पुस्तक समीक्षा-“मीडिया संसार”

पुस्तक का नाम : मीडिया संसार , लेखक : डॉ. प्रभात कुमार सिंघल मूल्य। : ₹ 450/- प्रकाशक : साहित्यागार, जयपुर

@ chaltefirte.com  पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय बाद “मीडिया संसार” पुस्तक बाजार में आई है। प्राचीन समय से लेकर वर्तमान समय तक की पत्रकारिता, समय-समय पर हुए बदलाव, विभिन्न काल की पत्रकारिता, उद्देश्य स्वरूप के साथ-साथ भविष्य के संभावित जनसम्पर्क, पत्रकारिता और सूचनाओं के आदान-प्रदान परिदृश्य को बखूबी रेखाँकित किया गया है। 

हिंदी भाषा से उदित होकर पत्रकारिता एवं आंचलिक भाषाई पत्रकारिता का विकास सहित प्रिंट पत्रकारिता में आये आधुनिकीकरण और तकनीकी के पहलुओं से परिचय कराया गया हैं। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के विकास के काल क्रम के साथ पत्रकारिता में इनका उपयोग एवं आये बदलाव से इनका महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई हैं।
पुस्तक को पाठकों की सुविधा की दृष्टि से तीन खंडों में विभक्त कर पत्रकारिता के विविध पक्षों का समावेश करते हुए पत्रकारिता की दशा,दिशा और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई हैं। प्रथम खण्ड में जनसम्पर्क के प्रारम्भ और उसके उद्भव-विकास चर्चा के माध्यम से हमारी परंपरा से अवगत कराया गया हैं। खण्ड दो में पत्रकारिता के कौशल के बारे में बातचीत की गई हैं। पहले दो खण्ड जहाँ जनसम्पर्क विधा एवं पत्रकारिता पर महत्वपूर्ण जानकारी देतें हैं। तीसरा खण्ड इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि मीडिया से जुड़े देश के विद्वान एवं प्रबुद्ध लेखकों ने पत्रकारिता के गिरते स्तर, वर्तमान स्थिति,चुनोतियों,भावी आशाएं आदि पर अपने विचार बेबाकी से लिखे हैं और पत्रकारिता पर चिंतन का खुला कैनवास प्रदान किया हैं।
ऐसे समय में जब मीडिया की भूमिका पर तमाम सवाल हैं, ऐसे में वैचारिक और प्रशिक्षण से जुड़े साहित्य की जरूरत है जिससे हम सही रास्ते खोज सकें। पत्रकारिता की भाव भूमिका की समझ,उसके कौशल की समझ के लिए पुस्तकों का प्रकाशन जरूरी है। राजस्थान में जनसम्पर्क विभाग के वरिस्ठ अधिकारी रहे डॉ. प्रभात कुमार सिंघल एक ऐसे ही लेखक हैं,जिन्होंने मीडिया माध्य्म की चिंता की और वे नई पीढ़ी को सार्थक साहित्य देना चाहते हैं। उनकी यह महत्वपूर्ण पुस्तक इस दिशा में एक प्रयास है। पुस्तक में आज की पत्रकारिता के लिए उपयोगी टिप्स दिए गए हैं। पत्रकारिता की वर्तमान में प्रचलित सभी विधाओं में इसे पढ़ कर लेखन की शुरुआत की जा सकती हैं। पत्रकार के.डी.अब्बासी किताब के सह लेखक हैं।
उम्मीद की जा सकती है कि इस कृति का स्वागत होगा, यह किताब आज की हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय पत्रकारों,युवाओं विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी होगी। 231 पेज की पुस्तक को साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर द्वारा सुंदर एवं आकर्षक क्लेवर में प्रकाशित किया गया है।

 

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