बागवानी से खुलेंगी रोजगार की राह

फसलों की आधुनिक खेती-पुस्तक परिचय

बाल मुकुंद ओझा

बागवानी पौधों की खेती है । यह फलों, वनस्पतियों,सब्जियों, फूलों, गिरीदार फलों, मसालों और सजावटी पौधों के उत्पादन से संबंधित है। कार्बनिक उत्पाद, सजावटी फूलों और उपहार में दिए जाने वाले पौधों की मांग के साथ बागवानी क्षेत्र लाभप्रद एवं आकर्षक कॅरिअर के विकल्प के रूप में उभर रहा है। बागवानी पर आधारित लेखक सत्य नारायण चौधरी की नवीनतम पुस्तक फसलों की आधुनिक खेती में सब्जियों, फलों और मसालों के उत्पादन पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया है और आशा व्यक्त की गई है की इससे कृषि जन्य कार्यों को क्रान्तिकारी दिशा मिलेगी जिससे किसान अधिक आमदनी प्राप्त करने के साथ गुणवत्तापूर्ण फसल हासिल कर पायेगा। वाङ्गमय प्रकाशन जयपुर द्वारा प्रकाशित पांच सौ रूपये मूल्य की 352 पृष्ठों की इस पुस्तक में लेखक ने बागवानी उत्पादन के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभवों के माध्यम से गागर में सागर भरने का अनूठा और धरातलीय प्रयोग किया है।
प्रस्तुत पुस्तक में बेहतर बीजों का प्रयोग, उचित सिंचाई तथा खादों के प्रयोग से पौधों को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों की आपूर्ति व कीटनाशकों के प्रयोग से पौधों को लगने वाली बीमारियों व कीटाणुओं के नियंत्रण सहित बागवानी उत्पादन के लक्ष्य प्राप्त करने की वैज्ञानिक विधियों की सांगोपांग जानकारी दी गयी है। भारत में परंपरागत खेती के साथ मौजूदा समय में बागवानी खेती पर जोर दिया जा रहा है ताकि कम समय, कम पानी और कम भूमि में फसलों का उत्पादन कर अधिक से अधिक आमदनी प्राप्त की जाये। लेखक वर्तमान में इंटरनेशनल हार्टिकल्चर इन्नोवेशन एंड ट्रेनिंग सेंटर, दुर्गापुर जयपुर में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है। कृषि विषयक अनेक पुस्तकों के रचियता है और इस क्षेत्र के ख्यातनाम हस्ताक्षर है। पुस्तक को छह खण्डों में विभाजित कर प्रत्येक खंड में हरित गृह प्रबंधन, सब्जियों,फसलों, मसालों, मशरूम की खेती और औषधीय फसलों तथा फूलों की खेती शीर्षकों से उपयोगी जानकारी चित्रों के माध्यम से समाहित की गयी है। कूल 57 आलेखों में प्रत्येक में हर फसल की भूमि, जलवायु,बीज बुवाई, खाद सिंचाई, उन्नत किस्में पौध संरक्षण, कटाई, उपज आदि की उपयोगी और आधोपान्त जानकारी दी गयी है।
आज आवश्यकता इस बात की है की सत्यनारायण चौधरी जैसे कृषि लेखकों के गहन अध्ययन और अनुभवों को सूझ बूझ के साथ आगे बढ़ाया जाये और इस क्षेत्र की उपयोगी पुस्तकों को कॉलेज और विश्व विधालयों में पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाया जाये ताकि प्रारम्भ से ही हम फसलों की आधुनिक खेती से लाभान्वित हो सके। लेखक सत्यनारायण चौधरी बधाई के पात्र है जिन्होंने ऐसे विषय पर कलम चलायी जो हमारी आधी आबादी के रोजी रोटी का मुख्य श्रौत है। सरल और सहज भाषा में लिखी यह पुस्तक खेत खलिहान से जुड़े लोगों विशेषकर कृषि छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगी। साथ ही वाङ्गमय प्रकाशन जयपुर को भी बधाई दी जानी चाहिए जिन्होंने आधुनिक खेती सम्बन्धी पुस्तक के प्रकाशन का साहसिक बीड़ा उठाया।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार और पत्रकार हैं)

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