इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार है मास्क

बाल मुकुन्द ओझा

कोरोना का खतरा लगातार बढ़ता ही चला जा रहा है। इससे बचाव के लिए इम्युनिटी का मजबूत होना जरूरी है। अगर इम्युनिटी कमजोर हो तो कई तरह के वायरस हमला करते हैं। कोरोना संक्रमण के इस दौर में मास्क पहनने से इम्युनिटी विकसित हो सकती है। इससे कोविड संक्रमण की रफ्तार कम करने में भी काफी मदद मिल सकती है। ऐसा एक स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है। आइये यहाँ हम पहले इम्युनिटी की बात करते है। इम्युनिटी जिसे हम हिंदी में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कहते है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक प्रतिरक्षा प्रणाली में अंग,कोशिकाएं, टिशू और प्रोटीन इत्यादि शामिल होते हैं। ये सभी तत्व मिलकर मानव-शरीर को सही तरीके से काम करने में सहायता करते हैं। इसके साथ में प्रतिरक्षा प्रणाली मानव-शरीर को बीमारियों, संक्रमण, वायरस इत्यादि से लड़ने में सहायता करते हैं। इम्युनिटी या रोग प्रतिरोधक क्षमता वह शक्ति है, जो हमें सेहतमंद रखने में सहायता करती है। यह बच्चे से बुजुर्ग तक समस्त लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यह वह चीज है जो किसी भी बीमारी से लड़ने में हमारी मदद करती है। बीमार होने पर डॉक्टर इसे बनाए रखने या फिर बढ़ाने की सलाह देते हैं। बताते है कमजोर इम्युनिटी वाले इंसान को कोरोना वायरस आसानी से अपनी जकड में ले लेता है।
देश और दुनिया में कोरोना से होने वाली बीमारियों और मौतों में इम्युनिटी भी एक कारक मानी जाती है। बाजार में इन दिनों इम्युनिटी की बड़ी डिमांड है। जिगर चाहे मजबूत हो न हो, पर लोग इम्युनिटी मजबूत करने में जी-जान से जुटे पड़े हैं। देश की हालत यह है हर छोटा बड़ा व्यक्ति मुंह पर मास्क बांधे नजर आता है। जिसे देखो वह इम्युनिटी बढ़ाने का नुखा बताता है। अखबारों में इम्युनिटी बढ़ाने की दवाओं के विज्ञापनों की भरमार देखने को मिलती है। ऐसे में मास्क इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार है यह सब को सुकून देने वाकई खबर है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हषवर्धन ने एक बार फिर कहा है अगले वर्ष की शुरुआत में कोरोना वायरस की वैक्सीन भारत बना लेगा। इस पर दुनिया भर में तेजी से काम चल रहा है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना संक्रमण के इस दौर में मास्क पहनने से इम्युनिटी विकसित हो सकती है। इससे कोविड वायरस संक्रमण की रफ्तार कम करने में भी काफी मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि मास्क वायरस के संक्रमणकारी हिस्से को फिल्टर कर सकते हैं, लेकिन पूरी तरह नहीं रोक सकते। ऐसे में कोरोना संक्रमण होगा लेकिन वह घातक नहीं होगा। एक तरह से यह भयंकर बुखार के बजाय हल्का बुखार सहने जैसा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोविड इन्फेक्शन की गंभीरता भी वायरल इनोक्युलम पर निर्भर करती है तो फेस मास्क पहनने से इससे बचाव हो सकता है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की मोनिका गांधी और जॉर्ज रदरफोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला है। उन्होंने कहा कि पहले चेचक की वैक्सीन बनने तक लोग वैरियोलेशन लेते थे। इसमें जिन लोगों को बीमारी नहीं होती थी, उन्हें चेचक मरीजों की पपड़ी के मैटेरियल के संपर्क में लाया जाता था, इससे हल्का इन्फेक्शन होता था लेकिन पूरी तरह बीमारी होने से बचा लेता था। किसी बीमारी की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि वायरस का संक्रमणकारी हिस्सा शरीर में कितना पहुंचा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना काल में मास्क पहनने से इम्युनिटी डेवलप हो सकती है और कोविड संक्रमण धीमा हो सकता है। मास्क वायरस के संक्रमणकारी हिस्से को फिल्टर कर सकते हैं लेकिन पूरी तरह नहीं रोक सकते। ऐसे में कोरोना इन्फेक्शन होगा तो जरूर लेकिन वह घातक नहीं होगा। एक तरह से यह भयंकर बुखार के बजाय हल्का बुखार सहने जैसा है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार व पत्रकार हैं)

 

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