ऐसे मुस्लिम तो गद्दार ही हैं !

विष्णुगुप्त

देश में पहले मुस्लिम समुदाय द्वारा क्रिकेट मैचों में भारत के हारने और पाकिस्तान के जीतने पर मिठाइयां बांटना, बम-पठाखे छोड़ना तथा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने जैसी घटनाएं होती थी। इन सभी घटनाओं में पाकिस्तान के प्रति प्यार और भारत के प्रति नफरत व्यक्त किया जाता था। लेकिन अब इससे आगे बढकर मुस्लिम समुदाय द्वारा पाकिस्तान परस्ती दिखायी जा रही है। खास कर शिक्षा जगत में पाकिस्तान परस्ती खतरनाक ढंग से परोसी जा रही है, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि पाकिस्तान परस्ती ग्रहण नहीं करने पर खतरनाक परिणाम भुगतने के लिए धमकियां दिखायी जाती हैं, प्रोपगंडा कर छवि बिगाडने का भय दिखाया जाता है। शिक्षा जगत में सिर्फ मुस्लिम शिक्षकों ही नहीं बल्कि मुस्लिम छात्रों की पाकिस्तान परस्ती, मजहबी अंधेरगर्दी और आतंकवादी मानसिकताएं उत्पन्न करना एक जिहाद का रूप धारण करते जा रहा है।
पाकिस्तान परस्ती को अस्वीकार करने, इस्लाम के प्रति सहचर होने से इनकार करने, मजहबी अंधेरगर्दी-आतंकवादी मानसिकताओं के साथ नहीं जुड़ने पर गैर मुस्लिम छात्रों और छात्राओं का जीवन बरबाद करने की सरेआम कोशिश होती है, इसके लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाये जाते हैं। सरकारी स्कूलों-कालेजो के इस्लामीकरण करने की सरेआम करतूतें होती हैं। सरकारी स्कूलो के हिन्दी-अंग्रेजी नाम को बदल कर मजहबी-इस्लामिक नाम रखने के लिए दबाव बनाया जाता है। कई सरकारी स्कूलों के हिन्दी और अंग्रेजी नाम सरेआम बदलकर मजहबी-इस्लामिक नाम भी रख दिये गये, स्कूल भवन को इस्लामिक रंग में रंग दिये गये। जहां पर अधिकतर बच्चे मुस्लिम होते हैं वहां पर पाकिस्तान परस्ती जमकर चलती है, पाकिस्तान हमारा अपना देश है, इस्लाम सबसे प्यारा धर्म है, आदि सरेआम पढाया जाता है। देश विरोधी ये करतूतें अब कोई एक-दो जगह नहीं बल्कि देश में कई जगहों पर देखी जा रही है। इन मुस्लिम समुदाय को कानून और संविधान का भी डर नहीं होता है। राजनीतिक पार्टियां इनकी ऐसी राष्ट्रविरोधी करतूतो पर संरक्षण देती है, पर्दा डालती हैं।
उदाहरण देख-देख कर राष्ट्रभक्त आश्चर्यचकित हो सकते हैं और सोचने के लिए बाध्य हो सकते हैं कि ये देश के नागरिक नहीं हैं बल्कि दुश्मन देश के हितैषी हैं, खाते देश के हैं, देश के संसाधनों पर विकास करते हैं पर देशभक्ति दिखाने की जगह देशद्रोही करतूत को अंजाम देते हैं, क्या ऐसे लोगों को देश में रहना खतरनाक नहीं हैं, क्या इन्हें देशद्रोही नहीं कहा जाना चाहिए? आखिर देश की राजनीतिक पार्टियां इन देशद्रोहियों को कब तक पालती रहेगी, कब तक इनकी देश द्रोही करतूतों पर संरक्षक की भूमिका निभाती रहेगी, क्या ऐेसे लोगों को देशभक्ति का पाठ नहीं पढाया जाना चाहिए? सच तो यह है कि मुस्लिम समुदाय की पाकिस्तान परस्ती की जब भी बातें आती है, मुस्लिम समुदाय द्वारा शिक्षा जगत में जब भी सरेआम इस्लाम को थोपने की बातें आती है, मुस्लिम युवकों द्वारा जब भी पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाये जाने की बातें सामने आती है तब एक तरह से उदासीनता पसार दिया जाता है, इन सभी राष्टद्रोही करतूतों पर कोई राजनीतिक चर्चा तक नहीं होती है, इन्हें कोई राजनीतिक सबक नहीं दिया जाता है। पुलिस अगर कोई मुकदमा दर्ज करती है तो भी उन मुस्लिम गद्दारों का कुछ नहीं बिगड़ पाता है। पुलिस पर राजनीतिक दबाव हावी हो जाता है। पुलिस जांच में उदासीन बरत लेती है। इस प्रकार मुस्लिम देशद्र्रोही कानून की सजा पाने से सरेआम बच जाते हैं।
लॉकडाउन में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के एक स्कूल में एक मुस्लिम क्षिक्षिका ने सरेआम पाकिस्तान परस्ती दिखायी, पाकिस्तान के पक्ष में खडी हो गयी, उसने सरेआम बच्चों से कहा कि पाकिस्तान हमारा अपना देश है, पाकिस्तान एक प्यारा देश है, पाकिस्तान आर्मी का जवान राशिद मिन्हास हमारा आईकॉन है। उस मुस्लिम शिक्षिका का नाम शादाब खान है। उसने बच्चो को पाकिस्तान हमारा प्यारा देश पर एक लेख लिखने के लिए कहा और प्रजेंट टेन्स का उदाहरण पाकिस्तानी सैनिक जवान राशिद मिन्हास के रूप में देने को कहा। बच्चे डर कर अपनी शिक्षिका शादाब खानम के खिलाफ नहीं बोल सके। पर यह करतूत उड़ती हुई कई अभिभावकों तक पहुंच गयी। अभिभावको के पास यह करतूत जब पहुंची तो अभिभावकों के पैरों के नीचे जमीन खिसक गयी। उन्हें यह मालूम हो गया कि उनके बच्चों को पाकिस्तान प्रेम सिखाया जा रहा है, धीरे-घीरे उन्हें मुस्लिम बनाया जा रहा है। अभिभावकों ने साहस दिखाया। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठायी। लॉकडाउन के कारण स्कूल प्रबंधन को भी ऐसी जानकारी नहीं थी कि उनकी क्षिक्षिका इस तरह की जिहाद में लगी हुई है और उनकी शिक्षिका की मानसिकताएं पाकिस्तान और जिहाद से जुडी हुई है। स्कूल प्रबंधन ने जब नोटिस जारी किया तब वह मुस्लिम शिक्षिका चोरी और सीनाजोरी पर उतर आयी।
झारखंड की सिहभूम की एक स्कूल की घटना तो और भी लोमहर्षक है। यह लोमहर्षक घटना पूर्वी सिंहभुम संत नंदलाल विद्यामंदिर स्कूल की है। शमा परवीन नाम की एक मुस्लिम शिक्षिका ने प्रथम क्लास के बच्चों को पाकिस्तान का राष्ट्रगान याद करने का टास्क दे दिया। यूटयूब का लिंक भी मोबाइल पर भेज दिया गया। प्रथम क्लास के बच्चे जब यूटयूब के लिंक के ऑपन कर पाकिस्तान के राष्ट्रगीत को याद करने लगे तब अभिभावकों को यह करतूत मालूम हुई। अभिभावकों के विरोध को शांत करने के लिए स्कूल प्रबंधन कह दिया कि जनरल नॉलेज बढाने के लिए यह टास्क दिया गया था। जबकि बच्चों का यह आरोप था कि वह मुस्लिम शिक्षिका स्कूल क्लास में सरेआम इस्लाम को सबसे प्यारा मजहब बताती है और बच्चो को मुस्लिम बनने की सलाह देती है। बच्चे डर के कारण मुंह नहीं खोलते हैं। इस घटना पर राजनीतिक बवाल भी हुआ था। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने जांच भी बैठायी थी पर झारखंड की मुस्लिम परस्त सरकार ने कोई कारगर कारवाई नहीं होने दी।
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में चार सरकारी स्कूलों को सरेआम मजहबी-इस्लामिक स्कूल में तब्दील कर दिया गया। हिन्दी की जगह उर्दू स्कूल बना दिया गया। सरकारी प्राइमरी स्कूल का नाम बदल कर इस्लामियां प्राइमरी स्कूल कर दिया गया। इस तरह चार सरकारी प्राइमरी स्कूलो को निशाना बनाया गया। स्कूल भवनों को इस्लामिक रंग में रंग दिया गया। इन स्कूलों में हिन्दी पढने वाले बच्चों को डरा-धमका कर स्कूल छोडने के लिए बाध्य किया गया। स्कूल का प्रिंसपल खुर्शीद आलम बच्चों को पाकिस्तान परस्ती और इस्लाम की शिक्षा देता था। जब किसी ने विरोध करने की कोशिश की तो फिर विरोध करने वालों को मुख्तार अंसारी-अतीक अंसारी और अफजल अंसारी जैसें मुस्लिम गुडों से मरवाने की धमकियां मिली। उत्तर प्रदेश के खास क्षेत्र में इन मुस्लिम गुंडों की राज किस प्रकार से चलता है, यह भी उल्लेखनीय है। जब हिन्दी प्राइमरी स्कूलों को इस्लामिक स्कूल में तब्दील किया गया था तब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और मायावती की सरकार होती थी। अखिलेश यादव और मायावती की सरकार में मुस्लिम हिंसा और गद्दारी का विरोध करने का अर्थ जान देना होता था। योगी आदित्यनाथ की सरकार जब आयी तब गुमनाम शिकायत पर जांच हुई फिर यह देशद्रोही करतूत की पोल खुली। फिर पाकिस्तान परस्ती और इस्लामीकरण करने वाले खुर्शीद आलम आदि के गिरोह पर सबक कारी कार्रवाई नहीं हुई।
एक खतरनाक जिहाद पर चर्चा जरूरी है। सरकारी स्कूलों ही नहीं बल्कि प्राइवेट स्कूलों में मुस्लिम संगठन और जिहादी समूह इस्लामिक मानसिकता फैलाने की करतूत में सक्रिय है। एक मामला ईसाई स्कूल से जुडा हुआ हैं। बाराबंकी के आनन्द भवन स्कूल में एक मुस्लिम छात्रा अचानक पाकिस्तान का गीत गाने लगी, इस्लामिक जिहाद की बाते करती थी। उसकी शिकायत भी हुई। एक दिन वह मुस्लिम छात्रा स्कूल में बुर्का पहन कर आ गयी और कही कि यह मेरा मजहबी अधिकार है। चूंकि स्कूल ईसाई प्रबंधन का था। इसलिए स्कूल प्रबंधन ने हिम्मत दिखायी और उस मजहबी छात्रा को स्कूल में घुसने देने इनकार कर दिया। मुस्लिम छात्रा के पिता मौलाना मोहम्मद रजा रिजवी ने खूब पैंतरेबाजी की, मुस्लिम अधिकार की बात उठायी और स्कूल प्रबंधन पर कानूनी कार्यवाही करने की धमकियां दी। पर कोई फायदा नहीं हुआ। ईसाई स्कूल प्रबंधन ने कह दिया कि वह अपनी बच्ची का नामांकन किसी मदरसे में करा दे ताकि वह बुर्के में मदरसा जाने के लिए स्वतंत्र होगी। ईसाई प्रबंधन वाले स्कूलों में मुस्लिम बच्चों का नामांकन बडी मुश्किल से होता है। मुस्लिम बच्चों के नामांकन पर बहुत सावधानी बरती जाती है। कर्नाटक के हुबली के कालेजों में पाकिस्तान जिंदाबाद के सरेआम नारे लगे हैं। देश में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने की घटना कोई यदा-कदा नहीं बल्कि हमेशा और वह भी सरेआम घटती रही है। अभी -अभी मुहर्रम पर तिरंगे को इस्लामिक रूप देने की सैकडों घटनाएं प्रकाश में आयी हैं।
जब भी ऐसे मुस्लिम गद्दारो पर कार्रवाई होती है तो मुस्लिम संगठन पैंतरेबाजी पर उतर आते हैं और मुस्लिमों को पीडित बता देते हैं। आपने कभी भी किसी मुस्लिम संगठन को स्कूलों में मुस्लिम शिक्षिकों द्वारा पाकिस्तान परस्ती और जिहादी की देशद्रोही शिक्षा देने के खिलाफ करते हुए सुना है? कभी भी कोई मुस्लिम संगठन इस देशद्रोही करतूत का विरोध नहीं करता है। अब देश हित में ऐसे देशद्रोहियों पर कानून का सौटा चलना जरूरी है। ऐसे मुस्लिमों को सिर्फ और सिर्फ गद्दार ही कहा जाना चाहिए।

 

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