दक्षिण भारत की पहली किसान रेल दिल्ली के आदर्श नगर स्टेशन पहुँचने पर स्वागत किया गया 

पहली बार “फ्लाई ऐश” का लदान, 7वीं व्यापार माला एक्सप्रेस रेलगाड़ी चलाई गई

नई दिल्ली।दक्षिण भारत की पहली किसान रेल को 09 सितम्बर को आंध्र प्रदेश के अनन्तपुर से दिल्ली के आदर्श नगर रेलवे स्टेशन के लिए रवाना किया गया गया था । टमाटर, केले, संतरे, पपीते, तरबूज और आमों से लदी 10 डिब्बों वाली यह रेलगाड़ी 2150 किलोमीटर की दूरी लगभग 40 घंटे में तय करके आज नई दिल्ली के आदर्श नगर रेलवे स्टेशन पहुँची । उत्तर रेलवे के अधिकारियों ने आदर्श नगर स्टेशन पर इस रेलगाड़ी को रिसीव किया तथा इससे आये किसानों का स्वागत किया ।

उत्तर एवं उत्तर-मध्य रेलवे के महाप्रबंधक राजीव चौधरी ने बताया कि दक्षिण भारत से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को जोड़ने वाली यह पहली किसान रेल है । भारतीय रेलवे ने ग्रामीणों और किसानों की कृषि उपज को बडे बाजारों तक पहुँचाने के उददेश्य से किसान रेल शुरू की है ताकि किसानों को उपज का वाजिब मूल्य मिल सके । किसान रेल यह सुनिश्चित करेगी की कृषि उपज देश के एक कोने से दूसरे कोने तक आसानी से पहुँच सके ।

अनंतपुर आंध्र प्रदेश का तेजी से विकसित होता फलों का केन्द्र है । इस जिले में उत्पादित होने वाले 58 लाख मीट्रिक टन फल और सब्जियों का 80% से अधिक अन्य राज्यों के बाजारों, विशेष रूप से उत्तर भारत के राज्यों दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के बाजारों को भेजा जाता है । पहले यह उपज सड़क यातायात से ले जायी जा रही थी जिसमें न केवल अधिक समय लग रहा था बल्कि मार्ग में उपज के खराब हो जाने का नुकसान भी किसानों को उठाना पड़ रहा था । रेलवे द्वारा कृषि उपज को सुरक्षित, भरोसेमंद और द्रुतगामी यातायात सुविधा उपलब्ध होने से न केवल किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलेगा बल्कि इससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी ।यह किसान रेल अनन्तपुर तथा दिल्ली के बीच किसानों के लिए एक तीव्र परिवहन सुविधा उपलब्ध करायेगी तथा इससे किसान लाभान्वित होंगें ।

आज का दिन उत्तर रेलवे  लिए काफी हलचल भरा रहा सुबह -सुबह किसान रेल का स्वागत करने के पश्चात “फ्लाई ऐश” का लदान कर एक नए माल यातायात के लदान की शुरूआत किया गया। अम्बाला मंडल ने इतिहास बनाते हुए बठिंडा से रूपनगर के लिए “फ्लाई ऐश” के पहले रैक का लदान किया।उत्तर रेलवे ने दिनांक 10.09.2020 को पहली बार एक नए माल यातायात फ्लाई ऐश का बठिंडा से रूपनगर के लिए लदान कर एक नई शुरूआत की है । उत्तर रेलवे के अम्बाला मंडल ने बॉक्स-एन वैगनों में 4060 टन फ्लाई ऐश का लदान कर सड़क मार्ग से जाने वाले एक प्रमुख माल यातायात को रेल यातायात की ओर लाने में सफलता हासिल की है । उत्तर रेलवे पर फ्लाई ऐश का लदान न केवल पहली बार किया गया अपितु इसको करने वाला अम्बाला मंडल भी उत्तर रेलवे का पहला मंडल है ।

रेलवे ने मालभाड़ा यातायात को प्रोत्साहन देने के लिए अनेक प्रकार की रियायतें अपने ग्राहकों को दी हैं तथा माल यातायात आकर्षित करने हेतु बीडीयू का भी गठन किया है । इससे एक ओर जहां ग्राहक रियायतों का लाभ उठाकर लाभान्वित होते हैं वहीं दूसरी ओर रेलवे को भी अपने मालभाड़ा राजस्व को बढ़ाने में मदद मिलती है । अम्बाला मंडल के बीडीयू के प्रयासों के फलस्वरूप ही उत्तर रेलवे को पहली बार फ्लाई ऐश के लदान करने का अवसर मिला है ।

उल्लेखनीय है कि सीमेंट कम्पनियों द्वारा अपने उत्पाद हेतु फ्लाई ऐश का इस्तेमाल किया जाता है। फ्लाई ऐश को बंद थैलों में अथवा खुले वैगनों में रेल द्वारा ले जाने की सुविधा प्रदान की गयी है तथा इस पर रेल द्वारा रियायत भी प्रदान की जाती है । अम्बाला मंडल की बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट ने अपने मौजूदा ग्राहकों को यह सामग्री रेल द्वारा ले जाने के लिए आकर्षक प्रस्ताव दिया जोकि रेलवे व ग्राहक दोनों के लिए लाभप्रद है । इसके परिणामस्वरूप दिनांक 10.09.2020 को फ्लाई ऐश से लदा पहला रैक बठिंडा से रूपनगर के लिए रवाना किया गया ।

आज ही के दिन उत्तर रेलवे द्वारा 7वीं व्यापार माला एक्सप्रेस रेलगाड़ी चलाई गई। उत्तर एवं उत्तर-मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ने बताया कि व्यापार को मिशन मोड में रखने और छोटे व मंझोले व्यापारियों को सुविधा प्रदान करने के लिए दिनांक 10.09.2020 को उत्तर रेलवे द्वारा 7वीं व्यापार माला एक्सप्रेस रेलगाड़ी चलाई गयी । इस व्यापार माला एक्सप्रेस में गेहूँ के 21 वैगन सुलतानपुर से सालचापरा (असम) के लिए और डी-ऑयिल्ड केक के 21 वैगन फ़ैजाबाद से चंग्रबांधा (पश्चिम बंगाल) के लिए भेजे गए । श्री चौधरी ने आगे बताया कि मुख्यालय एवं मंडल स्तरों पर बिजनेस डेवलपमैंट यूनिटों के गठन के अब सकारात्मक नतीजे आने लगे हैं । उन्होंने यह भी कहा कि छोटे एवं मंझोले व्यापारियों की रेल परिवहन आवश्यकताओं के लिए हर संभव सहायता की जायेगी ।

उन्होंने  बताया कि अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने और उसे गति देने का भारतीय रेलवे पर काफी दबाव था क्योंकि यह राष्ट्र की जीवन रेखा है । राष्ट्र व्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद इस राष्ट्रीय परिवहन प्रणाली के पहिए थम गये थे । सभी क्षेत्रीय रेलों में अग्रणी उत्तर रेलवे ने इस आपदा को अवसर में बदलते हुए माल यातायात को सड़क यातायात से रेल यातायात की ओर लाने के लिए अनेक कदम उठाये। इनमें बिजनेस डेवलपमेंट यूनिटो का गठन एक महत्वपूर्ण उपाय था तथा उत्तर रेलवे अपने उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित, सुगम और बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है ।

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