क्या इंसानों की इंसानियत मर चुकी है ?

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर बड़ी तेजी से वायरल हो रही है भगवान की भूमि कहे जाने वाले केरल में एक हथिनी को अनानास में विस्फोटक मिलाकर खिला दिया गया यह किस प्रकार का क्रूर मजाक है भेजूं वालों के साथ कहते हैं कि केरल में साक्षरता दर पूरे देश में सर्वाधिक है वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार केरल की साक्षरता दर 93.91% के साथ देश में सर्वोच्च स्थान पर है उस राज्य में इस तरह का कृत्य कभी किसी ने सोचा नहीं होगा भगवान भी आज हम इंसानों का यह व्यवहार देखता होगा उसे खुद के बनाए इस नायाब चीज़ पर शर्म आती होगी जिसे उसने वह दिया जो पूरे ब्रह्मांड में किसी और को नहीं दिया वह है मस्तिष्क पर मानव ने इस दिमाग का इस्तेमाल इन दिनों विकास के नाम पर खुद के ही विनाश का बिहू रचने में लगा रहा है उस हथिनी की हृदय विदारक तस्वीरें देखकर एकबारगी तो लोग को रोना का दर्द भूल ही गए सब के मुख में यह दिल कि यह आवाज निकल रही है आखिर हम इंसानों को हो क्या गया क्या हम संवेदना ही हो चुके हैं पुरानी कहावत है कि किसी भी समाज का आकलन इससे भी किया जा सकता है कि वह अपने आसपास रहने वाले पशु पक्षियों से कैसा व्यवहार करता है केरल के पलक्कड़ मैं जो कुछ भी हुआ उसे कोई भी सभ्य समाज कभी स्वीकार नहीं कर सकता पर दुख की बात तो यह है कि जानवरों की आवाज उठाने वाली संस्था पेटा (एथिकल ट्रीटमेंट आफ एनिमल्स) इस पर चुप्पी साधे है इस बात को विवाद में बदलते हुए राजनीति शुरू हो चुकी है सत्ता पक्ष का सहारा लेकर हमला बोल रहा है पर मुख्य बात यह है कि जानवरों के प्रति हमारा व्यवहार कैसा है इसको लेकर भी राजनीति हो सकती है तो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम ऐसा समाज बना रहे हैं जहां हर कोई एक-दूसरे को सिखा रहा है पर वही बात तो खुद मानना नहीं चाहता इन बेजुबान की रक्षा करना हमारा दायित्व है और यह गलतफहमी पाल ना तो सबसे बड़ी मूर्खता है कि यह धरती सिर्फ हमारी है इस धरती पर अधिकार मनुष्य से लेकर सभी जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों का भी है पर मानव ने तो इस धरती को अपना एकाधिकार समझ रखा है सच कहे तो वह हथिनी नहीं मरी मरी तो हमारी इंसानियत है जिसके दम पर इंसान खुद को जानवरों से श्रेष्ठ समझता है तिल का ताड़ बनाने वाले न्यूज़ चैनल भी इस पर चुप हैं वह क्यों चुप है राम जाने वरन यह वही देश है जहां मार्च 2016 में उत्तराखंड के मसूरी में शक्तिमान घोड़े पर लाठी बरसाने वाले विधायक जी का वीडियो वायरल हुआ था घोड़े की टांग टूट गई मीडिया ने इस मुद्दे पर सजगता दिखाई तो विजय से बुलाए गए पर घोड़ा एक महीने बाद मर गया काफी काफी हो हल्ला होने के बाद विधायक जेल भी गए 30 मई को एक वन अधिकारी मोहन कृष्ण ने एक इस घटना के बारे में एक बड़ा मार्मिक फेसबुक पोस्ट लिखा और 2 जून को यह खबर मीडिया में आगे पर कोई खास तवज्जो नहीं मिला मेरा मानना है कि यह न्यूज़ हॉट न्यूज़ बने ना बने यह एक अलग मसला है पर इस तरह का व्यवहार हमारी हैबिट क्यों बनती जा रही है जबकि आज हर किसी को पता है कि मानव के बदलते खान-पान उसके प्रकृत के बदलते व्यवहार से पशु पक्षी जीव जंतु ही नहीं पूरी पृथ्वी कराह रही है अभी ढाई महीने पहले ढाई महीने के लाख डाउन ने हमें आत्मचिंतन का अवसर दिया और यह बताने की कोशिश की कि इस तरह के रोगों का कारण मनुष्य ही है और लग्न में हमारी गतिविधियां कम हुई तो प्रकृति थोड़ी रिलैक्स हुई जो हमने शहरों के साफ होते हवा बेहतर होते एक्यूआई सैकड़ों किलोमीटर दूर से नजर आते पर्वत श्रृंखलाएं और बाहर निकलकर स्वच्छंद घूमते पशु पक्षियों को देखकर महसूस भी किया उसके बाद इस तरह की घटना बताती है मानव ने अभी भी कोई सबक नहीं सीखा यहां तक कि हमारा संविधान भी हमें वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्रति दया भाव रखने को प्रेरित करता है संविधान के अनुच्छेद 51ए कहता है कि सभी जीवित प्राणियों के लिए दया भाव रखना भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है आज केरल की घटना उन लोगों पर एक तमाचा है जो यह समझते हैं कि सिर्फ शिक्षित होना ही किसी समाज के विकसित होने की निशानी है असल बात तो यह है कि इंसान की इंसानियत और प्रकृति को संरक्षित रखने के लिए की आवश्यकता नहीं होती है जररत है नैतिक मूल्य उनके शिक्षा की जिनकी कक्षाएं युवा पीढ़ी अक्सर यह कहकर छोड़ देती है अरे हमसे क्या होने वाला या यह किस काम का है पर इस प्रकृति में रहने के लिए नैतिक मूल्यों का होना भी जरूरी है वैसे इस घटना ने केरल की वह घटना भी याद दिला दी कि यह वही केरल है जहां सड़क पर बीफ पार्टी मनाई जाती है यह इतना घटिया कृत्य करते हुए उन लोगों की क्या आत्मा मर चुकी थी और उस हथिनी ने इतना दर्द होने के बावजूद किसी को कुछ नुकसान नहीं पहुंचाया और चुपचाप पानी में जाकर खड़ी हो गई शायद वह इंसानों को खुद सजा नहीं देना चाहती वह तो कुदरत का न्याय देखना चाहती होगी आपको याद होगा कि केरल में भयंकर बाढ़ आई थी जिससे यह लगा कि पूरा केरल इस बार में खत्म हो जाएगा तब लोग यह कहने लगे थे कि यह उस पार्टी का परिणाम है आज इस तरह की घटना के बाद हर इंसान इंसानियत को धिक्कार ता नजर आ रहा है और आज वह खुद कह रहा है इंसानों को इसकी सजा मिलनी चाहिए बड़े भाग मानुष तन पावा सुर दुर्लभ सद् ग्रंथन गावा रामचरितमानस में कहा गया है कि यह मानव शरीर बड़े ही भाग्य से मिलता है क्योंकि मानव शरीर पाला देवताओं के लिए भी दुर्लभ होता है तो वही आज देखिए कुछ लोग इस तरह का कृत्य कर मानव से दानों बनने की ओर निकल पड़े हैं ऐसे में धरती पर आपदाएं विपदा ए महामारी नहीं आएगी तो क्या आएगा स्वयं विचार कीजिए

देवानंद राय

 

 

 

 

 

 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                

 

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