सेहत का दुश्मन है फास्ट फूड

बाल मुकुन्द ओझा

कोरोना संक्रमण ने एक बार फिर अपनी रफ्तार तेज करदी है। स्कूलें बंद है और बच्चे घर में ही धमाचौकड़ी मचा रहे है। बाजार खुलने के साथ ही जंक फूड की याद सताने लगी है। बहुत से अभिभावकों ने अपने बच्चों को खुश रखने लिए फिर जंक या फास्ट फूड का सहारा फिर ले लिया है। बच्चों के साथ बड़ों का नाश्ता भी फास्ट फूड हो गया है। ऐसे में शारीरिक गतिविधियां बाधित होने से फास्ट फूड उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। एक सर्वे रिपोर्ट में बताया गया था की जंक फूड के कारण हर आयु वर्ग के लोगों को मोटापा ने अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। अब बाजार की हलचल बढ़ने से फास्ट फूड का चलन भी बढ़ गया है जो निश्चित ही बच्चों से बड़ों तक की सेहत के लिए माकूल नहीं है।
जंक अथवा फास्ट फूड आज घर घर में अल्पाहार के रूप में प्रयोग में लिए जा रहे है। जंक फूड चिप्स, कैंडी, शीतल पेय, नूडल्स, सैंडविच, फ्रेंच फ्राइज, पास्ता, क्रिस्प्स, चॉकलेट, मिठाइयाँ, हॉट डॉग जैसे पदार्थों को कहा जाता है। बर्गर, पिज्जा जैसे तले-भुने फास्ट फूड भी जंक फूड की श्रेणी में आती है। जाइरो, तको, फिश और चिप्स जैसे शास्त्रीय भोजनों को भी जंक फूड मानते हैं। जंकफूड में कार्बोहाइड्रेट,वसा और शर्करा होती है। इसमें अधिकतर तलकर बनाए जाने वाले व्यंजनों में पिज्जा, बर्गर, फ्रैंकी, चिप्स, चॉकलेट, पेटीज मुख्य रूप से शामिल हैं।
तीव्र गति से बढ़ते शहरीकरण, व्यस्त जीवन-शैली और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे बदलाव ने भारत में लोगों के जीवन-यापन के तरीके को बदल कर रख दिया है। इन बदलावों के फलस्वरूप लोगों ने घर पर खाना पकाने और खाने की आदत में भी बदलाव किया है। महानगरों में में रहने वाले परिवारों की तैयार भोजन , फास्ट फूड और जंक फूड पर निर्भरता ज्यादा ही बढ़ गई है। अब तो इनकी पहुँच घर घर में हो गई है। यह बच्चों के प्रिय नाश्ते में शुमार हो गया है। देखा तो यह गया है पूरा परिवार अल्पाहार में फास्ट फूड का उपयोग करने लगा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद् के अनुसार फास्ट फूड वे खाद्य पदार्थ होते हैं जो पहले से बने होते हैं या मिनटों के अंदर तैयार किये जाते हैं जैसे कि नूडल, बर्गर, फ्राइड फिश, मिल्क शेक, चिप्स, सलाद, पिज्जा, सैंडविच आदि। भारत में रेस्टोरेंट का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन फूड डिलिवरी वेबसाइट जैसे जोमैटो और स्विगी के कारण ऑनलाइन आने वाले ऑर्डरों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। अच्छा और स्वादिष्ट खाना हर किसी की जरूरत है इसलिए पिछले कुछ सालों में फास्ट फूड रेस्टोरेंट की इंडस्ट्री काफी मुनाफे में चल रही है।
आज फास्ट फूड का क्रेज इतना ज्यादा हो गया हैं की घर पर बनने वाली कोई भी वस्तु पसंद नहीं आती हैं। भारत आज रेडीमेड फूड के पूरे कब्जे में है। एक सर्वे के अनुसार, 33.66 फीसदी भारतीयों ने स्वीकारा है कि वे हफ्ते में कम से कम दो बार जंक फूड खाते ही खाते हैं। भारत में भी रेडीमेड फूड का उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसकी वार्षिक प्रगति दर 40 फीसदी बताई जाती है। हॉर्ट्न्स, टाको बैल, चिपोल और बर्गर किंग हजारों मिलियन डॉलर का फास्ट फूड परोस देते हैं।
भारत के आहार विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं फास्ट फूड कभी-कभार तो ठीक है लेकिन इनका ज्यादा इस्तेमाल सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इन विदेशी उत्पादों के सेवन से बच्चे जल्दी बीमार हो जाते हैं। हमने खुद अपनी सेहत से खिलवाड़ किया है। स्वाद के पीछे के जहरीले रसायन को पहचान कर हमें अपने स्वास्थ्य की रक्षा करनी होगी, इसी में हम सबकी भलाई है।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार व पत्रकार हैं)

 

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