गलत जानकारी देने पर बढ़ेगा जुर्माना, हटेगा जेल प्रावधान

नई दिल्ली। निवेश बढ़ाने के मकसद से सरकार आने वाले दिनों में कई अहम कानूनों में सजा के प्रावधानों को हटाने की तैयारी में है। हालांकि गलती पर या जानकारी छुपाने को लेकर जुर्माना बढ़ाकर 10 गुना तक हो जाएगा। साख्यिकी मंत्रालय की तरफ से कलेक्शन ऑफ स्टैटिस्टिक्स एक्ट 2008 में प्रस्तावित बदलावों पर लोगों से सुझाव मांगे गए हैं।
इस प्रस्ताव में जानबूझ कर गलत जानकारी देने, अधिकारियों को गुमराह करने वाले आंकड़ों देने को लेकर कंपनी या फिर व्यक्ति विशेष को लेकर मौजूद सजा के प्रावधान को हटाने का जिक्र किया गया है। कलेक्शन ऑफ स्टैटिस्टिक्स एक्ट 2008 के सेक्शन 16, 18, 19 और 22 में ऐसी गलती पर छह महीने की सजा का प्रावधान है जिसे खत्म किया जाएगा। इन धाराओं में व्यक्तियों पर लगे वाला जुर्माना एक से लेकर दो हजार रुपए है जिसे बढ़ाकर 10 से 20 हजार रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है।
वहीं कंपनियों पर पांच से लेकर 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है जिसे संशोधत कानून में बढ़ाकर 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपए तक करने का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव आंकड़े इकट्ठा करने वाले अधिकारियों के लिए भी किया गया है ताकि उनकी तरफ से लापरवाही पर लगाम लगाई जा सके। सांख्यिकी और कार्यक्रम कियान्वयन मंत्रालय के इस प्रस्ताव के जरिए सरकार का मानना है कि देश में घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। वहीं कोरोना के बाद के हालात में आर्थिक स्थिति के तेजी से मजबूत करने में भी सहायता मिलेगी। सरकार का ये भी मानना है कि सजा के प्रावधानों होने के चलते ऐसे मामलों के अदालत में जाने की प्रक्रिया करनी पड़ती है। इसके चलते कारोबारी सुगमता के पैमाने पर भारत पीछे रह जाता है।

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