आसमान छूती हरी सब्जियों का सच

बाल मुकुन्द ओझा

मानसूनी बारिश के बीच हरी सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। लोक डाउन के दौरान आई मंदी के साथ हो रही बारिश के कारण जहां सब्जियों की खेती चौपट हो गई है वहीं कीमतों में 50 से 100 फीसदी तक का उछाल आ गया है। लोगों का कहना है कि सब्जियों पर महंगाई की मार से खासकर मध्यम वर्ग और छोटे तबके के लोग परेशान है। आलू 40 रुपये और टमाटर 70 रूपये किलो बिक रहे हैं तो हरी सब्जियों के दाम भी आसमान पर पहुंच गए हैं। कई स्थानों में भारी बारिश की वजह से हरी सब्जियां मंडी तक नहीं पहुंच पा रही है। सड़कों और गलियों में ठेले लगाकर बेचीं जा रही हरी सब्जिया 100 रूपये किलो से कम नहीं है। बाजारों में अलग.अलग जगहों पर सजने वाली सब्जी की दुकानों में सब्जियां अलग.अलग कीमतों में भी बिक रही है।
मानव को स्वस्थ्य एवं निरोग रहने के लिए पोषण युक्त आहार की जरुरत होती हैं। इस आहार से हमें ऐसे खनिज तत्वए विटामिन एवं अन्यान्य पोषक पदार्थ मिलते है जो शरीर की वृद्धि के साथ.साथ उसे निरोग रखने में सहायक होते है। मगर लाख टके का सवाल है पोषणयुक्त हरी सब्जियां कहाँ मिलेगी। जो हरी सब्जियां आम आदमी को उपलब्ध होती है वे गंदे नाले अथवा गंदे पानी में उत्पन्न की जारही है। यही नहीं कई प्रकार के केमिकल मिलाकर भी हरी सब्जिया बेची जा रही है। सब्जियों के भाव आसमान को छू रहे है। ऐसा लगता है हरी सब्जिया आम आदमी की पहुँच से दूर हो गयी है और यदि मिल भी रही है तो वे जहरीली है। इससे बजाय निरोगी होने के अनेक बीमारियों के जकड़न में फंसने की संभावना ज्यादा रहती है।
घर के बड़े और बुजुर्ग अपने परिवार के सदस्यों से सदा हरी सब्जियों के सेवन पर जोर डालते है। खुदा न खास्ता कभी अस्पताल का रुख करना पड़ जाये तो वहां भी चिकित्सक आपको हरी सब्जियां खाने की सलाह देते मिल जायेंगे। आज की हमारी लाइफ स्टाइल के मधे नजर हरी सब्जियों पर विस्तृत विवेचना की जरुरत है। एक शोध के अनुसार हरी सब्जियां खाने से एक ओर जहां कैंसर जैसी बहुत सी असाध्य बीमारीयों से बचाव होता है वहीं दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। इसके साथ ही हरी सब्जियां खाने वाले लोग सब्जियां नहीं खाने वालों की तुलना में ज्यादा खुश रहते हैं।
हरी और पत्तेदार सब्जियां मानव स्वास्थ्य के लिए बजाय लाभदायक होने के जानलेवा साबित हो रही है। बच्चे से बुजर्ग तक विभिन्न बीमारियों के दौरान चिकित्सक हरी और पत्तेदार सब्जियों को जीवनदायी बता कर सेवन करने की सलाह देते है मगर यही सब्जियां अब हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी बनती जा रही है। मिर्च मसालेए दालेंए अनाज और खाने पीने की वस्तुएं तो पहले ही मिलावटी मिल रही थी। अब रही सही कसर प्रदूषित और खतरनाक रसायनों से युक्त हरी सब्जियों ने पूरी कर दी है।
स्वस्थ व सेहतमंद रहनेए बीमारियों से बचने और वजन घटाने में हरी सब्जियों का प्रयोग किया जाता है। बाजारों में बिक रही सब्जियों व फलों में बड़े पैमाने पर कीटनाशक का प्रयोग किया जा रहा है। जिसका मानव शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। आज हर कोई हर दिन बाजार से कीटनाशक के छिड़काव वाली जहरीली सब्जियां खरीदता है। हम अपने खाने में हर दिन किसी न किसी रूप में जहर खा रहे हैं। शुद्ध हरी सब्जियों का मिलना आज मुश्किल हो गया है। लौकी, तुरई, पालक, फूलगोभी, पत्तागोभी आदि सब्जियों में तरह तरह की रायायनिक खाद के साथ ही जहरीले कीटनाशक मिला कर खुलेआम बेचा जा रहा है। हम न चाहते हुए भी जहरीली सब्जियां खाने को मजबूर हैं। बाजारों एसड़क किनारों और ठेलों पर हमें हरी सब्जियां देखने को मिल जाती है मगर हम में से अधिकांश को यह पत्ता नहीं है की ये सब्जियां जहरीली है। जो सब्जियां हम खा रहे हैं वे प्रदूषित है क्योंकि आलूए बैंगनए अरवीए लाल सागए मूलीए भिंडी और फूल गोभी के भीतर छिपा बैठा है जानलेवा जहर।
एक सर्वे बताता है कि देश के करोड़ों लोग ऐसे फल व सब्जियां खा रहे हैं, जो किसी भी लिहाज से हमारे शरीर में जाने के योग्य नहीं हैं। ये फल व सब्जियां कीटनाशकों का प्रयोग कर विकसित की जा रही हैं। दुकानदार परवल, तुरई, लौकी, भिंडी,अदरख आदि को ताजा बनाए रखने के लिए इन्हें रसायन युक्त पानी से धोते हैं। इससे सब्जी दिखने में अधिक ताजी और हरी-भरी दिखाई देती है। देश के अधिकांश नगरीय क्षेत्रों में गंदे पानी से सब्जियां उगाई जा रही है। शासन प्रशासन के रोकथाम के प्रयास सिरे नहीं चढ़ रहे है। आम आदमी इस सम्बन्ध में जागरूक नहीं है। चमकीली सब्जियां देखते ही हम लेने के लिए ललचाते है और यह नहीं देखते कि ये सब्जियां हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। मगर हमारे पास लेने के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं है। यह धीमा जहर है जो सब्जियों के रास्ते हमारे शरीर में पहुंचकर विभिन्न बीमारियों से हमें जोड़ता है। सब्जियों में छिड़के जाने वाले ये केमिकल जब शरीर में प्रवेश करते हैं तो हायपरटेंशनए डिप्रेशन, माइग्रेन, अस्थमा और त्वचा संबंधी कई बीमारियों को जन्म देते हैं। यह भी सच है भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में हमें यह देखने और सोचने की फुर्सत नहीं है कि हमें क्या खाना है और क्या नहीं !

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