राजनाथ और रूसी रक्षा मंत्री के बीच चली एक घंटे बैठक, रणनीतिक सहयोग पर हुई चर्चा

मॉस्को ।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूसी समकक्ष जनरल सर्गेई शोइगू के साथ बैठक की। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह बैठक एक घंटे तक चली और इसमें दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत और रूस के बीच होने वाले इंद्र नौसेना अभ्यास अगले 2 दिनों मलक्का जलडमरूमध्य में होगी। वहीं रक्षा मंत्री ने कहा है कि इन अभ्यासों से हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के साझा हितों को दर्शाता है।
राजनाथ ने गुरुवार को कहा कि उनकी उनके रूसी समकक्ष जनरल सर्गेई शोइगू के साथ यहां बैठक शानदार रही है। बैठक में रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने समेत व्यापक मुद्दों पर चर्चा हुई। इस चर्चा के दौरान रूस ने कहा कि भारतीय अनुरोध पर उन्होंने पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति नहीं की। रक्षा मंत्री ने मास्को स्थित भारतीय दूतावास में बापू की प्रतिमा पर पुष्प भी अर्पित किए।
राजनाथ सिंह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने के लिए तीन दिवसीय यात्रा पर बुधवार को यहां पहुंचे थे। सिंह ने पहले हुए समझौतों के तहत रूस द्वारा भारत को कई हथियार प्रणालियों, गोला बारूद और कल पुर्जों की आपूर्ति में तेजी लाने के लिए दबाव डाला। सिंह ने गुरुवार को ट्वीट करके कहा, ”आज मॉस्को में रूसी रक्षा मंत्री जनरल सर्गेई शोइगू के साथ बैठक शानदार रही। हमने कई मुद्दों पर बात की, विशेष रूप से इस पर कि दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को कैसे और गहरा किया जाए।”
राइफल को भारत में बनाने को समझौता किया :
इससे पहले दिन में भारत और रूस ने अत्याधुनिक एके-203 राइफल भारत में बनाने के लिए एक बड़े समझौते को अंतिम रूप दिया। एके-203 राइफल, एके-47 राइफल का नवीनतम और सर्वाधिक उन्नत प्रारूप है। यह ‘इंडियन स्मॉल ऑर्म्स सिस्टम (इनसास) 5.56 गुणा 45 मिमी राइफल की जगह लेगा। रूसी सरकारी मीडिया के मुताबिक, भारतीय थल सेना को लगभग 7,70,000 एके-203 राइफलों की जरूरत है, जिनमें से 100,000 का आयात किया जाएगा और शेष का विनिर्मिण भारत में किया जाएगा। हालांकि, इस समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रूसी मीडिया के मुताबिक, इन राइफलों को भारत में संयुक्त उद्यम भारत-रूस राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (आईआरआरपीएल) के तहत बनाया जाएगा। इसकी स्थापना आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) और कलाशनीकोव कंसर्न तथा रोसोबोरेनेक्सपोर्ट के बीच हुई है। अधिकारियों ने बताया, सिंह उम्मीद है कि रक्षा अनुबंधों के तहत भारतीय सशस्त्र बलों को विभिन्न हथियारों और कलपूर्जों की जल्द आपूर्ति के लिए दबाव डालेंगे। भारत को एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली की पहले खेप की आपूर्ति 2021 के अंत तक निर्धारित है।
रक्षा मंत्री की जून के बाद यह दूसरी मॉस्को यात्रा :
सिंह ने रूस रवाना होने से पहले ट्वीट करके कहा था कि शोइगू के साथ होने वाली बातचीत में परस्पर हितों के मुद्दे शामिल रहेंगे। जून के बाद सिंह की यह दूसरी मास्को यात्रा है। उन्होंने 24 जून को मास्को में विजय दिवस परेड में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। विजय दिवस परेड का आयोजन द्वितीय विश्वयुद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत विजय की 75 वीं वर्षगांठ पर किया गया था।
राजनाथ ने मास्को में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मास्को स्थित भारतीय दूतावास में गुरुवार को महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री ने ट्वीट किया कि मास्को में भारतीय दूतावास में बापू की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देता हूं। सिंह के साथ रूस में भारत के राजदूत डी बी वेंकटेश वर्मा भी थे। इस दौरान सिंह ने मास्क लगाया हुआ था और वह गांधी की प्रतिमा के आगे हाथ जोड़कर सिर झुकाए देखे गए।
रूस ने पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति नहीं की
रूस ने कहा कि पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति पर भारतीय अनुरोध पर उन्होंने प्रतिबद्धता दोहराई और पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति नहीं की। रक्षा मंत्री को रूस का आश्वासन मिला कि वह भारत के सुरक्षा हित में खड़ा है। रूस ने एक घंटे की बैठक के दौरान रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के उद्देश्य से मेक इन इंडिया की पहल का दृढ़ता से समर्थन किया, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग के कई क्षेत्रों को शामिल किया गया।
आज एससीओ बैठक में शामिल होंगे :
राजनाथ सिंह शुक्रवार को यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की एक बैठक में भी शामिल होंगे, जिसमें आठ सदस्य देशों के रक्षा मंत्री हिस्सा लेंगे। बैठक में आतंकवाद, अतिवाद जैसी क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और उनसे एकजुट होकर निपटने के तरीकों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब संगठन के दो प्रमुख सदस्य देशों भारत और चीन के बीच सीमा पर गतिरोध है।

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