कोरोना ने बिगाड़ी अर्थव्यवस्था, छुड़ाई लाखों नौकरियां

डॉ मोनिका ओझा खत्री

अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी का चोली दामन का साथ है। अर्थव्यवस्था बिगड़ी तो नौकरियों पर भी संकट के बादल छायेंगे, इसमें कोई दो राय नहीं है। कोरोना वायरस ने भारत को एक नहीं अपितु कई मोर्चों पर संकट में डाल रखा है। कोरोना से होने वाली मौतें जहाँ झकझोर देने वाली है वहीँ अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट के साथ लाखों लोगों की नौकरियां छिन गयी है। देश की अर्थव्यवस्था एक साल से संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। यह स्थिति कोरोना से पूर्व की है। भारत सरकार के लाख प्रयासों की बाद भी अर्थव्यवस्था काबू में नहीं आयी। इस कारण वित्त वर्ष 2020 में जीडीपी ग्रोथ गिरकर 4.2 फीसदी रह गई। महामारी के कारण यह चुनौती और बढ़ गई है। चालू वित्त वर्ष 2020 – 21 में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 3 से 9 फीसदी तक घट सकता है। वित्त वर्ष 2020-21 में जीएसटी कलेक्शन में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी रही, इसमें से केवल 97,000 करोड़ रुपये की कमी का कारण जीएसटी क्रियान्वयन है। बाकी कमी का कारण कोरोना वायरस महामारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त वर्ष 2024-25 तक भारत को 5 खरब अमरीकी डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। इस वक्त भारत की अर्थव्यवस्था करीब 2.7 खरब अमरीकी डॉलर की है। इस लक्ष्य को पाने के लिए भारत को एड़ी छोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।
अर्थव्यवस्था का आकलन करने वाली अनेक संस्थान की रिपोर्टों का गहन अध्ययन करें तो पाएंगे देश एक गहरी आर्थिक मंदी से गुजर रहा है। बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ते ही चली जा रही है। कोरोना काल में दुनियाभर में लाखों लोगों को लॉकडाउन की वजह से अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है तो करोड़ों लोग बेरोजगार हो चुके हैं। लॉकडाउन के दौरान उद्योग धंधे पूरी तरह बंद रहे। इनमें काम करने वाले लोग अपने घरों को लौटे। अब ऐसे तमाम लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट है। नौकरी गंवा चुके लोग पाई-पाई को मोहताज हो गए। भारत भी इससे अछूता नहीं है। यहाँ भी लाखों लोग बेरोजगारी का संकट झेल रहे है।
2023 से 2030 के बीच नए वर्कर्स को समायोजित करने के लिए भारत को 9 करोड़ गैर-कृषि नौकरियों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा 3 करोड़ अतिरिक्त वर्कर कृषि कार्य को छोड़कर ज्यादा उत्पादकता वाले गैर-कृषि क्षेत्र से जुड़ेंगे। मैकेंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की श्इंडियाज टर्निंग पॉइंटश् रिपोर्ट के मुताबिक, इस संख्या को समायोजित करने के लिए देश को 2023 से हर साल 1.2 करोड़ अतिरिक्त गैर-कृषि नौकरियों की आवश्यकता होगी। मैकेंजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 से 2018 के बीच भारत में हर साल 40 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं। ऐसे में 2023 से 2030 के बीच भारत को तीन गुना ज्यादा नौकरियों पैदा करने की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि अतिरिक्त 5.5 करोड़ महिलाएं लेबर फोर्स से जुड़ जाती हैं तो इससे प्रतिनिधित्व में सुधार होगा और भारत की रोजगार सृजन अनिवार्यता अधिक होगी।
भारत में भी लॉकडाउन के कारण 25 मार्च के बाद से अब तक करीब 1,07,80,000 लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। इनमें सबसे ज्यादा टूरिज्म, ट्रेवल, हॉस्पिटैलिटी , ऑटोमोबाइल , एविएशन, ट्रांसपोर्ट , रिटेल , आईटी और स्टार्टअप्स सेक्टर में लागों की नौकरियां गई हैं। कोरोना काल में नौकरी गंवा चुके लोगों को मोदी सरकार तीन महीने तक वेतन का 50 फीसद के रूप में बेरोजगारी भत्ता दे रही है। इस योजना का फायदा केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो ईएसआई स्कीम के साथ कम से कम दो सालों से जुड़े हैं। भत्ते के दावा का निपटान 15 दिन के भीतर होगा। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के मुताबिक कोरोना संकट की के कारण लगभग 1.9 करोड़ लोगों की नौकरी जा चुकी है। आंकड़ों के अनुसार केवल जुलाई महीने में ही 50 लाख लोग बेरोजगार हुए हैं। हालांकि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के मुताबिक, जून महीने में 4.98 लाख लोग औपचारिक कार्यबल से भी जुड़े हैं।

Post add

Leave A Reply

Your email address will not be published.