पुस्तक समीक्षा – कोरोना कहर

बाल मुकुंद ओझा                     कोरोना कहर के नाम से एक पुस्तक छपकर आ गयी है। 136 पृष्ठ की इस पुस्तक के लेखक विख्यात साहित्यकार दिलचस्प हैं। दिल्ली की शिलालेख पब्लिशर्स से यह पुस्तक प्रकाशित हुई है। दो सौ रूपये मूल्य कीमत की संभवत यह देश की पहली पुस्तक है जो कोरोना महामारी जैसे संसार के ज्वलंत विषय पर प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक के लेखक गिनीज बुक रिकार्डधारी नारायण सिंह राजावत श्दिलचस्प का नाम साहित्य जगत में जाना पहचाना है। दिलचस्प निजी कारणों से सोशल मीडिया प्लेटफार्म से अपनी दूरी बनाये हुए है। दिलचस्प 1965 से सतत लेखन में सक्रिय है। इनके विभिन्न विषयों पर हज़ारों आलेखए व्यंग्य और कवितायेँ आदि प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है। देश के विभिन्न ग्यारह प्रकाशन संस्थाओं से इनकी अब तक 16 पुस्तकें छप चुकी है।
कोरोना कहर शीर्षक इस पुस्तक में कोरोना की उत्पति से लेकर अब तक की प्रमुख घटनाओं का सन्दर्भ और प्रमाणिकता के साथ समावेश किया गया है। लेखक ने सूक्षम्ता और गहराई से प्रत्येक घटना और बिंदु का विवरण प्रस्तुत किया है। पुस्तक को अपने 61 आलेखों में समेटकर सभी का सांगोपांग विवरण सरल और सहज शब्दों में दिया है। प्रत्येक आलेख में देश और विदेशों में घटित प्रमुख घटनाओं का सार संक्षेप बहुत ही रोचक शब्दों में पाठकों के समक्ष परोसा है। अपनों से बात आलेख से शुरू करते हुए लेखक ने कहा है मानव ने चाँद का सफर कर लिया। विज्ञान ने खूब तरक्की की मगर कोरोना जैसी बीमारियों का कोई इलाज अब तक नहीं खोज पाए। पुस्तक इस आशा से प्रस्तुत की गयी है की वर्तमान और भावी पीढ़ी किसी भी प्रकार की महामारी से सजग रहे, सबक सीखे और सतत प्रकृति के साथ रहे।
प्रस्तुत पुस्तक में कोरोना उदगम स्थल से लेकर नमस्ते ट्रम्प, कोरोना वायरस की जानकारी, इटली में लाशों से पटे चर्च, संक्रमितों के अंतिम संस्कार,लोकडाउन, होम क्वारेंटीने, कोरोना का असर, केरल के पहले केस, जनता करफ्यू, गुइलिन के बाज़ारों में फिर रौनक, भय से डिप्रेशन, तब्लीगी, बेरोजगारी और मज़दूरों का पलायन, भूख, कोरोना से डराना, दवा और टीकों पर वैज्ञानिकों के अनुसन्धान, प्लाज़्मा थेरेपी, सेवा और जज्बा, हाथ की सफाई और मिलाई, लोक डाउन में शादी, मास्क, मंदिरए, कोरोना से मौतें, अस्थि विसर्जन, महिला शासकों की रणनीति, भ्रष्टाचार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश, वायरस के जिम्मेदार, अनलोक आदि शीर्षकों से लिखे आलेखों को आधोपान्त सन्दर्भ से ओतप्रोत और पूरी प्रमाणिकता के साथ प्रस्तुत किया है जो बच्चे से बुजुर्ग तक के लिए लाभदायक और पठनीय है।
कोरोना जैसी महामारी पर इतनी जल्दी लिखी पुस्तक के लिए लेखक बधाई के पात्र है।

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