पर्यटन और ट्रैवल उद्योग का उजड़ा चमन

बाल मुकुन्द ओझा

कोरोना महामारी ने देश और दुनिया के पर्यटन का चमन उजाड़ कर रख दिया है। 27 सितम्बर को विश्व पर्यटन दिवस ऐसे समय मना रहे है जब पर्यटन और इससे जुड़े उद्योगों के करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए है और उनके समक्ष रोजी रोटी का संकट उपस्थित हो गया है। बहुत से ऐसे देश हैं, जिनकी टूरिज्म इंडस्ट्री पर बड़ी निर्भरता है। दुनिया भर में इस क्षेत्र से 33 करोड़ लोगों को नौकरियां मिलती हैं। पर्यटन स्थल लोगों की आवाजाही के अभाव में सूने पड़े है। जो कुछ सैलानी आ भी रहे है वे भी सहमे हुए है। वर्ल्ड ट्रेवल एंड टूरिज्म काउंसिल के मुताबिक मैक्सिको, स्पेन, इटली और यूरोपीय देशों सहित दुनियां के लगभग 30 ऐसे देश है जहां सबसे अधिक लोग घूमने जाते थे, वहां की टूरिज्म इंडस्ट्री पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा है। इन देशों के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा पर्यटन से आता था।
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में वहां का पर्यटन उद्योग रीढ़ की हड्डी होता है। उस क्षेत्र में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों से ही वहां के सभी उद्योग संचालित होते हैं। माहमारी के चलते भारत की टूरिज्म इंडस्ट्री को वर्ष 2020 में 1.25 ट्रिलियन के रेवेन्यू का घाटा होने वाला है। कोरोना वायरस की वजह से रेल और हवाई यातायात अभी सुचारु नहीं हुआ है। केयर रेटिंग्स के नोट्स में ऐसा कहा गया है कि अप्रैल-जून के दौरान भारतीय टूरिज्म इंडस्ट्री को 69,400 करोड़ रुपए के राजस्व के नुकसान होने की उम्मीद लग रही है, जो साल-दर-साल 30 प्रतिशत के नुकसान को दर्शाते हैं।
कोरोना ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है लेकिन होटल और टूरिजम इंडस्ट्री पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है और लगातार बढ़ रहे संक्रमण से इस इंडस्ट्री को राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। यही नहीं पर्यटन क्षेत्रों में नाच गाकर पर्यटकों को रिझाने वाले कलाकार भूखे मरने पर मजबूर हो गए है क्योंकि सरकार ने उनके लिए राहत की कोई व्यवस्था नहीं की है। जानकारी के मुताबिक कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से होटल और टूरिजम इंडस्ट्री को 1.58 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात भी सामने आ रही है। होटल और टूरिजम इंडस्ट्री देश को आर्थिक फायदा पहुंचाता है और कहा जाता है कि पूरे भारत में जितने भी लोग काम करने वाले हैं, उनका करीब 12.75 फीसदी हिस्सा होटल और टूरिजम इंडस्ट्री में लगा हुआ है।
पर्यटन मंत्रालय की 2019-20 की रिपोर्ट की माने तो पर्यटन उद्योग ने 8 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। फाइनेंशियल सर्विसेज और बिजनेस एडवाइडरी फर्म केपीएमजी की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना में हुए लॉकडाउन की वजह से अकेले टूरिजम और होटल इंडस्ट्री की करीब 70 फीसदी नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। आंकड़ों में इनकी संख्या करीब 3 करोड़ 80 लाख तक है।
वर्ल्ड ट्रेवल एंड टूरिजम काउंसिल के मुताबिक भारत में फिलहाल ट्रेवल और टूरिजम सेक्टर में करीब 90 लाख नौकरियों पर ज्यादा खतरा है और अगर कोरोना संक्रमण आगे बढ़ा या फिर ट्रैवल पर किसी तरह की रोक लगी रही तो राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी बढ़ जाएगी। इसकी वजह ये है कि देश की वर्क फोर्स का करीब 12.75 फीसदी हिस्सा अकेले होटल और टूरिजम इंडस्ट्री में काम करता है। इसमें भी 5.56 फीसदी लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिला है, जबकि 7.19 फीसदी लोग अप्रत्यक्ष तौर पर इस धंधे से जुड़े हैं। पर्यटन मंत्रालय की 2019-20 की रिपोर्ट कहती है कि पर्यटन उद्योग ने 8 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को रोजगार दे रखा है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के मुताबिक कोरोना के बाद हुए लॉकडाउन की वजह से बड़े होटल समूहों को करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। ऑनलाइन ट्रेवल एजेंसियों को करीब 4,312 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। टूर ऑपरेटर्स को करीब 25,000 करोड़, एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स को करीब 19,000 करोड़ और क्रूज टूरिजम को करीब 419 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

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