आम आदमी पार्टी को कम पढ़े-लिखे मुस्लिम नेताओं पर ज़्यादा भरोसा

अकिलुर रहमान
नई दिल्ली । मुल्क की रियासत देहली में मुस्लिम तबके को हमेशा से ही सियासी पार्टियों के जरिए इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। मुस्लिम तबके के काबिल और पढ़ें लिखे लोगों को सियासी पार्टियों ने हमेशा ही शासन प्रशासन में अच्छे पदों से दूर रखा है।साथ ही जो सरकारी महकमे या तंजीम है जिनसे मुस्लिम तबके का भला हो सकता है। वहां पर भी हुकूमत केवल दिखावे के लिए कठपुतली टाइप के शख्स को बिठा देती है। कुछ ऐसा ही दिल्ली मायनोरिटी ‌कमीशन में भी इन दिनों देखने को मिल रहा है। दिल्ली माइनॉरिटी कमिशन के चयरमेंन के रूप बाबरपुर के पूर्व पार्षद ज़ाकिर खान को दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली माइनॉरिटी कमीशन का चेयरमैन नियुक्त किए जाने के बाद बहुत से कार्यकर्ताओं में असंतोष देखा गया, कार्यकर्ताओं का कहना है कि जो लोग पार्टी के लिए पिछले 8-9 सालों से अपना सब कुछ न्यौछावर किए हुए हैं पार्टी उन्हें तरजीह ना देकर 1-2 साल पहले भाजपा, कांग्रेस से आए हुए कम पढ़े लिखे नेताओं पर अपना भरोसा दिखा कर पार्टी के वरिष्ठ और पढ़े लिखे कार्यकर्तओं के साथ अन्याय कर रही है, मालूम हो कि दिल्ली अल्पसंख्यक कमीशन के चेयरमैन का पद 1 हाइली क़वालीफाइड शख्सियत के लेवल का होता है परन्तु आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार ने इस पद के लिए 1 साधारण ग्रेजुएट ज़ाकिर खान को चुना। इस संदर्भ में मुस्लिम स्कोलर्स और अल्पसंख्यक मामलों के जानकारों का कहना है कि अवाम इस साधारण ग्रेजुएट चेयरमैन का मुकाबला हमेशा पिछले हाइली क़वालीफाइड चेअरमैन ज़फरुल इस्लाम से करती रहेगी, जिस तरह ज़फरुल इस्लाम ने दिल्ली अल्पसंख्यक कमीशन के प्रमुख पद पर रहते हुए मुस्लिमों के खिलाफ हो रही साज़िशों और अत्याचार के मामलों को बेबाक़ी से उठाया चाहे वो तबलीगी जमात का मामला हो, दिल्ली दंगों का मामला हो या फ़िर मोब्लिंचन्ग आदि दरअसल उपरोक्त मामलों में अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार पर अपने ब्यानो और रिपोर्ट में सवाल उठाकर ज़फरुल इस्लाम दिल्ली में अल्पसंख्यकों के हीरो बन गए हैं, लिहाज़ा अब ज़ाकिर खान का मुकाबला हमेशा ज़फरुल इस्लाम से बना रहेगा, इसके अलावा जब कुछ पार्टी कार्यकरताओं द्वारा हमारा ध्यान आम आदमी पार्टी के दूसरे मुस्लिम नेताओं की तरफ किया गया तो पता चला लगभग आम आदमी पार्टी के सभी मुस्लिम नेता कम पढ़े-लिखे हैं जैसे सीलमपुर के पूर्व विधायक हाजी इशराक सीलमपुर के मौजूदा विधायक अब्दुल रहमान , मुस्तफ़ाद के विधायक हाजी यूनुस ओखला के विधायक और वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अमानतुल्लाह खान दिल्ली लेबर बोर्ड के चेयरमैन भूरे खान इन सभी की तालीम ‌कुछ ख़ास नहीं है।

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