10 सितंबर को मिलेगी नई सौगात ! कोइलवर में नया पुल बनकर तैयार

पटना। बिहार की राजधानी पटना और आरा को जोड़ने वाला नया कोइलवर पुल बनकर तैयार है जो 10 सितंबर को आवागमन के लिए खोल दिया जायेगा। इस पुल का नामकरण आरा के लाल देश के अनमोल रत्न महान गणितज्ञ डॉक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह के नाम पर करने की अनुशंसा स्थानीय सांसद डॉ आर के सिंह ने की है।
राजधानी पटना को आरा, बक्सर, कैमूर, रोहतास समेत उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाला और बिहार की जीवन रेखा कहलाने वाले भोजपुर के कोइलवर स्थित सोन नदी पर बने ऐतिहासिक अब्दुल बारी पुल यानी कोइलवर पुल (Koilwar Bridge) के समानांतर दूसरा नया पुल बनकर तैयार है। सोन नदी पर बन रहे नए 6 लेन (Six Lane Bridge) के पुल का दक्षिणी लेन यानी बायां लेन लगभग बनकर तैयार हो गया है जिसकी शुरुआत होते ही अब सड़क यातायात पूरी तरह से इस नए पुल पर शिफ्ट हो जाएगा। ट्रेनों का परिचालन पुराने अब्दुल बारी पुल से ही जारी रहेगा।नया पुल बन जाने से अब्दुल बारी पुल और इससे संबंधित आरा-पटना NH 30, आरा-छपरा गंगा पुल रोड समेत अन्य लिंक रोड पर भी जाम से राहत मिलेगी। बता दें कि इस पुल की शुरुआत पटना जिला के बिहटा की ओर आरा सांसद सह केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने की थी। नवनिर्मित 6 लेन पुल का एक हिस्सा 31 मार्च 2020 तक ही कम्पलीट हो जाना था, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से निर्माण कार्य बाधित हो गया जिससे एक हिस्सा बनने में देर हुई। अब 3 लेन वाला एक हिस्‍से के पूरा होने के बाद अनुमान है कि इस महीने के 10 तारीख से पहले इसे यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।बता दें कि 1.528 किलोमीटर लंबे इस पुल में कुल 74 स्पेन हैं जो पुल को पूरी तरह मजबूत रखेंगे। पुराने अब्दुल बारी पुल से करीब 500 मीटर उत्तर की ओर ये नया पुल बन रहा है, जिसकी लागत तकरीबन 194 करोड़ है। सोन नदी में अंग्रेजों द्वारा 1962 में बनाये गए अब्दुल बारी या कोइलवर पुल के ऊपरी लेन से अब तक रेलगाड़ियां गुजरती हैं। इसी पुल के नीचे चारपहिया वाहन भी चलते हैं।इस पुल की लंबाई 1440 मीटर है, जबकि नए पुल की लंबाई 1528 मीटर होगी।स्थानीय लोगों का भी मानना है कि इस पुल के शुरू हो जाने से भोजपुर वासियों को जाम से मुक्ति मिलेगी और यह पुल बिहार की दूसरी जीवनरेखा साबित होगा। बिहार को उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से जोड़ने वाला ये पुल राज्य के कई जिलों के लोगों के लिए आशा की एक किरण लेकर आया है जो घंटों जाम में फंस कर जीवन तक गंवा बैठते थे और कोई विकल्प नही होता था। फिलहाल जनता और प्रशासन दोनों को इस ऐतिहासिक पल का इंतजार है।

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