चीनी सैनिकों की आक्रामकता से फिर सीमा पर बढ़ा संघर्ष, स्थिति तनावपूर्ण मगर बातचीत जारी

नई दिल्ली । पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी गतिरोध के बीच सोमवार को भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प (फायरिंग) की खबरें आ रही हैं। ऐसी रिपोर्ट है कि पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी तट के पास रेजांग-ला-रेचिन ला लेगलाइन पर भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच गोलीबारी हुई है, जिसमें कुछ चीनी सैनिकों के घायल होने की खबर है। चीन की ओर से दावा किया गया है कि भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन करते हुए फायरिंग की है। जबकि भारतीय सेना या भारत सरकार की ओर से चीन के दावे पर अभी कोई बयान नहीं आया है। सीमा पर ताजा विवाद ऐसे वक्त में हुआ है, जब 10 सितंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी समकक्ष वांग यी के बीच मॉस्को में संभावित वार्ता होने वाली है।
मंगलवार सुबह शीर्ष भारतीय अधिकारी ने कहा, सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण है मगर दोनों पक्ष ग्राउंड कमांडर लेवल पर एक दूसरे से बातचीत कर रहे हैं। जाहिर तौर पर रेचिन ला पर आक्रामक पीएलए सैनिकों और भारतीय सैनिकों के बीच गतिरोध के बाद सोमवार शाम को स्थिति नाजुक हो गई। दोनों सैनिकों के बीच गतिरोध शाम 6.15 बजे शुरू हुआ।
सोमवार देर रात चीनी वेस्टर्न थिएटर कमांड ने भारतीय सैनिकों पर चेतावनी भरी फायरिंग करने का आरोप लगाया और स्थिति को स्थिर करने के लिए जवाबी हमला करने की बात कही। मगर हकीकत यह है कि भारतीय सेना को अगस्त के अंतिम सप्ताह में पैंगोंग त्सो के दक्षिण में ग्रीन लाइन (जिस पर चीन अपना दावा करता है) में चीनी घुसपैठ को नाकाम करने की कोशिश के दौरान भी चेतावनी भरी फायरिंग करनी पड़ी थी। इसके बाद सितंबर के पहले सप्ताह में पीएलए ने अपने सभी पोजिशन को मजबूत किया है और झील के दक्षिण में सेना की ताकत को बढ़ाया। हालांकि, भारतीय सेना ने भी अपनी तैनाती बढ़ा दी है।
चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के ट्विटर हैंडल पर वेस्टर्न थियेटर कमांड के प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है, ‘भारतीय सेना ने एकबार फिर गैर-कानूनी रूप से शेनपाओ की पहाड़ियों में पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी तट के पास सोमवार को एलएसी का उल्लंघन किया।’ ग्लोबल टाइम्स के एक दूसरे ट्वीट में प्रवक्ता के हवाले से कहा, “भारतीय सैनिकों द्वारा पीएलए के सीमा गश्ती दल के सैनिकों पर चेतावनी भरी फायरिंग करने के बाद चीनी सैनिकों को स्थिति को स्थिर करने के लिए जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा।’
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कमांडर के अधीन काम करने वाला पश्चिमी थिएटर कमान ने भारतीय सैनिकों पर आक्रामकता का आरोप लगाया है, जबकि भारतीय सेना का उद्देश्य अपने क्षेत्र पर काबिज रहना है और इलाके में पीएलए को भूमि कब्जा करने से रोकना है। भारतीय ग्राउंड कमांडरों ने मौके पर निर्णय लेने के लिए भारतीय सेना को पूरी छूट दी है और कड़े निर्देश दिए हैं ताकि चीनी सेना के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में तनिक भी देरी न हो।
गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले कुछ महीनों से तनाव बना हुआ है। 29 और 30 अगस्त की रात भारतीय सैनिकों ने एलएसी पर पहाड़ों की चोटियों पर कब्जा करने की कोशिश कर रही चीनी सेना को न केवल रोका बल्कि पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर चोटियों पर पोजिशन भी ले ली है। पैंगॉन्ग झील इलाके की बनावट ऐसी है कि जो भी सेना दक्षिणी किनारे के पास के इन पहाड़ों की चोटियों पर कब्जा कर लेती है, उसे पूरे इलाके में बढ़त मिल जाएगी।
इस वर्ष 15-16 जून की रात को एलएसी पर ड्रैगन के सैनिकों ने यथास्थित बदलने का प्रयास किया और लोहे की रॉड में कंटीले तार लगाकर गलवान घाटी में भारतीय जवानों पर अचानक हमला कर दिया था। चीनी सेना की इस नापाक हरकत से भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। भारतीय सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब देते हुए जवाबी कार्रवाई में चीन के 43 सैनिकों के मारे जाने की बात सामने आई थी। चीन ने यह तो माना था कि उसके भी सैनिक हतातहत हुए लेकिन उसने संख्या की पुष्टि कभी नहीं की। इसके बाद से ही एलएसी पर तनाव की स्थिति है।

Post add

Leave A Reply

Your email address will not be published.