निर्दलीय प्रत्याशी संजय कुमार सिंह का जन संवाद कार्यक्रम आज पानापुर प्रखंड के लागुनी गांव में पहुंचा

तरैया।तरैया विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी संजय कुमार सिंह का जन संवाद कार्यक्रम आज पानापुर प्रखंड के लागुनी गांव में पहुंचा जहां उन्होंने युवाओं से सीधा संवाद स्थापित किया अपने खुद के चुनाव लड़ने के मकसदो के बारे में लोगों को बताया तथा कहा कि वे नेता बनने नहीं बेटा बनने आए उन्होंने साफ किया कि वह एक जन प्रतिनिधि बनकर तरैया को मॉडल विधानसभा के रूप में स्थापित करना चाहते हैं अपने स्तर से स्थानीय स्तर पर ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार देना चाहते हैं क्षेत्र में सड़क बिजली पानी शिक्षा स्वास्थ्य स्तर को दुरुस्त करना चाहते हैं.श्री सिंह ने कहा कि, सियासी दलों के एजेण्डे में जनता और उसके मुद्दे गायब होते हैं। सियासी दल सच्चे झूठे वादों के साथ सिर्फ सरकार बनाने के लिए फोकस रहती है जबकि चुनाव जीतने के बाद जनता के मुद्दे हाशिये पर चले जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज़ादी के बाद से ही लगातार चुनाव होने के बावजूद बिहार विकसित राज्य होने का दावा नहीं कर पा रहा और लगातार अपने पिछड़े राज्य होने का रोना रोता रहा है जबकि सरकार हर तरह के संसाधनों के लैस है। दिखाने और बताने को तो इनके पास योजनाओं की लंबी फेहरिस्त है लेकिन ज़मीन पर काम नदारद है। दरअसल, जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को लेकर यह पूरी तरह उदासीन है नतीजा आपके और हमारे सामने है।

संजय कुमार सिंह जी ने कहा कि वह जनता की तरफ से चुनाव लड़ रहे हैं। और, इसके लिए जनता ही उन्हें आर्थिक मदद कर रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी का उदाहरण देते हुए कहा कि सन 1977 के चुनावों में जनता ने चुनाव लड़ा था। उस वक़्त चंद्रशेखर जी की जब कोई चुनावी सभा होती थी तो एक आदमी चादर लेकर घूम जाता था और 10-15 लाख रुपए इकट्ठा हो जाते थे। उन्होंने मालवीय जी का जिक्र करते हुए कहा कि जनता के सहयोग से बना बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी आज बेहतरीन शिक्षा देने के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा, शुचिता पूर्ण राजनीति के लिए जनभागीदारी के साथ चुनाव लड़ने का मन बनाया है।

उन्होंने कहा, बिहार ने देश को कई नेतृत्व दिया है और स्वयं भी कई आंदोलनों की जननी रही है। आप जेपी आंदोलन को नहीं भूल सकते। पटना से शुरू हुआ आंदोलन देश की सियासत के लिए भी निर्णायक रहा है। जेपी आन्दोलन का ज़िक्र इसलिए क्योंकि मौजूदा चुनाव निर्णायक होगा विशेषकर तरैया विधानसभा सीट इतिहास रचेगा। शुचितापूर्ण राजनीति से कैसे चुनाव जीतते हैं और साफ मन से विकास कैसे होता है यह आने वाले दिनों में तरैया में आपको देखने को मिलेगा।

संजय कुमार सिंह ने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था को कटघरे में लेते हुए कहा कि स्थिति यह हो गयी है कि चुनाव पूरी तरह इन्वेस्टमेंट आधारित हो गयी है। अब लोग सेवा नहीं बल्कि अपने इन्वेस्टमेंट के आधार पर जीत का दावा करते हैं। कोई दो करोड़, कोई तीन करोड़ तो कोई दस करोड़ खर्च कर विधायक बनना चाहता है। उन्हें जनता की सेवा अथवा क्षेत्र के विकास से कोई मतलब नहीं है। वह बस जीतने के बाद अपना इन्वेस्टमेंट सही गलत तरीके से निकालने पर आ जाते हैं नतीजा भ्रष्टाचार, जमीनों पर कब्ज़ा, रंगदारी। चूंकि मुझे सेवा करनी है इसलिए मैं जनता के पैसों से ही चुनाव लड़ूंगा। 10, 20, 50, 100, 500 रुपयों की छोटी छोटी मदद से चुनावी खर्चे मैनेज होंगे। उन्होंने कहा कि जनता अपने पैसों से मुझे चुनाव लड़ाएगी तो पूरे हक़ से मेरा कॉलर पकड़ कर मुझसे सवाल पूछ सकेगी और मैं अपने जिम्मेदारी और जवाबदेही से मुंह नहीं मोड़ पाऊंगा। नैतिक तौर पर भी मैं क्षेत्र के विकास के लिए बाध्य रहूंगा। शुचिता पूर्ण राजनीति का यह सबसे सही रास्ता है और इसी रास्ते पर चलकर मैं तरैया विधानसभा क्षेत्र को विकास के उच्चतम स्तर पर ले जाऊंगा।

संजय सिंह ने जनसभा के दौरान कहा कि कई लोग पूछते हैं कि तीन महीने पूर्व क्षेत्र में आकर आप जीत के प्रति कैसे आश्वस्त हैं जबकि कई प्रत्याशी दो वर्ष पूर्व से ही चुनावी रंगत में रंग चुके हैं? अरे भाई मेरा एजेण्डा सियासी नहीं है और न ही मैंने राजनीति को करियर के दृष्टिकोण से देखा है। मेरा हैदराबाद में सफल व्यापार है और चूंकि तरैया मेरी जन्मभूमि है और मैं यहां का विकास करना चाहता हूं इसलिए मैं तीन महीने पूर्व आकर सेवा के उद्देश्य से अपनी भूमिका सुनिश्चित करना चाहता हूं। मेरा एकमात्र और अंतिम लक्ष्य अपनी जन्मभूमि का सम्पूर्ण विकास करना है। और सवाल यह नहीं कि तीन महीने पूर्व आया सवाल यह है कि किन उद्देश्यों को लेकर आया और उसकी पूर्ति के लिए मेरे पास ब्लू प्रिंट क्या है। आप यकीन मानें मेरे चुनाव जीतने के बाद आप तरैया को बिहार के अन्य विधानसभा सीटों से ज्यादा विकसित और बेहतर पाएंगे यह मैं भरोसे के साथ कह रहा हूँ।

जो तीस महीने से आपके चक्कर काट रहे हैं उन्हें भूल जाइए क्योंकि ऐसे लोग राजनीति के मगरमच्छ हैं आपके लिए आने वाली सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को घोंट जाएंगे। आपको इस बार विकास के बारे में सोचना है, अपने रोजगार के बारे में सोचना है इसलिए सियासी ठगों के मायाजाल में न फंसिए। वो लंबी लंबी गाड़ी से आएंगे और आपको बेवकूफ बनाने के बाद गायब हो जाएंगे।

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