रक्षा क्षेत्र में भारत की बेटियों का बढ़ता वर्चस्व

श्यामसुन्दर जैन 

भारतीय इतिहास में प्राचीन काल से महिलाओं का हर क्षेत्र में उल्लेखनीय स्थान रहा है। महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी से निभाया है व आज भी निभाती जा रही है। उसी क्रम में राफेल जेट जैसे भारी फाइटर लड़ाकू विमान में भी महिला पायलट को स्थान मिला है। यह महिलाओं के लिए ना सिर्फ गौरव की बात है बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ओर विशिष्ट स्थान कहा जा सकता है। हालांकि अभी तक है भारत में 10 राफेल लड़ाकू विमान आए हैं और मिली जानकारी के अनुसार 10 महिला पायलट फाइटर प्रशिक्षण प्राप्त कर राफेल जेट उड़ाने की पुरजोर तैयारी कर रही है। जिसमें से एक को तो पायलट की जिम्मेवारी मिल चुकी है।
इस क्षेत्र में महिला पायलटों को पुरुषों के समान ही लड़ाकू विमानों का प्रशिक्षण पहले से ही दिया जा रहा है विषम व कठिनतम कार्य के बावजूद हमारे देश की महिला पायलट ऐसे विमानों को चलाने के लिए पारंगत हो रही है, जो कठोर प्रशिक्षण में भी से गुजरने के बाद सफल होकर महिला वर्ग में नए आयाम स्थापित कर रही है।
यहां एक उल्लेखनीय बात यह भी है कि एक विमान से दूसरे विमान में जाने के लिए कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें हमारे देश की महिलाएं सफल साबित होते हुए बखूबी प्रशिक्षित हो रही है। यद्यपि भारत सरकार ने करीब 5 साल पहले ही लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए महिलाओं के लिए मंजूरी दे दी थी, लेकिन राफेल जैसे जंगी लड़ाकू वायुयान में पायलट की जिम्मेवारी मिलना बहुत अधिक महत्वपूर्ण है। इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि भी कहा जा सकता है। भारतीय नौसेना में भी पहली बार महिला अफसरों की तैनाती नौसेना के अग्रिम मोर्चे पर तैनात लड़ाकू जहाज पर हो रही है। अभी तक दो महिला अफसरों को ही यह जिम्मेदारी आब्जर्वर के रूप में मिली है, पर यह भी निश्चित है कि आने वाले समय में अग्रिम युद्धपोतों में भी महिलाओं की नियुक्ति के रास्ते खुल जाएंगे और उनकी नियुक्ति हो सकेगी। वायु सेना के युद्धक बेड़े में हाल ही में शामिल राफेल जेट पर महिला पायलटों की तैनाती की यह पहल हमारे भारत की बेटियों को नए हौसले ही नहीं देगी बल्कि विश्व में भी विशिष्ट स्थान प्रदान कर गौरवान्वित करेगी। अभी तक नौसेना और वायु सेना में महिलाओं को ऐसी जिम्मेदारी कम ही दी जाती थी और इसमें महिलाओं के साथ अलग व्यवहार होता था। जंगी जहाजों से महिलाओं को दूर रखा जाता था मगर अब वह समय आ गया है कि हमारी बेटियां युद्ध के मोर्चे पर अग्रणी भूमिका निभाती नजर आएगी।
यहां एक बात और भी उल्लेखनीय है कि भारतीय नौसेना में महिला अफसरों की संख्या काफी है, मगर इसके बावजूद अभी तक उन्हें युद्धपोतों पर नियुक्ति अथवा जिम्मेवारी नहीं मिलती थी। महिलाओं के लिए अलग व्यवस्थाओं की आवश्यकता को देखते हुए शायद नियुक्तियों में समस्या आड़े आती थी ? अब लगता है कि आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध रहेगी और इसी के अंतर्गत नौसेना और वायु सेना में महिला अधिकारियों की यह नियुक्तियां हो रही है। इन मोर्चों पर स्त्री शक्ति के प्रवेश की नई जिम्मेदारी सूचक होगी। जिन दायित्वों को अभी तक सिर्फ पुरुष वर्ग ही निभा रहा था, उन्हें अब महिलाएं भी बखूबी निभाएगी। इस प्रकार की परिस्थितियों में आत्मनिर्भर भारत में बेटियों के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि कहा जाना अतिशयोक्ति नहीं होगा।
नौसेना और वायुसेना में हमारी बेटियां अब कार्यकुशलता, वीरता और कर्मठता के साथ नए प्रतिमान स्थापित करने जा रही है और उनका यह आत्मविश्वास काबिले तारीफ है। यद्दपि आज भी आज भी समाज के कुछ वर्ग व मूढ़मति लोग महिलाओं को पर्दे में रखने की वकालत करते हैं और जिम्मेदारियों से दूर रखने तक की बातें करते हैं। दुहाई सामाजिक और धार्मिक रस्मों की दी जाती है लेकिन अब जिस प्रकार हमारी बहनें हमारी बेटियां घूंघट से ही बाहर नहीं समाज की रूढ़ परंपराओं को भी तोड़ कर जो जिम्मेदारियां निभा रही है, उस पर दकियानूसी पुरुष प्रधान सोच वाले लोगों को गौर करना होगा। आज भी एक वर्ग महिलाओं पर एक प्रकार से पुरुषों की पहरेदारी की वकालत भी करते हैं, उन्हें राफेल जैसे लड़ाकू वायुयान चलाने वाली हमारी जांबाज़ बेटियों का पराक्रम तथा उनकी उपलब्धियों को मानना पड़ेगा। आने वाले समय और भावी पीढ़ी के लिए हमारी सशक्त बेटियां एक आदर्श ही साबित नहीं होगा बल्कि सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं समाज के समग्र वर्गों के लिए प्रेरणादायक मिसाल होगी।
(लेखक वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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