओर से बच्चों को पाठ्य-पुस्तकें तथा सूखा राशन आदि निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसी पहल पूरे भारत में असंभव प्राय है। प्रो सामंत ने बताया कि आत्मनिर्भर कीस को कारगर बनाने की दिशा में कीस के बच्चों तथा स्टाफ की ओर से कोरोना संक्रमण काल में मास्क से लेकर सेनीटाइजर आदि का उत्पादन हो रहा है जिसका प्रयोग प्रो सामंत द्वारा स्थापित कोविद-19 चार अस्पताल कर रहे हैं। कीट-कीम्स कर रहा है।सच तो यह भी है कि कोरोना संक्रमण के दौरान प्रो अच्युत सामंत ने एक तरफ जहां लाखों जरुरमंदों को राशन आदि की अपनी ओर से निःशुल्क आपूर्ति कराई है वहीं उनके द्वारा अनेक पूजको तथा साधु-संतों से लेकर सभी जरुरमंदों की सहायता की गई है। प्रो सामंत ने बताया कि यह एक अच्छी बात है कि पूरे भारतीय समाज को प्रधानमंत्रीजी ने स्वदेशी अपनाने की बात की है और प्रो सामंत उसे तो पिछले लगभग 27 सालों से कीट-कीस के लगभग 11हजार स्टाफ के साथ लागू कर चुके हैं। उनके निर्देश पर सभी स्टाफ को कीस के बच्चों द्वारा तैयार फिनायल से लेकर सेनीटाइजर आदि का ही इस्तेमाल करना जरुरी होगा। प्रो अच्युत सामंत संस्थापक कीट-कीस तथा कंधमाल लोकसभा सांसद ने यह भी बताया कि आनेवाले दिनों में कीस को और अधिक आत्मनिर्भर बनाकर भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सपनों को सबसे पहले कीस साकार करेगा। भारत की नई शिक्षा नीति 2020 का तहेदिल से स्वागत करते हुए प्रो अच्युत सामंत ने बताया कि नई शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत की नींव के पत्थर के रुप में है जो बालकों के तीसरे नेत्र के रुप में आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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