लोगों की जान लेने पर तुले हैं मिलावटखोर

बाल मुकुन्द ओझा

देश और प्रदेश में लोगों की सेहत बिगाड़ने का काम बेखौफ चल रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक बार फिर मिलावट के सौदागरों का गोरखधंधा सामने आया है। मोटे मुनाफे के लालच में मिलावट का यह धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।. कोरोना लोकडाउन के दौरान जो खाद्य पदार्थ गोदामों में पड़ा रह गया था उसे एक्सपाइरी डेट हटाकर बेचने के धंधे का भंडाफोड़ होने से शासन, प्रशासन और लोग सकते में आगये है। पुलिस ने शनिवार को राजधानी जयपुर में एक बड़ी कार्यवाही कर एक्सपायरी डेट के हजारों कट्टे आटा, मैदा, सूजी सॉस की बोतलें ,कॉस्मेटिक सामान के साथ पनीर पैकेट, फ्रोजन वेजिटेबल, आटा, ड्राई फ्रूट, काजू के 5600 बोरे जब्त किए। पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में जयपुर व आसपास के इलाकों के 250 से अधिक स्टोर व दुकानों के नाम बताए हैं जहां एक्सपायरी डेट के सामान को री-पैकिंग कर सप्लाई किया था। इससे पूर्व जयपुर ग्रामीण पुलिस ने करोड़ों रुपये के घी में हो रही मिलावट गोरखधंधे का पर्दाफाश किया था।
चंद रुपए की लालच में मिलावटखोर लोगों की जान लेने पर तुले हैं। दूध, दही, दाल से लेकर अधिकांश खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संदेह के घेरे में है। देश भर में मिलावट को लेकर आमजन भयभीत है और उसे विश्वास नहीं है की वह जो खा रहा है वह शुद्ध है। खाद्य नियामक एफएसएसएआई की एक रिपोर्ट का गहनता से विश्लेशण करें तो पाएंगे कि आज भी मिलावट को लेकर लोगों में भारी असमंजस की स्थिति है जिसके कारण देशभर में बड़े स्तर पर मिलावट खोरी की धारणा बनने से लोगों का विश्वास घटा है। आबोहवा और पानी के बाद अब खाद्य पदार्थों के सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
मिलावट का अर्थ है महँगी चीजों में सस्ती चीज का मिलावट। मुनाफाखोरी करने वाले लोग रातोंरात धनवान बनने का सपना देखते हैं। अपना यह सपना साकार करने के लिए वे बिना सोचे-समझे मिलावट का सहारा लेते हैं। सस्ती चीजों का मिश्रण कर सामान को मिलावटी कर महंगे दामों में बेचकर लोगों को न केवल धोखा दिया जाता है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी किया जाता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से प्रतिवर्ष हजारों लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार होकर जीवन से हाथ धो बैठते हैं। मिलावट का धंधा हर तरफ देखने को मिल रहा है। दूध बेचने और मिलावट करने वाले से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक ने मिलावट के बाजार पर अपना कब्जा कर लिया है।
आज आम आदमी महंगाई के साथ खाद्य पदार्थो में हो रही मिलावट खोरी से खासा परेशान है। हमारे बीच यह धारणा पुख्ता बनती जा रही है कि बाजार में मिलने वाली हर चीज में कुछ न कुछ मिलावट जरूर है। लोगों की यह चिंता बेबुनियाद नहीं है। आज मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है। खाने पीने के पदार्थो में मिलावट कोई नयी समस्या नहीं है। मिलावट और खराब उत्पाद बेचे जाने की खबरें आम हो चुकी हैं. साल-दर-साल इसका दायरा व्यापक होता जा रहा है।
खाने के सामान में मिलावट एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। हमारे दैनिक प्रयोग में आने वाली वस्तुओं का आजकल शुद्ध और मिलावट रहित मिलना मुश्किल हो गया है। मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है। आज समाज में हर तरफ मिलावट ही मिलावट देखने को मिल रही है। पानी से सोने तक मिलावट के बाजार ने हमारी बुनियाद को हिला कर रख दिया है। पहले दूध में पानी और शुद्ध देशी घी में वनस्पति घी की मिलावट की बात सुनी जाती थी, मगर आज घर-घर में प्रत्येक वस्तु में मिलावट देखने और सुनने को मिल रही है। मिलावट का अर्थ प्राकृतिक तत्त्वों और पदार्थों में बाहरी, बनावटी या दूसरे प्रकार के मिश्रण से है। जनसामान्य की यह चिंता निराधार नहीं है।
सामान्य तौर पर एक परिवार अपनी आमदनी का लगभग 60 फीसदी भाग खाद्य पदार्थों पर खर्च करता है। खाद्य अपमिश्रण से अंधापन, लकवा तथा टयूमर जैसी खतरनाक बीमारियाँ हो सकती हैं। सामान्यत रोजमर्रा जिन्दगी में उपभोग करने वाले खाद्य पदार्थों जैसे दूध, छाछ , शहद, हल्दी, मिर्च, पाउडर, धनिया, घीं, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, मसाले, मावा , आटा आदि में मिलावट की सम्भावना अधिक है। मिलावट एक संगीन अपराध है। मिलावट पर काबू नहीं पाया गया तो यह ऐसा रोग बनता जा रहा कि समाज को ही निगल जाएगा। मिलावट के आतंक को रोकने के लिए सरकार को जन भागीदारी से सख्त कदम उठाने होंगे।

(वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) 

 

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