नशे के जाल में फंसता युवा

देवानंद राय

तू पीता नहीं है
नहीं यार !
बिल्कुल नहीं पीता
बिल्कुल भी नहीं
किस जमाने में हो ब्रो, थोड़ा बहुत वोडका, शॉट्स स्मोक तो चलता है ना
नहीं यार मुझे यह सब नहीं करना
कोई बात नहीं धीरे-धीरे सीख जाएगा
यह किसी कॉलेज के दो छात्रों की बातचीत का हिस्सा है जो यह बताने के लिए काफी है कि आज शराब पीना नशा के बजाय एक तरह का स्टेटस सिंबल हो गया है। कई जगहों पर अगर आप शराब नहीं पीते, स्मोक नहीं करते तो आप “कूल” नहीं कहलाते हैं आप मॉर्डन जमाने के तो बिल्कुल नहीं हो। पर क्या आपने गौर किया है इस बात पर कि हर नशे की शुरुआत खुद को कूल दिखाने, मस्तमौला और बेफिक्र होने का ढोंग करने और बस मजा लेने से ही होता है जो बाद में लत के रूप में बदल जाता है। आप का मजा लेने वाला नशा कब एक लत के रूप में बदल जाता है आपको खुद ही नहीं पता चलता। समझ तो तब आता है जब आप उसके बगैर कोई काम ठीक से नहीं कर पाते कई लोगों को तो ऐसी लत लग चुकी होती है कि बिना मुंह में गुटखा डाले वह अपना काम ही नहीं कर पाते या बिना स्मोक ब्रेक लिए ऑफिस में अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाते उनके लिए स्मोक ब्रेक लेना लंच ब्रेक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। इसमें अमीर-गरीब और पढ़े-लिखे तथा अनपढ़ दोनों वर्ग के लोग समान रूप से इसके जाल में फंसे हैं कोई अंतर है प्रोडक्ट की क्वालिटी में पर शराब चाहे ₹100 की हो या 1000 की शरीर को बराबर नुकसान पहुंचाती है अब तो युवा खुलकर ड्रग्स ले रहा है और नाबालिग भी इसके शिकार बनते जा रहे हैं गांजा, अफीम हेरोइन की तस्करी में कई बड़े लोगों के नाम आ चुके हैं तो वहीं रेलवे स्टेशनों बस अड्डों पर घूमने वाले नाबालिग बच्चे बच्चियां गरीबी और रुपयों की लालच में इस तरह के कामों में लिप्त पाए जा रहे हैं। आखिर क्या कारण है कि हम इन युवाओं और इन बच्चों को इस गंदे खेल से दूर नहीं कर पा रहे हैं ? नशा मुक्ति की बातें तो बहुत हो रही है पर कभी पूर्ण शराबबंदी की बात नहीं होती है। सिगरेट, गुटका अब भी खुलेआम बाजारों में बिक रहा है सरकार बस रैपर और डब्बे पर चेतावनी संदेश और फोटो चिपकाकर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर ले रही है‌ विडंबना देखिए एक तरफ यह प्रोडक्ट धड़ल्ले से बिक रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर नशा मुक्त अभियान भी छेड़ जा रहा है समझ नहीं आता कि जब तक आप शराब बंद नहीं करोगे तब तक इस पर किसी को कैसे रोक लगाओगे यह माना कि आबकारी विभाग का राजस्व सबसे अधिक जमा होता है सरकारी खजाने में। पर हमें यह भी तो देखना होगा कि इस तरह की चीजों से हमारे समाज में कितने घर बर्बाद हो रहे हैं,घरों में अशांति हो रही है। युवा इस के दलदल में फंस कर निकल ही नहीं पा रहा और जब वह निकलना चाहता है तब तक उसके गुर्दे खराब होने की स्थिति में आ चुके होते हैं।फिर इस प्रकार के चीजों को बेचने क्यों दिया जा रहा है ? हमें यह तय करना होगा कि “हम नशा मुक्त भारत बनाना चाहते हैं या नशा युक्त भारत” आज भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है और यह समस्या सिर्फ भारत की ही नहीं है पूरे विश्व में लगभग यही स्थिति है। नशे के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए डब्ल्यूएचओ को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाना पड़ रहा है जो प्रतिवर्ष 31 मई को मनाया जाता है।तंबाकू में जिस रसायन की सबसे अधिक मात्रा पाई जाती है वह है निकोटीन हमारे शरीर के लिए बहुत हानिकारक है यह व्यक्ति को नशे का लती तो बनता ही है साथ ही इसके प्रभाव से मानव शरीर में अनेक गंभीर बीमारियों का भी जन्म होता है निकोटीन के प्रभाव के कारण व्यक्ति को भूख प्यास पर दिमाग काम करना बंद कर देता है जिसके चलते धीरे-धीरे पूर्ण रूप से नशे के बिना नहीं रह पाता है और यही नशा उस व्यक्ति के नाश का कारण बनता है। वर्तमान समय में ड्रग्स का बढ़ता सेवन भी भारत की एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है इससे सिर्फ एक परिवार परेशान नहीं होता वह समाज भी संक्रमित होता है और राष्ट्र की युवा शक्ति कमजोर होती है। वर्तमान समय में पंजाब इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। किसी भी तरह के नशे से मुक्त होने का सर्वप्रथम उपाय यह है कि इस नशे से दूर रहने की सबसे पहले पहल वह व्यक्ति खुद करें फिर परिवार तथा समाज को भी इसमें सहायता करनी चाहिए और सरकार भी इन मादक पदार्थों पर रोक लगाने पर पूरा फोकस करे ना कि विभिन्न तरह के जागरूकता अभियानों पर अगर मार्केट में मादक पदार्थ नहीं मिलेंगे तो लोग खरीदेंगे कहां से ऐसे में लोगों का नशा करने का मौका ही नहीं मिलेगा और ना ही इस प्रकार के अभियानों के नाम पर सरकारी धन का व्यय होगा नशा मुक्ति केंद्र भी नशा छुड़ाने की सहायता में बहुत ज्यादा सहायक सिद्ध होते हैं इनका खूब प्रचार-प्रसार होना चाहिए तथा इनके केंद्र केवल चुनिंदा शहरों में ना होकर प्रत्येक जिले तथा ब्लॉक में भी होना चाहिए क्योंकि नशे की लत समाज के हर वर्ग में फैल चुका है।इससे पहले नशा आपको अपने जीवन से छुड़ाए आप नशा को छोड़ें !
नशे का जो हुआ शिकार ,
उसका उजड़ा घर परिवार। 

Post add

Leave A Reply

Your email address will not be published.